आस्था के महापर्व छठ, ! महापर्व छठ से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियां -----
-एक यही पर्व, पूजा-पाठ है, जिसमें किसी भी पंडित, पुजारी की जरूरत नहीं होती है. इसे व्रती और उसके परिवार के सदस्य खुद से ही इस त्योहार से संबंधित सारे आवश्यक कार्य करते हैं. सूर्य देवता को घाट पर सुबह-शाम का अर्घ्य देते हैं. इसमें किसी भी मंत्र की भी जरूरत नहीं होती है.
-इस पर्व में ना तो किसी ग्रह-नक्षत्र और ना ही किसी मुहूर्त को देखने की जरूरत होती है. इसमें सिर्फ सच्ची आस्था, श्रद्धा भाव और साधना से व्रत रखा जाता है.
-छठ के चार दिनों तक प्रसाद, भोजन बनाने के लिए सब कुछ साफ-सुथरा, नया होना चाहिए. यहां तक कि चूल्हा भी नया इस्तेमाल किया जाता है. मिट्टी के नए चूल्हे पर ही कद्दू, भात, खीर, रोटी, ठेकुआ आदि बनाया जाता है.
-छठ में व्रती सात्विक भोजन करते हैं. अपने परिवार से पूरे चार दिन अलग रहते हैं. जमीन पर सोते हैं. बिना प्याज, लहसुन का खाना बनाया जाता है. छठ का व्र huत अधिकतर महिलाएं ही रखती हैं, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि पुरुष यह व्रत नहीं कर सकते. इसमें व्रती को शुद्धता और पवित्रता का खास ध्यान देना होता है. इसमें व्रती को 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखना होता है. -दिलचस्प बात यह है कि यदि एक परिवार छठ पूजा शुरू कर देता है तो उन्हें यह पूजा हर साल करनी होती है. साथ ही इसे अपनी अगली पीढ़ियों को भी आगे बढ़ाने का रिवाज होता है.
-इस महापर्व में लोग ऊंच-नीच, जाति का भेदभाव भूलकर घाट पर एक साथ अर्घ्य देते हैं. एक-दूसरे के घर प्रसाद खाने जाते हैं. कहते हैं छठ का प्रसाद मांगकर खाना चाहिए. -भक्त सूर्य भगवान को विशेष प्रसाद (पवित्र भोजन) चढ़ाते हैं, जिसमें मिठाई, खीर, ठेकुआ, फल आदि शामिल होता है. मुख्य बात ये होता है कि ये प्रसाद बांस की टोकरी, सूप, डालिया में ही रखे जाते हैं.
-छठ पूजा का अनुष्ठान ऊर्जा स्तर को बढ़ाता है, मानसिक शांति प्रदान करता है. शरीर और मन को डिटॉक्स करता है. प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाता है. क्रोध, ईर्ष्या और नकारात्मक भावनाओं की आवृत्ति को कम करता है. ऐसा माना जाता है कि छठ पूजा अनुष्ठान उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने में भी मदद करता है.
-छठ पूजा का त्योहार नई फसल के उत्सव का भी प्रतिनिधित्व करता है. भक्त सूर्य देव को नई फसल और फलों से बना भोजन अर्पित करते हैं.
"उदासियों की वजहें तो बहुत हैं ज़िंदगी में, बेवजह खुश रहने का मजा ही कुछ और है। नज़र-नज़र में उतरना कमाल होता है, नफ़स-नफ़स में बिखरना कमाल होता है, बुलंदियों पे पहुँचना कोई कमाल नहीं, बुलंदियों पे ठहरना कमाल होता है।" #PramodKumarSahani
सफर में मिला एक आईना "यात्रा संस्मरण" मेरी कोलकाता से पटना की यात्रा थी। मेरे बगल की सीट पर एक सज्जन आकर बैठे। फॉर्मल शर्ट, टाई और हाथ में लैपटॉप बैग।सीट पकड़ते ही उन्होंने लैपटॉप खोला, ईयरफोन लगाया और शुरू हो गए "टारगेट पूरा क्यों नहीं हुआ? तुम्हें समझ नहीं आता, नौकरी करनी है की नही? इत्यादि इत्यादि.
पूरे कोच को सुनाकर वो अपनी टीम पर रौब झाड़ रहे थे। लगा, उनके लिए ये ट्रेन का डिब्बा नहीं, उनका केबिन है।
तभी पैंट्री का एक लड़का आया। दुबला-पतला, चेहरे पर दिनभर की थकान। "सर, सूप लेंगे? उसने मुझसे पूछा। मैंने मना कर दिया।
उसी विनम्रता से उसने मेरे बगल वाले सज्जन से पूछ लिया सर, आप सूप लेंगे?
