आज पिता जी की पुण्यतिथि है पितृ पक्ष में पूर्वजों के लिए कुछ भाव मन में उमड़ते है पर उनके लिए शब्द हमेशा ही कम पड़ जाते हैं, बौने लगते हैं...उनके व्यक्तित्व के समक्ष। भावनाए , एहसास और उनके जाने की पीड़ा कम नहीं हो पाती...उनकी उपस्थिति स्वप्न में भी सम्बल बन जाती है। बहुत कुछ कहने का मन करता है ... फिर कुछ भी कहने का मन नहीं करता...। अन्तरतम में समाहित , शब्दों से परे भाव गहराते ही जाते हैं.. । मधुर स्मृतियों के साथ अश्रुपूरित विनम्र श्रद्धांजलि.. ... पितृपक्ष में बचपन से लेकर आज तक के न जाने कितने चित्र स्मृतिपटल पर उभर कर मेरे दिलो दिमाग पर छाने लगे हैं , कितने अपने छूट गये, कितने आत्मीय स्वजन बिछड़ गये। जन्म-मृत्यु एक शाश्वत सत्य है फिर भी न जाने उनसे जुड़े कितने सिलसिले याद आने लगे हैं। मेरी जिंदगी के फलसफे़ में रिश्ते कभी जिंदगी के इस पार तक सीमित नहीं रहे। यह मेरी नितांत निजी सोच और आस्था है कि आत्मा का जुड़ाव भौतिक शरीर के आगे भी है, सम्बन्धों में महसूस होती गहरी अनुभूतियां हमारे पूर्व जन्मो से आ रहे जुड़ाव की निरंतरता का एहसास है, पितृपक्ष के प्रति मेरा श्रद्धाभाव हमेशा रहा है मेरे लिए पितृपक्ष और श्राद्ध किसी कर्त्तव्य या कर्मकांड का हिस्सा मात्र नहीं है,मेरे लिए यह श्रद्धा का विषय है , दिल से जुड़ा एक गहरा एहसास है। पितृपक्ष में पिता जी की पुण्यतिथि मेरे लिए आसमान से झांकती उन स्नेहिल आंखों से हो रही दुआओं की बरसात है जो मेरे मन और आत्मा को भिगोती रही है। हमारे बुजुर्ग हमारा सौभाग्य हैं, पितृपक्ष हमें उनकी अहमियत का पुरजोर तरीके से एहसास भी दिलाते हैं..। वे जो कल थे आज नहीं है, वे जो आज है कल नहीं रहेंगे। इस बीच के समय को उनके साथ गुजारने का, उनके अनुभवों से सीखने का, उनसे विरासत में मिली परम्पराओं और संस्कारों को भावी पीढ़ी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी को मानों याद दिलाते हैं। पितृपक्ष, श्राद्धकर्म और तर्पण नयी पीढ़ी के लिए दकियानूसी सोच का पर्याय बनते जा रहे हैं, धीरे धीरे इन संस्कारों का, इन परम्पराओं का लोप सा होता जा रहा है।मेरा मानना है कि किसी भी परम्परा के मूल में श्रद्धा और विश्वास जरूरी होता है। परम्पराओं का देश,काल और वातावरण से प्रभावित होना लाजिमी भी है। बदले हुए परिवेश और मशरूफियत में इसके रूप में,कर्मकांड में या विधि में बदलाव अस्वाभाविक भी नहीं है। समय के साथ परम्पराओं में परिवर्तन की स्वीकार्यता होनी भी चाहिए बशर्ते कि इनके मूल में निहित भावनात्मक लगाव और जुड़ाव कायम रहे । यू तो अपनों को याद करने का कोई एक दिन मुकर्रर नहीं होता है, यादें तो जीवन का अभिन्न अंग होती हैं फिर भी उन यादों को कुछ ख़ास तो बनाया ही जा सकता है। पितृपक्ष दिवंगत आत्माओं को श्रद्धासुमन अर्पित करने के,उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने के खा़स दिन होते है। इसके साथ ही पितृपक्ष में हम अपने जीवित बुजुर्गो को अधिक समय देकर, उनके अनुभवों को साझा कर उन्हें यह एहसास दिला सकते हैं कि हमारी तमाम कामयाबी की कहानियों के पीछे के उनके अदृश्य हाथों का सहारा, उनकी त्याग और तपस्या हमें आज भी याद है। हमारी तमाम खुशियों की डोर के एक सिरे को उन बूढ़े हो चले हाथों ने आज भी पकड़ रखा है, उनके शरीर कमजोर भले हो गये हों,कांधे झुक गये हों पर उनके संस्कार अदृश्य ताकत बन आज भी हमारी ऊर्जा का सतत संचार करते है। हमें उन्हें इस भरोसे का एहसास दिलाने की जरूरत है कि उनकी आंखों की धुंधली हो चली रौशनी आज भी हमारी दुनिया को रौशन कर रही है, उनकी थरथराती उंगलियों के स्पर्श, उनका आशीर्वाद हर बला से,हर मुसीबत में आज भी हमारा रक्षा कवच हैं। हम उनसे इन भावनाओं को साझा कर उनकी भी खुशियों में इज़ाफ़ा कर सकते हैं..।कभी कभी हम अपनों से संकोच वश खुल कर अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में देर कर देते हैं, उनके जाने के बाद हमसे छूट गये वे पल ही अफसोस का सबब बन जाते हैं। शायद भावनाओं को शब्द देने की,अभिव्यक्त करने की आवश्यकता होती ही है, हर सम्बन्ध हर रिश्ता सच्ची भावाभिव्यक्ति से तसल्ली पाता है.. फलता फूलता है,पुरसकून होता है। हमारे जीवित बुजुर्गों की दुआएं और हमारे पूजनीय दिवंगत पूर्वजों, हमारे पुरखों की आत्मा से बरसती ये रहमतें हमारी जिंदगी में ईश्वर की ओर से मिल रही नेमतें है ,इनका तहेदिल से किया गया आदर -सम्मान, इनके प्रति आभार हमें भी सुकून देता है । पितृपक्ष न केवल अपने कुल के पुरखो को स्मरण करने के दिन है अपितु उन स्नेहिल अपनो के प्रति भी कृतज्ञता के सुमन अर्पित करने के दिन है़ जिनसे हमारा रक्त सम्बन्ध भले न रहा हो किंतु भावनात्मक रिश्ता जरुर रहा है। पितृपक्ष पर नम आंखों से हमारी अपने सभी पूर्वजों को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि और हर उस आत्मा को भी श्रद्धा सुमन अर्पित ,जिसके तार किसी न किसी जन्म में हमसे जुड़े रहे हैं। मधुर स्मृतियों के साथ पिता जी को विनम्र श्रद्धांजलि, सादर नमन, नमन, #father#AsianGames2026#prayagrajnews#prayagraj_official#highlightseveryone#prayagrajallahabad#fbreels#prayagrajcity#trend#viralpost#fyp
