वैसे ही महाराष्ट्र के वाड़ी रत्नागिरी #कोल्हापुर के ज्योतिबा, #पंढरपुर के विठोबा और #जेजुरी, #पुणे के खंडोबा असल में शुद्धोदन, बुद्ध और नंद ही थे. ✍️Amit Matey✍️ 👇👇👇👇👇👇 Watch कोल्हापुर के ज्योतिबा शुद्धोदन थे. https://youtu.be/7-BM9OuSnOg
Japan बौद्ध देश है और बौद्ध देश में Elephant Buddha को आज भी बौद्ध प्रतिक के रुप में पूजा जाता है.
Thailand बौद्ध देश है और बौद्ध देश में Elephant Buddha को आज भी बौद्ध प्रतिक के रुप में पूजा जाता है.
Bharat भी मुगल काल के पहले संपूर्ण रुप से बौद्ध देश ही था और तब से लेकर अब तक भारत में भी Elephant Buddha को ही पूजा जा रहा है.
मगर मुगल काल में ब्राह्मणों द्वारा Elephant Buddha के असली बौद्ध इतिहास का विकृतिकरण किया गया था और Elephant Buddha को वर्तमान के ब्राह्मण धर्म के प्रतिक गणेश के रुप में पेश किया गया था.
बाल गणेश कोई और नहीं बल्कि बालक सिद्धार्थ (बुद्ध) ही है, सिद्धी विनायक कोई और नहीं बल्कि सिद्धार्थ बुद्ध (विनयो के निर्माता) ही है और हिन्दू धर्म कुछ और नहीं बल्कि हिनयानी बौद्ध धर्म का ही विकृतिकरण है.
पौराणिक कथाओं में भगवान गणेश के कई सारे नाम बताएं गए हैं जिसमें से कुछ नाम इस प्रकार से है बुद्धिनाथ, विघ्नहर्ता और सिद्धीविनायक.
बुद्धिनाथ - पौराणिक कथाओं में भगवान गणेश को बुद्धि और ज्ञान के देवता कहा जाता है जो कि ऐतिहासिक सिद्धार्थ बुद्ध के गुणों की ही नकल है क्योंकि प्राचीन इतिहास में सिद्धार्थ बुद्ध ही बुद्धी और ज्ञान से परिपूर्ण थे. भगवान गणेश का एक नाम बुद्धिनाथ होना यानी ही भगवान बुद्ध का एक नाम बुद्ध-नाथ होना ही है क्योंकि प्राचीन भारत में बुद्ध ही तो थे, जो सभी के नाथ थे.
प्राचीन इतिहास में नाथ यह शब्द प्रमुखता से बुद्ध के लिए ही प्रयोग किया जाता था जिसका ऐतिहासिक उदाहरण यह है की बुद्ध ने मृगदाय वन में अपने पांच सहयोगी यों को धम्म के सार का उपदेश दिया था इसलिए ही कालांतर में मृगदाय वन को ही सारनाथ कहां जाने लगा था.
विघ्नहर्ता - भगवान गणेश को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है जिसके पिछे का सत्य इतिहास यह है कि बुद्ध ने दुःख और कष्ठों से मुक्ति का मार्ग बताया था और दुःख और कष्ठों से मुक्ति दिलाने वाले को ही विघ्नहर्ता कहा जाता है इसीलिए ऐतिहासिक विघ्नहर्ता तो बुद्ध ही थे.
सिद्धीविनायक - सिद्धार्थ द्वारा बुद्धत्व प्राप्त करने को ही पौराणिक कथाओं में सिद्धी प्राप्त करना लिखा गया है, और क्योंकि भगवान बुद्ध ने विनयों का निर्माण किया था इसीलिए वे विनयों के नायक कहलाते थे. विनयों के नायक का ही अर्थ विनायक होता है यानी ही सिद्धार्थ बुद्ध ही सिद्धीविनायक थे. और क्योंकि पौराणिक कथाएं यह बौद्ध इतिहास की नकल और विकृतिकरण ही है और भगवान गणेश यह बुद्ध का ही प्रतिकात्मक रुप है, इसलिए ही पौराणिक कथाओं में भगवान गणेश को भी सिद्धीविनायक ही कहा गया है.