बस, जैसे बम फूट गया। तमीज नहीं है तुम्हें? जानते हो मैं कौन हूँ? मेरे टिकट में खाना इंक्लूड है, फिर पूछ क्यों रहे हो? मैनेजर को बुलाओ, तुम्हारी नौकरी खा जाऊंगा तुम चालाक बनते हो इत्यादि इत्यादि।
वो लड़का लगातार हाथ जोड़े सॉरी सर, सॉरी सर कहता रहा, और वो सज्जन अपनी कुर्सी पर बैठे-बैठे उसे रौंदते रहे।
मुझसे रहा नहीं गया। मैंने कहा - भाई साहब, छोड़िए भी। इतनी छोटी सी बात है और आप इतना हाईपर हो रहें हैं। और मैनें उस लड़के से कहा - बाबू एक नहीं दो सूप ले आओ इनके लिए, मेरा वाला भी इन्हें ही दे दो।
वो चला गया। डिब्बा फिर शांत हो गया।
करीब 15 मिनट बाद उन्हीं साहब के फोन पर घंटी बजी। स्क्रीन पर Boss लिखा था। आवाज एकदम बदल गई।
सॉरी सर... हो जाएगा सर... बस तीन दिन दीजिए सर... सॉरी सर..
वही आदमी जो 5 मिनट पहले शेर बना हुआ था, अब भीगी बिल्ली बना 10 बार सॉरी-सॉरी कह रहा था।
मैं खिड़की से बाहर देख रहा था और मुस्कुरा रहा था।
सोचा - ये कैसा खेल है जिंदगी का? हम कमजोर के सामने कितने ताकतवर बन जाते हैं, और ताकतवर के सामने कितने कमजोर।
असली पावरफुल वो नहीं जो खुद से कमजोर पर चिल्लाए, असली पावरफुल वो है, जो अपने से कमजोर को भी इज्जत दे. क्योंकि हर व्यक्ति का अपना एक सेल्फ रेस्पेक्ट होता है🙏
पद, पावर, पैसा तो आते-जाते रहेंगे, पर आपका बर्ताव ही आपकी असली पहचान बनता है। इसीलिए जीवन की इस यात्रा में आप खुद को जितना शालीन, संयमित, और सुसज्जित रखेगें लोग आपको उतनी ही इज्जत और प्रतिष्ठा से नवाजेंगें. 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
"समाज का असली अपराधी कौन?" ------------------------- त्रेतायुग मे एक महाप्रतापी, महाबली, महादानी राजा हुआ करते थे!एकबार राजा को ब्रम्हभोज कराने की इच्छा जागृत हुयी, राजा ने अपने मंत्री, सेनापति, सहचरों को महल के प्रांगण मे अवस्थीत भोजशाला मे छप्पन भोग के भोज का व्यवस्था करने एवं अपने साम्राज्य अंतर्गत सभी ब्राम्हणदेवता को साग्रह सप्रेम भोज मे सम्मिलित होने के लिए सादर निमंत्रण पत्र भेजनें का आदेश दिया! साम्राज्य अंतर्गत सर्वाधिक कुशल रसोईया को छप्पन भोग व्यंजन तैयार करने के कार्य मे लगाया गया, तैयार व्यंजन की खुसबू सर्वत्र व्याप्त होने लगी,!उसी समय एक चील पक्षी अपने मुंह मे एक बिषधर सांप को लेकर उसी भोजशाला के ऊपर से उड़ रहा था, मौका पाकर सांप ने उस चील को डंसने के लिए अपना मुंह खोला उसी समय उसके बिष् तंत्री से बिष की कुछ बुँदे निकलकर तैयार भोजन वाले बर्तन मे गिर गया जिसे न तो रसोईया देखा, न मंत्री न सेनापति न राजा ने देखा भोजन ब्राम्हण लोग को खिलाया गया उसी समय लगभग सभी ब्राम्हण बिष के प्रभाव से मृत्यु को प्राप्त किये! ब्राम्हणो की सामूहिक मृत्यु होने की खबर मृत्युलोक से देवलोक तक वायरल हो गया, विमर्श एवं विवेचना का दौर चल पड़ा! आखिर दोषी कौन? राजा रसोईया,मंत्री, सेनापति, स्वंय ब्राम्हण गण, चील या सांप! निर्णय नहीं हो पाया तो स्वंय श्री हरि अपने मन्त्रीमंडल के सदस्यों के साथ ब्राम्हण वेश मे मृत्युलोक मे दोष निर्धारण हेतु पधारे! एक महिला से देवताओ ने पूछा की राजा का महल किधर है? उक्त महिला ने देवताओ से कहा की आपलोग कृपया राजमहल मे न जाये क्यूंकि राजा दुष्ट है ब्राम्हणो के भोजन मे बिष मिलाकर खाना खिलाकर ब्रम्हहत्या करता है वह महापापी है!! महिला के उक्त विचार सुनकर श्री हरि सभी देवताओ के साथ वापस देवलोक पहुंच गए, देवताओ के जिज्ञासा को