सोशल मीडिया पर वायरल यह तस्वीर जिसमें दो महिलाएं हैं जिसमें से एक के कंधे पर संविधान की सौगंध है। जिस विभाग से वेतन ले रही है उसने इसको एक दायित्व सौपा है और वह अपने दायित्व से जुड़ी हुई है। दायित्व के साथ संवैधानिक मर्यादा में बधी है क्योंकि उसका परिवार है समाज है लोक समीक्षा है पर वह इस भीड़ में अकेली है उसके पीछे कोई नहीं है क्योंकि वह किसी राजनीतिक पार्टी से संबंधित नहीं है किसी सामाजिक संगठन से जुड़ी नहीं है हर सवाल का उत्तर देने के लिए वह अकेली है। उसको बचाने के लिये भीड़ नहीं है । वह कुछ कर नहीं सकती है क्योंकि उसके हर एक्सन पर भीड़ के मोबाइल कैमरे हैं। क्योंकि उसे संविधान ने अपनी आतमरक्षा के लिए अधिकार तो दिया है पर वह आत्मरक्षा के लिए बल प्रयोग नहीं कर सकती है क्योंकि कल कोर्ट में उसे अकेली खड़ी होना है ।
दूसरी महिला का कंधा दायित्व विहीन है। वह जितनी अराजकता करेगी उतनी ही उसको पापुलरिटी मिलेगी उसका पार्टी में कद बढ़ेगा पद बढ़ेगा कोई उसे शेरनी कहेगा तो कोई संविधान की रक्षा करने वाला। वह संविधान को भी जानती है कि सड़क पर प्रदर्शन से किसी संवैधानिक संस्था प्रमुख को हटाया नहीं जा सकता है पर उसे तो लोकप्रियता हासिल करनी है। क्योंकि वही उसका भविष्य है इसलिए साथ में गैर जिम्मेदार व अराजक तत्वों से भरी भीड़ है। और हल्ला मचाने वाले सैकड़ो युट्यूबर्स हैं। तमाम विपक्षी राजनीतिक दलों व सामाजिक संगठनों से फंडिंग है। उसकी कोई जवाबदेही नहीं है।उसके सपोर्ट में भारी भीड़ है। उसके इन असंवैधानिक तथ्यों को सही ठहराने के लिए सोशल मीडिया हैंडलर्स है उसके साथ जवाब देने के लिए संसद से लेकर संयुक्त राष्ट्र तक लोग हैं। माननीय उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्तागण साथ खड़े है। इसलिए आज एक शेरनी की तरह दूसरे पर चढ़ी हुई है दूसरी खाकी वर्दी में असहाय नजर आ रही है। अगर उसके साथ भी संविधान की सौगंध व विभाग का दायित्व ना हो तो दूसरी को पटक कर ऊपर चढ़ कर जबड़ा तोड़ देने की ताकत रखती है फिर भी कल इस महिला के लिए लाखों युट्यूबर्स मीडिया के समाचार बड़ी -बड़ी राजनीतिक दलों के नेता उसके खिलाफ थाना पर धरना देगे उसे सत्ताधारी पार्टियों का एजेंट बताएंगे सत्ता बदलती रहेगी पर उसका दायित्व तो नहीं बदलेगा।विपक्ष के नेता मुकदमे कायम कराने के लिए थाने पर बैठेंगे और बड़े-बड़े अधिवक्तागण इसके विरुद्ध बड़ी-बड़ी दलीलें लिए माननीय उच्चतम न्यायालय तक याचिका दायर करेगे पर आप सोचिए क्या खाकी वर्दी में लिपटी वह महिला संवैधानिक अधिकारों से वंचित है क्या वह हमारे परिवार की बेटी नहीं है बहन नहीं है हमें उसके पक्ष में बोलने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि वह खाकी वर्दी में लिपटी हुई है। क्या आप चाहते हैं कि वह अपने दायित्वों का निर्वहन न करें और भीड़ जो कर रही है उसका समर्थन करें। या उसके दायित्व को राजनीतिक चश्मे की दृष्टि से आप देखेंगे। पढ़े-लिखे होने के नाते आपका जवाब सटीक होना चाहिए यह आपसे उम्मीद है #highlightseveryone#trendingreels#fb#viralreels#highlightsシ゚#trendingreel#highlight#reelschallenge#fbreels
वाराणसी इलाहाबाद और मेरठ के एसएसपी एवं सीबीआई के पूर्व निदेशक रहे पूर्व डीजी वरिष्ठ आईपीएस डॉक्टर त्रिनाथ मिश्रा का निधन दुखद 1965 बैच के रिटायर IPS अधिकारी डॉ. त्रिनाथ मिश्रा का गाजियाबाद में निधन अत्यंत दुःखद है। उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस में वाराणसी, इलाहाबाद और मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक समेत एडीजी पीएसी मुख्यालय जैसे महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दीं। अपने गौरवपूर्ण सेवाकाल में उन्होंने मणिपुर के पुलिस महानिदेशक, एसपीजी निदेशक, सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी के निदेशक, सीबीआई निदेशक और सीआरपीएफ महानिदेशक जैसे महत्वपूर्ण दायित्व भी निभाए। डॉ. त्रिनाथ मिश्रा की कर्तव्यनिष्ठा, नेतृत्व क्षमता और पुलिस सेवा के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा। उनके निधन से पुलिस परिवार ने एक अनुभवी और गौरवशाली अधिकारी को खो दिया है। यह सम्पूर्ण पुलिस परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है।