पौराणिक कथाओं में भगवान बुद्ध के गुणों का गुणगान ही विकृत करके भगवान गणेश के नाम से किया गया है.
ऐतिहासिक बालक सिद्धार्थ और भगवान बुद्ध को ही वर्तमान में भगवान गणेश के नाम से भारत भर में पूजा जा रहा है.
लक्ष्मी को धन की देवी कहा जाता है और धन को आम बोली भाषा में मोह-माया कहा जाता है.
मोह-माया यह शब्द समय के साथ विकृत हुआ शब्द है जो कि असल में मोह-माया ना होकर #महामाया है. यानी ही महामाया को ही धन की देवी कहा जाता था.
ऐतिहासिक महामाया को ही पौराणिक कथाओं में लक्ष्मी और महालक्ष्मी कहा गया है. वैसे ही महामाया की छोटी बहन #गौतमी को ही पौराणिक कथाओं में गौरी कहां गया है(कई सारे नामों में से एक नाम).
बौद्ध भारत और बौद्ध इतिहास में महामाया (महालक्ष्मी) यह सिद्धार्थ बुद्ध की जन्म दात्री माता तो गौतमी (गौरी) यह पालिका थी. इसीलिए ही सिद्धार्थ बुद्ध की यह दोनों माताएं अपने महान त्याग और बुद्ध की माताएं होने की वजह से भारत भर में पुजनीय थी.
मध्यकाल में बौद्ध इतिहास का विकृतिकरण किया गया था और बौद्ध इतिहास को विकृत करके ही पौराणिक कथाएं लिखी गई थी जिसमें ऐतिहासिक महामाया को ही महालक्ष्मी तो ऐतिहासिक गौतमी को ही गौरी कहां गया है.
सच तो यही है कि भारत से बौद्ध धर्म कभी खत्म हुआ ही नहीं था बल्कि बौद्ध धर्म को ब्राह्मणों द्वारा विकृत कर दिया गया था और उसी विकृत किए गए बौद्ध धर्म का पालन आज सभी भारतीय कर रहे हैं.
बौद्ध धर्म भारतीयों के रग-रग में बसा था जिसे खत्म करना किसी के बस की बात नहीं थी और इसीलिए ही बौद्ध धर्म को विकृत किया गया था. इसी विकृत किए गए बौद्ध धर्म में भारतीयों द्वारा, बुद्ध माता महामाया और गौतमी को उनके पौराणिक रुप महालक्ष्मी और गौरी के तौर पर आज भी भारत के घर-घर में पूजा जा रहा है.
बौद्ध धर्म के विकृतिकरण के तहत ही हिन्दू धर्म की पौराणिक कथाओं में मन के मैल को ही शरीर का मैल बताया गया है और वह शरीर का मैल #पार्वती का बताया गया है.
इसके पिछे की सच्चाई यह है कि सिद्धार्थ को जन्म देने के 7 दिनों बाद ही उनकी जन्म दात्री माता #महामाया की मृत्यु हो गई थी इसलिए बालक सिद्धार्थ का पालन पोषण महामाया की छोटी बहन #प्रजापति_गौतमी ने किया था.
प्रजापति गौतमी ने सिद्धार्थ का सिर्फ पालन पोषण किया था, वह सिद्धार्थ की जन्म दात्री माता नहीं थी यही कारण है कि जब मध्यकाल में बौद्ध इतिहास का विकृतिकरण किया गया था तब पौराणिक कथाओं में गणेश को पार्वती द्वारा नैसर्गिक रूप से जन्मा नही बल्कि बाहरी रुप से निर्मित बताया गया था और वह निर्माण पार्वती के शरीर के मैल से बताया गया था.