शांत करने के लिए श्री हरि विष्णु जी बोले इस ब्राम्हण की सामूहिक मृत्यु कांड मे राजा रसोईया मंत्री सेनापति कोई जानबूझकर बिष नहीं परोसा वह तो महज एक दुर्घटना थी लेकिन असली दोषी तो वह महिला थी थी की जानते हुए भी जानबूझकर समाज मे राजा के प्रति द्वेष फैलाने समाज मे जातिवाद, उच्च नीच की भावना भड़काकर सामाजिक सौहार्द बिगड़ने का काम कर रही है, असल मे मृत्युदण्ड के लिए तो उसे दंडित किया जाना चाहिए!! आज के माहौल मे घटना जैसी भी हो लूच्चे, लफंगे विकृत मानसिकता वाले समाजद्रोही, यूट्यूबर, तथाकथित अनपढ़ गंवार पत्रकार, छूटभइये नेता, जनप्रतिनिधि, लोग अपने स्वार्थ खातिर वोट खातिर टी आर पी के लिए जातिवाद वर्गवाद आरक्षण आधारित विडिओ बनाकर वायरल कर समाज को खंडित करने का कुत्सित प्रयास कर रहे है! श्री हरि विष्णु जी के उपरोक्त प्रसंग के निर्णयनुसार आज के घटना दुर्घटना के वास्तविक जिम्मेवार के साथ ही तथाकथित समाज सेवी विकृत मानसिकतावाले जनप्रतिनिधि यूट्यूबर, घटिया सोंचवाले पत्रकार छूटभइये नेता जनप्रतिनिधि तथा समाज को तोड़ने के विकृत सोचवाले को भी समान सजा मिलना एकदम जरूरी हो गया है क्यूंकि यही लोग अपराधी का पोषण, करते है संरक्षण देते है समाज मे विद्वेष फैलाते है, ये सभी बराबर रूप से सजा के हकदार है! अंततः 🙏 निवेदन 🙏 विचार को सकारात्मक रखिये, समाज मे द्वेष नहीं फैलाये, मन को पवित्र रखिये, अपराध को प्रोत्साहित नहीं कीजिये! श्री हरि बिष्णु सभी का कल्याण करे, समाज मे सौहार्द भर दे, प्राणियों मे सदभावना भर दे, नेताओं के विचार का शुद्धिकरण कर दे!जय श्री हरि 🙏 @PK7000
PK7000
@PK7000
#PramodKumarSahani
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PK7000
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PK7000
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#प्रमोदकुमारसहनी @PK7000
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@PK7000
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PK7000
@PK7000
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PK7000
आस्था के महापर्व छठ, ! महापर्व छठ से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियां -----
-एक यही पर्व, पूजा-पाठ है, जिसमें किसी भी पंडित, पुजारी की जरूरत नहीं होती है. इसे व्रती और उसके परिवार के सदस्य खुद से ही इस त्योहार से संबंधित सारे आवश्यक कार्य करते हैं. सूर्य देवता को घाट पर सुबह-शाम का अर्घ्य देते हैं. इसमें किसी भी मंत्र की भी जरूरत नहीं होती है.
-इस पर्व में ना तो किसी ग्रह-नक्षत्र और ना ही किसी मुहूर्त को देखने की जरूरत होती है. इसमें सिर्फ सच्ची आस्था, श्रद्धा भाव और साधना से व्रत रखा जाता है.
-छठ के चार दिनों तक प्रसाद, भोजन बनाने के लिए सब कुछ साफ-सुथरा, नया होना चाहिए. यहां तक कि चूल्हा भी नया इस्तेमाल किया जाता है. मिट्टी के नए चूल्हे पर ही कद्दू, भात, खीर, रोटी, ठेकुआ आदि बनाया जाता है.
-छठ में व्रती सात्विक भोजन करते हैं. अपने परिवार से पूरे चार दिन अलग रहते हैं. जमीन पर सोते हैं. बिना प्याज, लहसुन का खाना बनाया जाता है. छठ का व्र huत अधिकतर महिलाएं ही रखती हैं, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि पुरुष यह व्रत नहीं कर सकते. इसमें व्रती को शुद्धता और पवित्रता का खास ध्यान देना होता है. इसमें व्रती को 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखना होता है.