कभी-कभी कुछ ऐसी घटनाएं जिनको सुनकर आंखों में आंसू भर आते हैं।यूपी के अंबेडकर नगर जिले के 6 बहनों के अकेले भाई सीआईएसएफ में कंपनी कमांडर अंकित पांडे जिनको किसी दुश्मन ने नहीं बल्कि अपनों ने ही शहीद कर दिया, सीआईएसएफ के जवान अभिदेश सिंह ने आपसी हसी मज़ाक व कहासुनी में अपने ही कंपनी कमांडर अंकित पांडे,सहित सब इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह, सिपाही रफ़ीक अहमद और संदीप कुमार की रायफल से गोलियां चलाकर शहीद कर दिया सभी को विनम्र श्रद्धांजलि एवं भगवान से प्रार्थना है कि चरणों में स्थान दे और परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे ॐ शांति शांति शांति शांति #cisf#viralreels#highlightseveryone#fbreels#trendingreels#trendingreel TopFans #highlight#trend#fb#highlightseveryone
एशियन गेम्स के क्रिकेट फाइनल में पाकिस्तान की टीम को को 19 रनों से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम करने वाली भारतीय क्रिकेट टीम को हार्दिक बधाई। भारतीय बल्लेबाजों द्वारा 211 रन का शानदार स्कोर खड़ा करने के बाद भारतीय गेंदबाजों ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान को 192 रन पर रोक दिया। दबाव भरे फाइनल में टीम की शानदार बल्लेबाजी, गेंदबाजी और बेहतरीन टीम भावना ने भारत को लगातार एशियन गेम्स में दूसरी बार स्वर्ण पदक में क्रिकेट के खेल में दिलाया।
फेसबुक से दोस्ती कभी भी किसी को भारी पड़ सकती है 4 साल से फरार शातिर नेपाली चोर ने सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस लड़की से वह दोस्ती कर रहा है वह यूपी पुलिस की महिला कांस्टेबल है और उसका प्यार उसको सलाखों के पीछे भेजने के लिए पर्याप्त है - मेरठ के थाना टी पी नगर के अन्तर्गत रहने वाले बिल्डर के घर 80 लाख की चोरी करके फरार हो गया था नेपाली नौकर। प्रत्यावर्तन संधि के अनुसार किसी भी अभियुक्त को उसके देश में जाकर गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। पर पुलिस के फैलाये जाल में आकर चोर खुद ही फस गया पुलिस ने चोर को भारत बुलाने के लिए फेसबुक का सहारा लिया महिला कांस्टेबल ने फेसबुक के जरिए उससे दोस्ती की और खुद को हरिद्वार की रहने वाली बताया एक महीने तक लगातार बात होती रही और जब चोर महिला कांस्टेबल के प्रेम जाल में फंस गया तो महिला कांस्टेबल ने उसको हरिद्वार में मिलने के लिए बुलाया और चोर जब हरिद्वार आया तो पुलिस ने उसको दबोच लिया। मेरठ पुलिस के अनुसार लाल भीम भूल निवासी लेकोट, थाना वायल, जनपद डोटी, नेपाल, फेसबुक चलाता था। पुलिस टीम ने महिला सिपाही के माध्यम से उससे दोस्ती कराई। दोनों ने मोबाइल नंबर साझा किए और महिला सिपाही करीब एक माह तक उससे बातचीत करती रही। पुलिस को पता था कि लाल भीम नेपाल में है और भारत आने से बच रहा है। महिला सिपाही ने चार दिन पहले उसे हरिद्वार मिलने के लिए बुलाया। लाल भीम उसके झांसे में आ गया और नेपाल से निकलकर हरिद्वार पहुंच गया। महिला सिपाही के साथ पहले से मौजूद पुलिस टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। टीपीनगर थाने में पूछताछ के बाद उसे न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लिया गया और फिर जेल भेज दिया गया।
इसी 80 लाख की चोरी में शामिल था गिरफ्तार नेपाली चोर लाल भीम 20 नवंबर 2022 को टीपीनगर थाना क्षेत्र के कमला नगर निवासी ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं बिल्डर प्रदीप गुप्ता का परिवार बेटी सांची गुप्ता की मंगनी में शामिल होने दिल्ली के ताज होटल गया था। घर की सुरक्षा में गार्ड मनोज और नेपाली नौकर बल बहादुर को छोड़ा गया था। बल बहादुर ने गार्ड मनोज को खीर में नशीला पदार्थ खिला दिया। इसके बाद अपने साथियों के साथ घर से करीब 80 लाख रुपये के आभूषण और नकदी लेकर फरार हो गया। इसी चोरी में सम्मिलित व फरार लाल भीम नेपाल भाग गया था जिसको पुलिस ने नाटकीय तरीके से दबोच लिया।