सिद्धार्थ जो मन का मैल (मार) को नष्ट करके ही बुद्ध बने थे इस इतिहास का विकृतिकरण ही गणेश को शरीर के मैल से निर्मित बताया जाना है.
ऐतिहासिक प्रजापति ही पौराणिक पार्वती है, बालक सिद्धार्थ ही बाल गणेश है और हिन यानी बौद्ध धर्म का विकृतिकरण ही आज का हिनदू धर्म है.
बुद्ध ने मन को ही सभी बातों का प्रधान माना था इसलिए ही मन को संस्कारित करने पर जोर दिया था क्योंकि मन से ही शरीर संचालित होता है.
मन चंचल होता है और इस मन की चंचलता को ही प्रतिकात्मक रुप से चूहे के रुप में दर्शाया गया था क्योंकि चूहा भी मन की तरह ही चंचल होता है. चूहा यहां से वहां फुदकते रहता है बिल्कुल वैसे ही जैसे मन एक विचार से दूसरे विचार पर.
मन ही पूरे शरीर का वाहक होता है इसलिए ही मन (प्रतिकात्मक रुप चूहा) को गणेश (बुद्ध का प्रतिकात्मक रुप) का वाहन बताया गया है क्योंकि बुद्ध ने मन को काबू कर लिया था.
सिद्धार्थ मार (मन का मैल) का दमन करके ही #बुद्ध बने थे इसलिए ही सिद्धार्थ बुद्ध के प्रतिकात्मक रुप #गणेश को बौद्ध इतिहास के विकृतिकरण के तहत मन के मैल की जगह शरीर के मैल से निर्मित बताया गया था....
बौद्ध इतिहास में #महामाया का एक सपना बहुत ही ज्यादा प्रचलित है कि, महामाया ने गर्भ धारण करते समय एक सपना देखा था कि - एक अत्यंत सुंदर और तेजस्वी सफेद हाथी अपनी सूंड में सफेद कमल का फूल लिए हुए आकाश (तावतिंस लोक) से नीचे उतरा. फिर उस हाथी ने महामाया की तीन बार परिक्रमा की और फिर उनके दाहिनी कोख (गर्भ) में प्रवेश कर गया.
क्योंकि इस सपने का संबंध सिद्धार्थ (बुद्ध) के जन्म के साथ जुड़ा हुआ था, इसलिए ही कालांतर में बालक सिद्धार्थ को शिल्पों में सिर हाथी का और बाकी शरीर मनुष्य का इस रुप में दर्शाया जाने लगा था.
मगर जब मध्यकाल में बौद्ध इतिहास का विकृतिकरण किया गया, तब बालक सिद्धार्थ के इस रुप को ब्राह्मणी ग्रंथों में एक अलग ही रंग-रुप और कहानी के साथ पेश किया गया था. मगर यह कहानी कुछ और नहीं बल्कि बालक सिद्धार्थ और सिद्धार्थ #बुद्ध के इतिहास का विकृतिकरण ही था.
बालक सिद्धार्थ को बाल गणेश के रुप में दर्शाने की मुख्य वजह बौद्ध इतिहास में महामाया का वह प्रसिद्ध और प्रचलित सपना ही था.
DNA Jung_e_Aazadi
#कुलदेवता #buddhism
पूरे भारत के अलग-अलग राज्यों में #कुलदेवता या #कुलदेवी के रुप में पूजे जाने वाले देवी-देवताओं का संबंध असल में #बौद्ध #धर्म से ही है,
वैसे ही महाराष्ट्र के वाड़ी रत्नागिरी #कोल्हापुर के ज्योतिबा, #पंढरपुर के विठोबा और #जेजुरी, #पुणे के खंडोबा असल में शुद्धोदन, बुद्ध और नंद ही थे.