-दिलचस्प बात यह है कि यदि एक परिवार छठ पूजा शुरू कर देता है तो उन्हें यह पूजा हर साल करनी होती है. साथ ही इसे अपनी अगली पीढ़ियों को भी आगे बढ़ाने का रिवाज होता है.
-इस महापर्व में लोग ऊंच-नीच, जाति का भेदभाव भूलकर घाट पर एक साथ अर्घ्य देते हैं. एक-दूसरे के घर प्रसाद खाने जाते हैं. कहते हैं छठ का प्रसाद मांगकर खाना चाहिए.
-भक्त सूर्य भगवान को विशेष प्रसाद (पवित्र भोजन) चढ़ाते हैं, जिसमें मिठाई, खीर, ठेकुआ, फल आदि शामिल होता है. मुख्य बात ये होता है कि ये प्रसाद बांस की टोकरी, सूप, डालिया में ही रखे जाते हैं.
-छठ पूजा का अनुष्ठान ऊर्जा स्तर को बढ़ाता है, मानसिक शांति प्रदान करता है. शरीर और मन को डिटॉक्स करता है. प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाता है. क्रोध, ईर्ष्या और नकारात्मक भावनाओं की आवृत्ति को कम करता है. ऐसा माना जाता है कि छठ पूजा अनुष्ठान उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने में भी मदद करता है.
-छठ पूजा का त्योहार नई फसल के उत्सव का भी प्रतिनिधित्व करता है. भक्त सूर्य देव को नई फसल और फलों से बना भोजन अर्पित करते हैं.
इस प्रकार हम पाते हैं यह पावण पर्व सिर्फ धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि लोक आस्था का यह महापर्व प्राकृतिक स्वच्छता, मानसिक एवं सामाजिक एकता के विकास का भी द्योतक है!
🙏🙏 @PK7000
#virals #महापर्व #बिहार #छठ #chhathpuja2024 #IPRDBihar #chhathmahaparv #fb #viralpost
#PramodKumarSahani
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PK7000
@PK7000
"उदासियों की वजहें तो बहुत हैं ज़िंदगी में,
बेवजह खुश रहने का मजा ही कुछ और है।
नज़र-नज़र में उतरना कमाल होता है,
नफ़स-नफ़स में बिखरना कमाल होता है,
बुलंदियों पे पहुँचना कोई कमाल नहीं,
बुलंदियों पे ठहरना कमाल होता है।"
#PramodKumarSahani
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PK7000
@PK7000
सफर में मिला एक आईना
"यात्रा संस्मरण"
मेरी कोलकाता से पटना की यात्रा थी।
मेरे बगल की सीट पर एक सज्जन आकर बैठे। फॉर्मल शर्ट, टाई और हाथ में लैपटॉप बैग।सीट पकड़ते ही उन्होंने लैपटॉप खोला, ईयरफोन लगाया और शुरू हो गए "टारगेट पूरा क्यों नहीं हुआ? तुम्हें समझ नहीं आता, नौकरी करनी है की नही? इत्यादि इत्यादि.
पूरे कोच को सुनाकर वो अपनी टीम पर रौब झाड़ रहे थे। लगा, उनके लिए ये ट्रेन का डिब्बा नहीं, उनका केबिन है।
तभी पैंट्री का एक लड़का आया। दुबला-पतला, चेहरे पर दिनभर की थकान।
"सर, सूप लेंगे? उसने मुझसे पूछा।
मैंने मना कर दिया।
उसी विनम्रता से उसने मेरे बगल वाले सज्जन से पूछ लिया सर, आप सूप लेंगे?
बस, जैसे बम फूट गया।
तमीज नहीं है तुम्हें? जानते हो मैं कौन हूँ? मेरे टिकट में खाना इंक्लूड है, फिर पूछ क्यों रहे हो? मैनेजर को बुलाओ, तुम्हारी नौकरी खा जाऊंगा तुम चालाक बनते हो इत्यादि इत्यादि।
वो लड़का लगातार हाथ जोड़े सॉरी सर, सॉरी सर कहता रहा, और वो सज्जन अपनी कुर्सी पर बैठे-बैठे उसे रौंदते रहे।
मुझसे रहा नहीं गया। मैंने कहा - भाई साहब, छोड़िए भी। इतनी छोटी सी बात है और आप इतना हाईपर हो रहें हैं।
और मैनें उस लड़के से कहा - बाबू एक नहीं दो सूप ले आओ इनके लिए, मेरा वाला भी इन्हें ही दे दो।
वो चला गया। डिब्बा फिर शांत हो गया।
करीब 15 मिनट बाद उन्हीं साहब के फोन पर घंटी बजी। स्क्रीन पर Boss लिखा था।
आवाज एकदम बदल गई।
सॉरी सर... हो जाएगा सर... बस तीन दिन दीजिए सर... सॉरी सर..