मां बाप ने सोचा था कि बेटा पढ़कर नाम करेंगा। उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए कानपुर आगरा दिल्ली इलाहाबाद जैसे महानगरों में भेजा ।पर अचानक मन में एक विचार आया ,एक जनसेवा का जूनून । माता पिता की इच्छा के विपरीत पुलिस सेवा को ज्वाइन किया । मन में सुनहरे सपने थे और समाज की सेवा व जरुरतमंद को न्याय दिलाने की ज़िद। मां के विरोध के बावजूद को उनको समझाना पड़ा कि भगवान के बाद पुलिस ही ऐसी सर्विस है जो किसी को न्याय दिला सकती है। पर धीरे-धीरे सब कुछ बदल गया । सैकड़ों की जिंदगी बचाई हजारों के आंसू पोंछे, तन मन धन समर्पित कर जरूरतमंदों की मदद कर उनकी दुआये भी ली ।मां के कलेजे के टुकड़ों को ढूंढ ढूंढ उनको सौंप कर उनके चेहरे पर मुस्कान लायी । दरकते संबंधों की दीवारों को अपनी मेहनत से भरकर भरकर पत्थरों की मजबूती दी पर पूरे प्रदेश में अगर पुलिस विभाग के किसी व्यक्ति द्वारा कोई गलती हो जाती है तो मेरे दोस्त मुझे दिल से चाहने वाले मेरे कार्यों से मुझे सिंघम की उपाधि देने वाले मेरे प्रशंसक मुझे ढूंढ ढूंढ कर फोन करके इतना तनाव पैदा कर देते हैं की चाय ही एक सहारा है जिसे पीकर अपना तनाव दूर करता हूं एक आध्यात्मिक विचारधारा का होने के नाते एवं संस्कारवान परिवार का सदस्य होने के नाते शराब सिगरेट से दूर रहता हूं लोग कहते हैं कि शराब व सिगरेट तनाव दूर करती है पर मां की वह चिंता आज भी याद है की पुलिस में बिना बुलाए तनाव आएंगे। जब कभी तनाव में होना तो चाय पीकर तनाव दूर कर लेना पर शराब यासिगरेट पीना न सीखना।अवसाद में आता हूं पर बिखरता नहीं हूं बचपन में चम्बल के बीहड़ों ने संघर्ष करना सिखाया है। #viralpost2026#viralreels#highlightsシ゚#fbreels#follower#trendingreels#viralreelschallenge#highlightseveryone#fbreels#trendingreels#trendingreel#TopFans#trending#highlightsfollowers
सारे विश्व के मजहबों की सोच व संस्कृति व्यक्ति हर मजहब के व्यक्तियों को अलग-अलग संस्कार में ढालती है। एक मजहब की सोच है जो कहता है ,कि दूसरे धर्म के लोग काफिर हैं, उनको मारोगे तो जन्नत मिलेगी। और यही सोच मजहब के पढ़े-लिखे इंसानों को भी इंजेक्शन, किताब, टिफिन से लेकर ह्यूमन बॉडी और हवाई जहाज को भी हथियार बना देती है। ओमान का जिहादी पायलट इसी मजहबी सोच का स्लीपर सेल था। जिसके लिए फ्लाई दुबई की फ्लाइट में सवार तेल अवीव जा रहे 180 यात्री इंसान नहीं, सिर्फ मजहबी टारगेट थे।
दूसरी तरफ भारतीय संस्कृति की सनातन सच में पाला हुआ कप्तान स्मित मछार उस संस्कृति का बेटा था जो सिखाती है कि मजहब में बैर नहीं भाईचारा होना चाहिए धर्म इंसानियत की रक्षा के लिए है, मारने के लिए नहीं। और किसी को हम सभ्यताओं का संघर्ष कहते हैं
एक मजहब में बच्चा बचपन से सुनता रहता है कि मेरा मजहब ही सबसे ऊपर है, बाकी सब काफिर है। दूसरी भारतीय सनातन संस्कृति में बच्चा बचपन से सुनता है पढता है - कि सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामया। उसके लिए एक समाज ही नहीं एक देश ही नहीं बल्कि सारी वसुधा ही एक कुटुंब है परिवार है। वसुधैव कुटुम्बकम। रामचरितमानस में तुलसीदास लिखते हैं कि सिया राम मय सब जग जानी करहु प्रणाम जोर जुगपानी। यानी सृष्टि के सभी मनुष्यों में भगवान राम का वास है
आसमान में उड़ने हवाई जहाज के कॉकपिट में कॉकपिट में दो मजहबों की बिचारधाराये टकराई । तो एक एक जिहादी पायलट के हाथ में जिहाद का चाकू था, दूसरा पायलट खून से सन था गंभीर रूप से घायल था अचेतन अवस्था में था पर उसके अंदर धैर्य था साहस था हौसला था 180 अनजान लोगों की जिंदगी बचाने का।
जब स्मित मछार ने उस साथी जिहादी पायलट को घायल होकर भी जमीन पर पटका और कॉकपिट का दरवाजा खोलकर यात्रियों से मदद से उसे दबोचा , तो उसने सिर्फ एक हमलावर को नहीं , उसने उस मजहबी सोच को दबोचा जो हजारों साल से हथियारों के बल पर दुनिया को इंसानों के खून में रंगना चाहती है जो दुनिया भर में अन्य धर्म के अन्य धर्मो के काफ़िरों को खत्म करने के लिए भरसक कोशिश करने में लगी है लेकिन हर बार कोई न कोई शिवाजी, पृथ्वीराज चौहान , राणा प्रताप , कोई बाजीराव, कोई स्मित मछार आ ही जाता है। और उसने जब प्लेन को लैंड कराया तो उसने यह दिखा दिया कि देवी देवताओं से मिली तलवार हो या प्लेन की सीट उसका इस्तेमाल रक्षा के लिए है, किसी को सताने मारने और लूटने के लिए नहीं है धर्म रक्षा के लिए होता है, मारने के लिए नहीं। भारत की सनातन संस्कृति का यह संदेश शायद दुनिया को समझ में आ जाए जेएनयू में ढपली वाले गैग भी शायद अब समझ गए होंगे कि भारतीय सभ्यता संस्कृति धर्म मानवता की रक्षा के लिए हमेशा से रहा है और रहेगा #highlightsシ゚#highlightseveryone#FlyDubai#viralreelschallenge#fbreels#viralreels
DSP Sunil Dutt Dubey
आज पिता जी की पुण्यतिथि है पितृ पक्ष में पूर्वजों के लिए कुछ भाव मन में उमड़ते है
पर उनके लिए शब्द हमेशा ही कम पड़ जाते हैं, बौने लगते हैं...उनके व्यक्तित्व के समक्ष।
भावनाए , एहसास और उनके जाने की पीड़ा कम नहीं हो पाती...उनकी उपस्थिति स्वप्न में भी सम्बल बन जाती है। बहुत कुछ कहने का मन करता है ... फिर कुछ भी कहने का मन नहीं करता...। अन्तरतम में समाहित , शब्दों से परे भाव गहराते ही जाते हैं.. । मधुर स्मृतियों के साथ
अश्रुपूरित विनम्र श्रद्धांजलि.. ...