✍️Amit Matey✍️
👇👇👇👇👇👇
Watch
कोल्हापुर के ज्योतिबा शुद्धोदन थे.
https://youtu.be/7-BM9OuSnOg
पंढरपुर के विठोबा बुद्ध थे.
https://youtu.be/5q0q_Duvft4
और जेजुरी के खंडोबा नंद ही थे.
https://youtu.be/Hb0bueDfuvA
☝️☝️☝️☝️☝️☝️
#ज्योतिबा #विठोबा #खंडोबा #jyotiba #Vithoba #khandoba #kolhapur #pandharpur #jejuri #pune
1 week ago | [YT] | 85
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DNA Jung_e_Aazadi
#ganesha #elephant #buddha
Part - 5
#Indian_The_Land_Of_Buddha
Japan बौद्ध देश है और बौद्ध देश में Elephant Buddha को आज भी बौद्ध प्रतिक के रुप में पूजा जाता है.
Thailand बौद्ध देश है और बौद्ध देश में Elephant Buddha को आज भी बौद्ध प्रतिक के रुप में पूजा जाता है.
Bharat भी मुगल काल के पहले संपूर्ण रुप से बौद्ध देश ही था और तब से लेकर अब तक भारत में भी Elephant Buddha को ही पूजा जा रहा है.
मगर मुगल काल में ब्राह्मणों द्वारा Elephant Buddha के असली बौद्ध इतिहास का विकृतिकरण किया गया था और Elephant Buddha को वर्तमान के ब्राह्मण धर्म के प्रतिक गणेश के रुप में पेश किया गया था.
बाल गणेश कोई और नहीं बल्कि बालक सिद्धार्थ (बुद्ध) ही है, सिद्धी विनायक कोई और नहीं बल्कि सिद्धार्थ बुद्ध (विनयो के निर्माता) ही है और हिन्दू धर्म कुछ और नहीं बल्कि हिनयानी बौद्ध धर्म का ही विकृतिकरण है.
भारत बौद्ध मय था, है और हमेशा रहेगा.
✍️Amit Matey✍️
एक सत्यशोधक
#buddha #buddhism #hinduism #history #mythology
1 week ago | [YT] | 26
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DNA Jung_e_Aazadi
#ganesha #elephant #buddha
Part - 4
#Indian_The_Land_Of_Buddha
पौराणिक कथाओं में भगवान गणेश के कई सारे नाम बताएं गए हैं जिसमें से कुछ नाम इस प्रकार से है बुद्धिनाथ, विघ्नहर्ता और सिद्धीविनायक.
बुद्धिनाथ - पौराणिक कथाओं में भगवान गणेश को बुद्धि और ज्ञान के देवता कहा जाता है जो कि ऐतिहासिक सिद्धार्थ बुद्ध के गुणों की ही नकल है क्योंकि प्राचीन इतिहास में सिद्धार्थ बुद्ध ही बुद्धी और ज्ञान से परिपूर्ण थे. भगवान गणेश का एक नाम बुद्धिनाथ होना यानी ही भगवान बुद्ध का एक नाम बुद्ध-नाथ होना ही है क्योंकि प्राचीन भारत में बुद्ध ही तो थे, जो सभी के नाथ थे.
प्राचीन इतिहास में नाथ यह शब्द प्रमुखता से बुद्ध के लिए ही प्रयोग किया जाता था जिसका ऐतिहासिक उदाहरण यह है की बुद्ध ने मृगदाय वन में अपने पांच सहयोगी यों को धम्म के सार का उपदेश दिया था इसलिए ही कालांतर में मृगदाय वन को ही सारनाथ कहां जाने लगा था.
विघ्नहर्ता - भगवान गणेश को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है जिसके पिछे का सत्य इतिहास यह है कि बुद्ध ने दुःख और कष्ठों से मुक्ति का मार्ग बताया था और दुःख और कष्ठों से मुक्ति दिलाने वाले को ही विघ्नहर्ता कहा जाता है इसीलिए ऐतिहासिक विघ्नहर्ता तो बुद्ध ही थे.
