संस्कार और अनुशासन: जापान में शुरुआती 3 साल तक कोई बड़ी परीक्षा नहीं होती। वहाँ पहले बच्चों को शिष्टाचार, नैतिकता और अनुशासन सिखाया जाता है। भारत में शुरुआत से ही अंकों (Marks) और प्रतियोगिता पर ज़ोर रहता है। स्वयं की सफाई: जापान में बच्चे खुद अपने क्लासरूम और टॉयलेट की सफाई करते हैं, जिससे उनमें जिम्मेदारी की भावना आती है। भारत में स्कूलों की सफाई के लिए अलग से कर्मचारी होते हैं। प्रैक्टिकल ज्ञान: जापान में किताबों से ज्यादा प्रैक्टिकल स्किल और तकनीक (जैसे कोडिंग और रोबोटिक्स) सिखाई जाती है। भारत में थ्योरी और याद करने (रटने) पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। समानता: जापान में सभी बच्चे और टीचर एक जैसा स्कूल का खाना (Lunch) साथ बैठकर खाते हैं। भारत में बच्चे अपना-अपना टिफिन घर से लाते हैं, जिससे खाने में विविधता रहती है।
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6 months ago | [YT] | 1
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संस्कार और अनुशासन: जापान में शुरुआती 3 साल तक कोई बड़ी परीक्षा नहीं होती। वहाँ पहले बच्चों को शिष्टाचार, नैतिकता और अनुशासन सिखाया जाता है। भारत में शुरुआत से ही अंकों (Marks) और प्रतियोगिता पर ज़ोर रहता है।
स्वयं की सफाई: जापान में बच्चे खुद अपने क्लासरूम और टॉयलेट की सफाई करते हैं, जिससे उनमें जिम्मेदारी की भावना आती है। भारत में स्कूलों की सफाई के लिए अलग से कर्मचारी होते हैं।
प्रैक्टिकल ज्ञान: जापान में किताबों से ज्यादा प्रैक्टिकल स्किल और तकनीक (जैसे कोडिंग और रोबोटिक्स) सिखाई जाती है। भारत में थ्योरी और याद करने (रटने) पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है।
समानता: जापान में सभी बच्चे और टीचर एक जैसा स्कूल का खाना (Lunch) साथ बैठकर खाते हैं। भारत में बच्चे अपना-अपना टिफिन घर से लाते हैं, जिससे खाने में विविधता रहती है।
8 months ago | [YT] | 2
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