पितृपक्ष में बचपन से लेकर आज तक के न जाने कितने चित्र स्मृतिपटल पर उभर कर मेरे दिलो दिमाग पर छाने लगे हैं , कितने अपने छूट गये, कितने आत्मीय स्वजन बिछड़ गये। जन्म-मृत्यु एक शाश्वत सत्य है फिर भी न जाने उनसे जुड़े कितने सिलसिले याद आने लगे हैं।
मेरी जिंदगी के फलसफे़ में रिश्ते कभी जिंदगी के इस पार तक सीमित नहीं रहे। यह मेरी नितांत निजी सोच और आस्था है कि आत्मा का जुड़ाव भौतिक शरीर के आगे भी है, सम्बन्धों में महसूस होती गहरी अनुभूतियां हमारे पूर्व जन्मो से आ रहे जुड़ाव की निरंतरता का एहसास है,
पितृपक्ष के प्रति मेरा श्रद्धाभाव हमेशा रहा है मेरे लिए पितृपक्ष और श्राद्ध किसी कर्त्तव्य या कर्मकांड का हिस्सा मात्र नहीं है,मेरे लिए यह श्रद्धा का विषय है , दिल से जुड़ा एक गहरा एहसास है। पितृपक्ष में पिता जी की पुण्यतिथि मेरे लिए आसमान से झांकती उन स्नेहिल आंखों से हो रही दुआओं की बरसात है जो मेरे मन और आत्मा को भिगोती रही है।
हमारे बुजुर्ग हमारा सौभाग्य हैं, पितृपक्ष हमें उनकी अहमियत का पुरजोर तरीके से एहसास भी दिलाते हैं..। वे जो कल थे आज नहीं है, वे जो आज है कल नहीं रहेंगे। इस बीच के समय को उनके साथ गुजारने का, उनके अनुभवों से सीखने का, उनसे विरासत में मिली परम्पराओं और संस्कारों को भावी पीढ़ी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी को मानों याद दिलाते हैं।
पितृपक्ष, श्राद्धकर्म और तर्पण नयी पीढ़ी के लिए दकियानूसी सोच का पर्याय बनते जा रहे हैं, धीरे धीरे इन संस्कारों का, इन परम्पराओं का लोप सा होता जा रहा है।मेरा मानना है कि किसी भी परम्परा के मूल में श्रद्धा और विश्वास जरूरी होता है। परम्पराओं का देश,काल और वातावरण से प्रभावित होना लाजिमी भी है। बदले हुए परिवेश और मशरूफियत में इसके रूप में,कर्मकांड में या विधि में बदलाव अस्वाभाविक भी नहीं है। समय के साथ परम्पराओं में परिवर्तन की स्वीकार्यता होनी भी चाहिए बशर्ते कि इनके मूल में निहित भावनात्मक लगाव और जुड़ाव कायम रहे ।
यू तो अपनों को याद करने का कोई एक दिन मुकर्रर नहीं होता है, यादें तो जीवन का अभिन्न अंग होती हैं फिर भी उन यादों को कुछ ख़ास तो बनाया ही जा सकता है।
पितृपक्ष दिवंगत आत्माओं को श्रद्धासुमन अर्पित करने के,उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने के खा़स दिन होते है। इसके साथ ही पितृपक्ष में हम अपने जीवित बुजुर्गो को अधिक समय देकर, उनके अनुभवों को साझा कर उन्हें यह एहसास दिला सकते हैं कि हमारी तमाम कामयाबी की कहानियों के पीछे के उनके अदृश्य हाथों का सहारा, उनकी त्याग और तपस्या हमें आज भी याद है। हमारी तमाम खुशियों की डोर के एक सिरे को उन बूढ़े हो चले हाथों ने आज भी पकड़ रखा है, उनके शरीर कमजोर भले हो गये हों,कांधे झुक गये हों पर उनके संस्कार अदृश्य ताकत बन आज भी हमारी ऊर्जा का सतत संचार करते है। हमें उन्हें इस भरोसे का एहसास दिलाने की जरूरत है कि उनकी आंखों की धुंधली हो चली रौशनी आज भी हमारी दुनिया को रौशन कर रही है, उनकी थरथराती उंगलियों के स्पर्श, उनका आशीर्वाद हर बला से,हर मुसीबत में आज भी हमारा रक्षा कवच हैं। हम उनसे इन भावनाओं को साझा कर उनकी भी खुशियों में इज़ाफ़ा कर सकते हैं..।कभी कभी हम अपनों से संकोच वश खुल कर अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में देर कर देते हैं, उनके जाने के बाद हमसे छूट गये वे पल ही अफसोस का सबब बन जाते हैं। शायद भावनाओं को शब्द देने की,अभिव्यक्त करने की आवश्यकता होती ही है, हर सम्बन्ध हर रिश्ता सच्ची भावाभिव्यक्ति से तसल्ली पाता है.. फलता फूलता है,पुरसकून होता है।
हमारे जीवित बुजुर्गों की दुआएं और हमारे पूजनीय दिवंगत पूर्वजों, हमारे पुरखों की आत्मा से बरसती ये रहमतें हमारी जिंदगी में ईश्वर की ओर से मिल रही नेमतें है ,इनका तहेदिल से किया गया आदर -सम्मान, इनके प्रति आभार हमें भी सुकून देता है ।
पितृपक्ष न केवल अपने कुल के पुरखो को स्मरण करने के दिन है अपितु उन स्नेहिल अपनो के प्रति भी कृतज्ञता के सुमन अर्पित करने के दिन है़ जिनसे हमारा रक्त सम्बन्ध भले न रहा हो किंतु भावनात्मक रिश्ता जरुर रहा है।
पितृपक्ष पर नम आंखों से हमारी अपने सभी पूर्वजों को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि और हर उस आत्मा को भी श्रद्धा सुमन अर्पित ,जिसके तार किसी न किसी जन्म में हमसे जुड़े रहे हैं।
मधुर स्मृतियों के साथ पिता जी को विनम्र श्रद्धांजलि, सादर नमन, नमन,
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2 hours ago | [YT] | 1
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DSP Sunil Dutt Dubey