सिद्धीविनायक - सिद्धार्थ द्वारा बुद्धत्व प्राप्त करने को ही पौराणिक कथाओं में सिद्धी प्राप्त करना लिखा गया है, और क्योंकि भगवान बुद्ध ने विनयों का निर्माण किया था इसीलिए वे विनयों के नायक कहलाते थे. विनयों के नायक का ही अर्थ विनायक होता है यानी ही सिद्धार्थ बुद्ध ही सिद्धीविनायक थे. और क्योंकि पौराणिक कथाएं यह बौद्ध इतिहास की नकल और विकृतिकरण ही है और भगवान गणेश यह बुद्ध का ही प्रतिकात्मक रुप है, इसलिए ही पौराणिक कथाओं में भगवान गणेश को भी सिद्धीविनायक ही कहा गया है.
पौराणिक कथाओं में भगवान बुद्ध के गुणों का गुणगान ही विकृत करके भगवान गणेश के नाम से किया गया है.
ऐतिहासिक बालक सिद्धार्थ और भगवान बुद्ध को ही वर्तमान में भगवान गणेश के नाम से भारत भर में पूजा जा रहा है.
भारत बौद्ध मय था है और हमेशा रहेगा.
✍️Amit Matey✍️
एक सत्यशोधक
#history #mythology #buddhism #hinduism
1 week ago | [YT] | 47
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DNA Jung_e_Aazadi
#laxmi #gauri
Rewriting History
#Indian_The_Land_Of_Buddha
लक्ष्मी को धन की देवी कहा जाता है और धन को आम बोली भाषा में मोह-माया कहा जाता है.
मोह-माया यह शब्द समय के साथ विकृत हुआ शब्द है जो कि असल में मोह-माया ना होकर #महामाया है. यानी ही महामाया को ही धन की देवी कहा जाता था.
ऐतिहासिक महामाया को ही पौराणिक कथाओं में लक्ष्मी और महालक्ष्मी कहा गया है. वैसे ही महामाया की छोटी बहन #गौतमी को ही पौराणिक कथाओं में गौरी कहां गया है(कई सारे नामों में से एक नाम).
बौद्ध भारत और बौद्ध इतिहास में महामाया (महालक्ष्मी) यह सिद्धार्थ बुद्ध की जन्म दात्री माता तो गौतमी (गौरी) यह पालिका थी. इसीलिए ही सिद्धार्थ बुद्ध की यह दोनों माताएं अपने महान त्याग और बुद्ध की माताएं होने की वजह से भारत भर में पुजनीय थी.
मध्यकाल में बौद्ध इतिहास का विकृतिकरण किया गया था और बौद्ध इतिहास को विकृत करके ही पौराणिक कथाएं लिखी गई थी जिसमें ऐतिहासिक महामाया को ही महालक्ष्मी तो ऐतिहासिक गौतमी को ही गौरी कहां गया है.
सच तो यही है कि भारत से बौद्ध धर्म कभी खत्म हुआ ही नहीं था बल्कि बौद्ध धर्म को ब्राह्मणों द्वारा विकृत कर दिया गया था और उसी विकृत किए गए बौद्ध धर्म का पालन आज सभी भारतीय कर रहे हैं.
बौद्ध धर्म भारतीयों के रग-रग में बसा था जिसे खत्म करना किसी के बस की बात नहीं थी और इसीलिए ही बौद्ध धर्म को विकृत किया गया था. इसी विकृत किए गए बौद्ध धर्म में भारतीयों द्वारा, बुद्ध माता महामाया और गौतमी को उनके पौराणिक रुप महालक्ष्मी और गौरी के तौर पर आज भी भारत के घर-घर में पूजा जा रहा है.
भारत बौद्धमय था, है और हमेशा रहेगा.
✍️Amit Matey✍️
एक सत्यशोधक
#history #mythology #buddhism #hinduism #buddha
1 week ago | [YT] | 50
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DNA Jung_e_Aazadi
#ganesha #elephant #buddha
Part - 3
#Indian_The_Land_Of_Buddha
बौद्ध धर्म के विकृतिकरण के तहत ही हिन्दू धर्म की पौराणिक कथाओं में मन के मैल को ही शरीर का मैल बताया गया है और वह शरीर का मैल #पार्वती का बताया गया है.
इसके पिछे की सच्चाई यह है कि सिद्धार्थ को जन्म देने के 7 दिनों बाद ही उनकी जन्म दात्री माता #महामाया की मृत्यु हो गई थी इसलिए बालक सिद्धार्थ का पालन पोषण महामाया की छोटी बहन #प्रजापति_गौतमी ने किया था.
प्रजापति गौतमी ने सिद्धार्थ का सिर्फ पालन पोषण किया था, वह सिद्धार्थ की जन्म दात्री माता नहीं थी यही कारण है कि जब मध्यकाल में बौद्ध इतिहास का विकृतिकरण किया गया था तब पौराणिक कथाओं में गणेश को पार्वती द्वारा नैसर्गिक रूप से जन्मा नही बल्कि बाहरी रुप से निर्मित बताया गया था और वह निर्माण पार्वती के शरीर के मैल से बताया गया था.
सिद्धार्थ जो मन का मैल (मार) को नष्ट करके ही बुद्ध बने थे इस इतिहास का विकृतिकरण ही गणेश को शरीर के मैल से निर्मित बताया जाना है.
ऐतिहासिक प्रजापति ही पौराणिक पार्वती है, बालक सिद्धार्थ ही बाल गणेश है और हिन यानी बौद्ध धर्म का विकृतिकरण ही आज का हिनदू धर्म है.
भारत बौद्धमय था, है और हमेशा रहेगा.
✍️Amit Matey✍️
एक सत्यशोधक
#buddhism #hinduism #history #mythology
2 weeks ago | [YT] | 193
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DNA Jung_e_Aazadi
#ganesha #elephant #buddha
Part - 2
#Indian_The_Land_Of_Buddha
बुद्ध ने मन को ही सभी बातों का प्रधान माना था इसलिए ही मन को संस्कारित करने पर जोर दिया था क्योंकि मन से ही शरीर संचालित होता है.
मन चंचल होता है और इस मन की चंचलता को ही प्रतिकात्मक रुप से चूहे के रुप में दर्शाया गया था क्योंकि चूहा भी मन की तरह ही चंचल होता है. चूहा यहां से वहां फुदकते रहता है बिल्कुल वैसे ही जैसे मन एक विचार से दूसरे विचार पर.
मन ही पूरे शरीर का वाहक होता है इसलिए ही मन (प्रतिकात्मक रुप चूहा) को गणेश (बुद्ध का प्रतिकात्मक रुप) का वाहन बताया गया है क्योंकि बुद्ध ने मन को काबू कर लिया था.
सिद्धार्थ मार (मन का मैल) का दमन करके ही #बुद्ध बने थे इसलिए ही सिद्धार्थ बुद्ध के प्रतिकात्मक रुप #गणेश को बौद्ध इतिहास के विकृतिकरण के तहत मन के मैल की जगह शरीर के मैल से निर्मित बताया गया था....
भारत बौद्धमय था, है और हमेशा रहेगा.
✍️Amit Matey✍️
एक सत्यशोधक
#history #mythology #buddhism #hinduism
2 weeks ago | [YT] | 85
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DNA Jung_e_Aazadi
#ganesha #elephant #buddha
Part - 1
#Indian_The_Land_of_Buddha
बौद्ध इतिहास में #महामाया का एक सपना बहुत ही ज्यादा प्रचलित है कि, महामाया ने गर्भ धारण करते समय एक सपना देखा था कि - एक अत्यंत सुंदर और तेजस्वी सफेद हाथी अपनी सूंड में सफेद कमल का फूल लिए हुए आकाश (तावतिंस लोक) से नीचे उतरा. फिर उस हाथी ने महामाया की तीन बार परिक्रमा की और फिर उनके दाहिनी कोख (गर्भ) में प्रवेश कर गया.