यूपी पुलिस में 20 आईपीएस अधिकारियों के ट्रांसफर। कई जिलों के कप्तान बदले गये
5 hours ago (edited) | [YT] | 5
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DSP Sunil Dutt Dubey
सोशल मीडिया पर वायरल यह तस्वीर जिसमें दो महिलाएं हैं जिसमें से एक के कंधे पर संविधान की सौगंध है। जिस विभाग से वेतन ले रही है उसने इसको एक दायित्व सौपा है और वह अपने दायित्व से जुड़ी हुई है। दायित्व के साथ संवैधानिक मर्यादा में बधी है क्योंकि उसका परिवार है समाज है लोक समीक्षा है पर वह इस भीड़ में अकेली है उसके पीछे कोई नहीं है क्योंकि वह किसी राजनीतिक पार्टी से संबंधित नहीं है किसी सामाजिक संगठन से जुड़ी नहीं है हर सवाल का उत्तर देने के लिए वह अकेली है। उसको बचाने के लिये भीड़ नहीं है । वह कुछ कर नहीं सकती है क्योंकि उसके हर एक्सन पर भीड़ के मोबाइल कैमरे हैं। क्योंकि उसे संविधान ने अपनी आतमरक्षा के लिए अधिकार तो दिया है पर वह आत्मरक्षा के लिए बल प्रयोग नहीं कर सकती है क्योंकि कल कोर्ट में उसे अकेली खड़ी होना है ।
दूसरी महिला का कंधा दायित्व विहीन है। वह जितनी अराजकता करेगी उतनी ही उसको पापुलरिटी मिलेगी उसका पार्टी में कद बढ़ेगा पद बढ़ेगा कोई उसे शेरनी कहेगा तो कोई संविधान की रक्षा करने वाला। वह संविधान को भी जानती है कि सड़क पर प्रदर्शन से किसी संवैधानिक संस्था प्रमुख को हटाया नहीं जा सकता है पर उसे तो लोकप्रियता हासिल करनी है। क्योंकि वही उसका भविष्य है इसलिए साथ में गैर जिम्मेदार व अराजक तत्वों से भरी भीड़ है। और हल्ला मचाने वाले सैकड़ो युट्यूबर्स हैं। तमाम विपक्षी राजनीतिक दलों व सामाजिक संगठनों से फंडिंग है। उसकी कोई जवाबदेही नहीं है।उसके सपोर्ट में भारी भीड़ है। उसके इन असंवैधानिक तथ्यों को सही ठहराने के लिए सोशल मीडिया हैंडलर्स है उसके साथ जवाब देने के लिए संसद से लेकर संयुक्त राष्ट्र तक लोग हैं। माननीय उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्तागण साथ खड़े है।
इसलिए आज एक शेरनी की तरह दूसरे पर चढ़ी हुई है दूसरी खाकी वर्दी में असहाय नजर आ रही है। अगर उसके साथ भी संविधान की सौगंध व विभाग का दायित्व ना हो तो दूसरी को पटक कर ऊपर चढ़ कर जबड़ा तोड़ देने की ताकत रखती है
फिर भी कल इस महिला के लिए लाखों युट्यूबर्स मीडिया के समाचार बड़ी -बड़ी राजनीतिक दलों के नेता उसके खिलाफ थाना पर धरना देगे उसे सत्ताधारी पार्टियों का एजेंट बताएंगे सत्ता बदलती रहेगी पर उसका दायित्व तो नहीं बदलेगा।विपक्ष के नेता मुकदमे कायम कराने के लिए थाने पर बैठेंगे और बड़े-बड़े अधिवक्तागण इसके विरुद्ध बड़ी-बड़ी दलीलें लिए माननीय उच्चतम न्यायालय तक याचिका दायर करेगे पर आप सोचिए क्या खाकी वर्दी में लिपटी वह महिला संवैधानिक अधिकारों से वंचित है क्या वह हमारे परिवार की बेटी नहीं है बहन नहीं है हमें उसके पक्ष में बोलने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि वह खाकी वर्दी में लिपटी हुई है। क्या आप चाहते हैं कि वह अपने दायित्वों का निर्वहन न करें और भीड़ जो कर रही है उसका समर्थन करें। या उसके दायित्व को राजनीतिक चश्मे की दृष्टि से आप देखेंगे। पढ़े-लिखे होने के नाते आपका जवाब सटीक होना चाहिए यह आपसे उम्मीद है
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22 hours ago | [YT] | 2
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DSP Sunil Dutt Dubey
वाराणसी इलाहाबाद और मेरठ के एसएसपी एवं सीबीआई के पूर्व निदेशक रहे पूर्व डीजी वरिष्ठ आईपीएस डॉक्टर त्रिनाथ मिश्रा का निधन
दुखद
1965 बैच के रिटायर IPS अधिकारी डॉ. त्रिनाथ मिश्रा का गाजियाबाद में निधन अत्यंत दुःखद है। उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस में वाराणसी, इलाहाबाद और मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक समेत एडीजी पीएसी मुख्यालय जैसे महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दीं। अपने गौरवपूर्ण सेवाकाल में उन्होंने मणिपुर के पुलिस महानिदेशक, एसपीजी निदेशक, सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी के निदेशक, सीबीआई निदेशक और सीआरपीएफ महानिदेशक जैसे महत्वपूर्ण दायित्व भी निभाए।
डॉ. त्रिनाथ मिश्रा की कर्तव्यनिष्ठा, नेतृत्व क्षमता और पुलिस सेवा के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा। उनके निधन से पुलिस परिवार ने एक अनुभवी और गौरवशाली अधिकारी को खो दिया है। यह सम्पूर्ण पुलिस परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है।
ॐ शांति। 🙏 #TrinathMishra
1 day ago | [YT] | 14
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DSP Sunil Dutt Dubey
हर मर्ज़ का इलाज
.....नहीं दवाख़ाने में...