क्योंकि इस सपने का संबंध सिद्धार्थ (बुद्ध) के जन्म के साथ जुड़ा हुआ था, इसलिए ही कालांतर में बालक सिद्धार्थ को शिल्पों में सिर हाथी का और बाकी शरीर मनुष्य का इस रुप में दर्शाया जाने लगा था.
मगर जब मध्यकाल में बौद्ध इतिहास का विकृतिकरण किया गया, तब बालक सिद्धार्थ के इस रुप को ब्राह्मणी ग्रंथों में एक अलग ही रंग-रुप और कहानी के साथ पेश किया गया था. मगर यह कहानी कुछ और नहीं बल्कि बालक सिद्धार्थ और सिद्धार्थ #बुद्ध के इतिहास का विकृतिकरण ही था.
बालक सिद्धार्थ को बाल गणेश के रुप में दर्शाने की मुख्य वजह बौद्ध इतिहास में महामाया का वह प्रसिद्ध और प्रचलित सपना ही था.
बाल गणेश असल में बालक सिद्धार्थ (बुद्ध) ही है.
भारत बौद्ध मय था, है और हमेशा रहेगा....
✍️Amit Matey✍️
एक सत्यशोधक
#history #mythology #buddhism #hinduism
2 weeks ago | [YT] | 145
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DNA Jung_e_Aazadi
#दृष्टिकोण - 17
Be with someone
Who is good
For your mental health.
- Bhagwan Buddha
ऐसे व्यक्ति के साथ रहें
जो आपकी मानसिक सेहत के लिए
अच्छा हो.
- भगवान बुद्ध
✍️Amit Matey✍️
एक सत्यशोधक
#buddha #buddhism #buddhaquotes #buddhateachings
1 month ago | [YT] | 21
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DNA Jung_e_Aazadi
#दृष्टिकोन - 16
If you judge people by their actions,
You will never be deceived by their words.
- Bhagwan Buddha
अगर आप लोगों को उनके कामों से आंकेंगे,
तो आप कभी भी उनकी बातों से धोखा नहीं खाएंगे.
- भगवान बुद्ध
✍️Amit Matey✍️
एक सत्यशोधक
#buddha #buddhateachings
#buddhism
#buddhaquotes
1 month ago | [YT] | 55
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DNA Jung_e_Aazadi
#दृष्टिकोण - 15
Keep your thoughts positive,
Because your thoughts become your words.
Keep your words positive,
Because your words become your behaviour.
Keep your behaviour positive,
Because you are behaviour becomes your habit.
Keep your habit positive, Because your habit Become your value.
Keep your value positive Because your value become your destiny.
- Bhagwan Buddha
अपने विचारों को सकारात्मक रखें क्योंकि,
आपके विचार ही आपके शब्द बनते हैं.
अपने शब्दों को सकारात्मक रखें क्योंकि,
आपके शब्द ही आपका व्यवहार बनते हैं.
अपने व्यवहार को सकारात्मक रखें क्योंकि,
आपका व्यवहार ही आपकी आदत बनता है.
अपनी आदतों को सकारात्मक रखें क्योंकि,
आपकी आदतें ही आपके मूल्य बनती हैं.
अपने मूल्यों को सकारात्मक रखें क्योंकि,
आपके मूल्य ही आपका भाग्य बनते हैं.
- भगवान बुद्ध
✍️Amit Matey✍️
एक सत्यशोधक
#buddha #buddhism #buddhaquotes #buddhateachings
1 month ago | [YT] | 52
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