.
कुछ दर्द चले जाते है
... सिर्फ़ मुस्कुराने में।।
1 day ago | [YT] | 16
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DSP Sunil Dutt Dubey
कभी-कभी कुछ ऐसी घटनाएं जिनको सुनकर आंखों में आंसू भर आते हैं।यूपी के अंबेडकर नगर जिले के 6 बहनों के अकेले भाई सीआईएसएफ में कंपनी कमांडर अंकित पांडे जिनको किसी दुश्मन ने नहीं बल्कि अपनों ने ही शहीद कर दिया,
सीआईएसएफ के जवान अभिदेश सिंह ने आपसी हसी मज़ाक व कहासुनी में अपने ही कंपनी कमांडर अंकित पांडे,सहित सब इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह, सिपाही रफ़ीक अहमद और संदीप कुमार की रायफल से गोलियां चलाकर शहीद कर दिया
सभी को विनम्र श्रद्धांजलि एवं भगवान से प्रार्थना है कि चरणों में स्थान दे और परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे ॐ शांति शांति शांति शांति
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3 days ago | [YT] | 28
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DSP Sunil Dutt Dubey
एशियन गेम्स के क्रिकेट फाइनल में पाकिस्तान की टीम को को 19 रनों से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम करने वाली भारतीय क्रिकेट टीम को हार्दिक बधाई।
भारतीय बल्लेबाजों द्वारा 211 रन का शानदार स्कोर खड़ा करने के बाद भारतीय गेंदबाजों ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान को 192 रन पर रोक दिया। दबाव भरे फाइनल में टीम की शानदार बल्लेबाजी, गेंदबाजी और बेहतरीन टीम भावना ने भारत को लगातार एशियन गेम्स में दूसरी बार स्वर्ण पदक में क्रिकेट के खेल में दिलाया।
भारतीय क्रिकेट के लिए यह एक और स्वर्णिम अध्याय है। पूरी टीम को इस शानदार उपलब्धि के लिए ढेरों शुभकामनाएं।
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3 days ago | [YT] | 14
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DSP Sunil Dutt Dubey
फेसबुक से दोस्ती कभी भी किसी को भारी पड़ सकती है 4 साल से फरार शातिर नेपाली चोर ने सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस लड़की से वह दोस्ती कर रहा है वह यूपी पुलिस की महिला कांस्टेबल है और उसका प्यार उसको सलाखों के पीछे भेजने के लिए पर्याप्त है
- मेरठ के थाना टी पी नगर के अन्तर्गत रहने वाले बिल्डर के घर 80 लाख की चोरी करके फरार हो गया था नेपाली नौकर। प्रत्यावर्तन संधि के अनुसार किसी भी अभियुक्त को उसके देश में जाकर गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। पर पुलिस के फैलाये जाल में आकर चोर खुद ही फस गया पुलिस ने चोर को भारत बुलाने के लिए फेसबुक का सहारा लिया महिला कांस्टेबल ने फेसबुक के जरिए उससे दोस्ती की और खुद को हरिद्वार की रहने वाली बताया एक महीने तक लगातार बात होती रही और जब चोर महिला कांस्टेबल के प्रेम जाल में फंस गया तो महिला कांस्टेबल ने उसको हरिद्वार में मिलने के लिए बुलाया और चोर जब हरिद्वार आया तो पुलिस ने उसको दबोच लिया।
मेरठ पुलिस के अनुसार लाल भीम भूल निवासी लेकोट, थाना वायल, जनपद डोटी, नेपाल, फेसबुक चलाता था। पुलिस टीम ने महिला सिपाही के माध्यम से उससे दोस्ती कराई। दोनों ने मोबाइल नंबर साझा किए और महिला सिपाही करीब एक माह तक उससे बातचीत करती रही। पुलिस को पता था कि लाल भीम नेपाल में है और भारत आने से बच रहा है। महिला सिपाही ने चार दिन पहले उसे हरिद्वार मिलने के लिए बुलाया। लाल भीम उसके झांसे में आ गया और नेपाल से निकलकर हरिद्वार पहुंच गया। महिला सिपाही के साथ पहले से मौजूद पुलिस टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। टीपीनगर थाने में पूछताछ के बाद उसे न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लिया गया और फिर जेल भेज दिया गया।
इसी 80 लाख की चोरी में शामिल था गिरफ्तार नेपाली चोर लाल भीम
20 नवंबर 2022 को टीपीनगर थाना क्षेत्र के कमला नगर निवासी ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं बिल्डर प्रदीप गुप्ता का परिवार बेटी सांची गुप्ता की मंगनी में शामिल होने दिल्ली के ताज होटल गया था। घर की सुरक्षा में गार्ड मनोज और नेपाली नौकर बल बहादुर को छोड़ा गया था। बल बहादुर ने गार्ड मनोज को खीर में नशीला पदार्थ खिला दिया। इसके बाद अपने साथियों के साथ घर से करीब 80 लाख रुपये के आभूषण और नकदी लेकर फरार हो गया। इसी चोरी में सम्मिलित व फरार लाल भीम नेपाल भाग गया था जिसको पुलिस ने नाटकीय तरीके से दबोच लिया।
5 days ago | [YT] | 10
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DSP Sunil Dutt Dubey
मां बाप ने सोचा था कि बेटा पढ़कर नाम करेंगा। उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए कानपुर आगरा दिल्ली इलाहाबाद जैसे महानगरों में भेजा ।पर अचानक मन में एक विचार आया ,एक जनसेवा का जूनून । माता पिता की इच्छा के विपरीत पुलिस सेवा को ज्वाइन किया । मन में सुनहरे सपने थे और समाज की सेवा व जरुरतमंद को न्याय दिलाने की ज़िद। मां के विरोध के बावजूद को उनको समझाना पड़ा कि भगवान के बाद पुलिस ही ऐसी सर्विस है जो किसी को न्याय दिला सकती है। पर धीरे-धीरे सब कुछ बदल गया । सैकड़ों की जिंदगी बचाई हजारों के आंसू पोंछे, तन मन धन समर्पित कर जरूरतमंदों की मदद कर उनकी दुआये भी ली ।मां के कलेजे के टुकड़ों को ढूंढ ढूंढ उनको सौंप कर उनके चेहरे पर मुस्कान लायी । दरकते संबंधों की दीवारों को अपनी मेहनत से भरकर भरकर पत्थरों की मजबूती दी पर पूरे प्रदेश में अगर पुलिस विभाग के किसी व्यक्ति द्वारा कोई गलती हो जाती है तो मेरे दोस्त मुझे दिल से चाहने वाले मेरे कार्यों से मुझे सिंघम की उपाधि देने वाले मेरे प्रशंसक मुझे ढूंढ ढूंढ कर फोन करके इतना तनाव पैदा कर देते हैं की चाय ही एक सहारा है जिसे पीकर अपना तनाव दूर करता हूं एक आध्यात्मिक विचारधारा का होने के नाते एवं संस्कारवान परिवार का सदस्य होने के नाते शराब सिगरेट से दूर रहता हूं लोग कहते हैं कि शराब व सिगरेट तनाव दूर करती है पर मां की वह चिंता आज भी याद है की पुलिस में बिना बुलाए तनाव आएंगे। जब कभी तनाव में होना तो चाय पीकर तनाव दूर कर लेना पर शराब यासिगरेट पीना न सीखना।अवसाद में आता हूं पर बिखरता नहीं हूं बचपन में चम्बल के बीहड़ों ने संघर्ष करना सिखाया है।
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5 days ago | [YT] | 13
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DSP Sunil Dutt Dubey
सारे विश्व के मजहबों की सोच व संस्कृति व्यक्ति हर मजहब के व्यक्तियों को अलग-अलग संस्कार में ढालती है।
एक मजहब की सोच है जो कहता है ,कि दूसरे धर्म के लोग काफिर हैं, उनको मारोगे तो जन्नत मिलेगी। और यही सोच मजहब के पढ़े-लिखे इंसानों को भी इंजेक्शन, किताब, टिफिन से लेकर ह्यूमन बॉडी और हवाई जहाज को भी हथियार बना देती है। ओमान का जिहादी पायलट इसी मजहबी सोच का स्लीपर सेल था। जिसके लिए फ्लाई दुबई की फ्लाइट में सवार तेल अवीव जा रहे 180 यात्री इंसान नहीं, सिर्फ मजहबी टारगेट थे।
दूसरी तरफ भारतीय संस्कृति की सनातन सच में पाला हुआ कप्तान स्मित मछार उस संस्कृति का बेटा था जो सिखाती है कि मजहब में बैर नहीं भाईचारा होना चाहिए धर्म इंसानियत की रक्षा के लिए है, मारने के लिए नहीं।
और किसी को हम सभ्यताओं का संघर्ष कहते हैं
एक मजहब में बच्चा बचपन से सुनता रहता है कि मेरा मजहब ही सबसे ऊपर है, बाकी सब काफिर है। दूसरी भारतीय सनातन संस्कृति में बच्चा बचपन से सुनता है पढता है - कि सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामया।
उसके लिए एक समाज ही नहीं एक देश ही नहीं बल्कि सारी वसुधा ही एक कुटुंब है परिवार है। वसुधैव कुटुम्बकम।
रामचरितमानस में तुलसीदास लिखते हैं
कि सिया राम मय सब जग जानी
करहु प्रणाम जोर जुगपानी।
यानी सृष्टि के सभी मनुष्यों में भगवान राम का वास है
आसमान में उड़ने हवाई जहाज के कॉकपिट में कॉकपिट में दो मजहबों की बिचारधाराये टकराई । तो एक एक जिहादी पायलट के हाथ में जिहाद का चाकू था, दूसरा पायलट खून से सन था गंभीर रूप से घायल था अचेतन अवस्था में था पर उसके अंदर धैर्य था साहस था हौसला था 180 अनजान लोगों की जिंदगी बचाने का।
जब स्मित मछार ने उस साथी जिहादी पायलट को घायल होकर भी जमीन पर पटका और कॉकपिट का दरवाजा खोलकर यात्रियों से मदद से उसे दबोचा , तो उसने सिर्फ एक हमलावर को नहीं , उसने उस मजहबी सोच को दबोचा जो हजारों साल से हथियारों के बल पर दुनिया को इंसानों के खून में रंगना चाहती है जो दुनिया भर में अन्य धर्म के अन्य धर्मो के काफ़िरों को खत्म करने के लिए भरसक कोशिश करने में लगी है लेकिन हर बार कोई न कोई शिवाजी, पृथ्वीराज चौहान , राणा प्रताप , कोई बाजीराव, कोई स्मित मछार आ ही जाता है।
और उसने जब प्लेन को लैंड कराया तो उसने यह दिखा दिया कि देवी देवताओं से मिली तलवार हो या प्लेन की सीट उसका इस्तेमाल रक्षा के लिए है, किसी को सताने मारने और लूटने के लिए नहीं है
धर्म रक्षा के लिए होता है, मारने के लिए नहीं। भारत की सनातन संस्कृति का यह संदेश शायद दुनिया को समझ में आ जाए जेएनयू में ढपली वाले गैग भी शायद अब समझ गए होंगे कि भारतीय सभ्यता संस्कृति धर्म मानवता की रक्षा के लिए हमेशा से रहा है और रहेगा
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5 days ago | [YT] | 7
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