वही आदमी जो 5 मिनट पहले शेर बना हुआ था, अब भीगी बिल्ली बना 10 बार सॉरी-सॉरी कह रहा था।
मैं खिड़की से बाहर देख रहा था और मुस्कुरा रहा था।
सोचा - ये कैसा खेल है जिंदगी का?
हम कमजोर के सामने कितने ताकतवर बन जाते हैं, और ताकतवर के सामने कितने कमजोर।
असली पावरफुल वो नहीं जो खुद से कमजोर पर चिल्लाए, असली पावरफुल वो है, जो अपने से कमजोर को भी इज्जत दे. क्योंकि हर व्यक्ति का अपना एक सेल्फ रेस्पेक्ट होता है🙏
पद, पावर, पैसा तो आते-जाते रहेंगे, पर आपका बर्ताव ही आपकी असली पहचान बनता है। इसीलिए जीवन की इस यात्रा में आप खुद को जितना शालीन, संयमित, और सुसज्जित रखेगें लोग आपको उतनी ही इज्जत और प्रतिष्ठा से नवाजेंगें.
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
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PK7000
कई तरकीब दामन मे तुम्हारी है।
नुमाइश मे चलाने के लिये लाना।।
हमारी जान जायेगी नही ऐसे।
बड़ा पत्थर दबाने के लिये लाना।।
बहुत आजाद है हम सोच है सादा।
नही रूढ़ी जकड़ने के लिये लाना।।
जमाना 'गीत' को अंजान समझे है।
नयी बातें बताने के लिये लाना।।
_सरिता साहनी-"गीतशंकर"
स्वरचित ©️®️✍️ गोरखपुर
#poetry #gazal #shayari
@PK7000
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PK7000
"समाज का असली अपराधी कौन?"
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त्रेतायुग मे एक महाप्रतापी, महाबली, महादानी राजा हुआ करते थे!एकबार राजा को ब्रम्हभोज कराने की इच्छा जागृत हुयी, राजा ने अपने मंत्री, सेनापति, सहचरों को महल के प्रांगण मे अवस्थीत भोजशाला मे छप्पन भोग के भोज का व्यवस्था करने एवं अपने साम्राज्य अंतर्गत सभी ब्राम्हणदेवता को साग्रह सप्रेम भोज मे सम्मिलित होने के लिए सादर निमंत्रण पत्र भेजनें का आदेश दिया! साम्राज्य अंतर्गत सर्वाधिक कुशल रसोईया को छप्पन भोग व्यंजन तैयार करने के कार्य मे लगाया गया, तैयार व्यंजन की खुसबू सर्वत्र व्याप्त होने लगी,!उसी समय एक चील पक्षी अपने मुंह मे एक बिषधर सांप को लेकर उसी भोजशाला के ऊपर से उड़ रहा था, मौका पाकर सांप ने उस चील को डंसने के लिए अपना मुंह खोला उसी समय उसके बिष् तंत्री से बिष की कुछ बुँदे निकलकर तैयार भोजन वाले बर्तन मे गिर गया जिसे न तो रसोईया देखा, न मंत्री न सेनापति न राजा ने देखा भोजन ब्राम्हण लोग को खिलाया गया उसी समय लगभग सभी ब्राम्हण बिष के प्रभाव से मृत्यु को प्राप्त किये! ब्राम्हणो की सामूहिक मृत्यु होने की खबर मृत्युलोक से देवलोक तक वायरल हो गया, विमर्श एवं विवेचना का दौर चल पड़ा! आखिर दोषी कौन? राजा रसोईया,मंत्री, सेनापति, स्वंय ब्राम्हण गण, चील या सांप! निर्णय नहीं हो पाया तो स्वंय श्री हरि अपने मन्त्रीमंडल के सदस्यों के साथ ब्राम्हण वेश मे मृत्युलोक मे दोष निर्धारण हेतु पधारे! एक महिला से देवताओ ने पूछा की राजा का महल किधर है? उक्त महिला ने देवताओ से कहा की आपलोग कृपया राजमहल मे न जाये क्यूंकि राजा दुष्ट है ब्राम्हणो के भोजन मे बिष मिलाकर खाना खिलाकर ब्रम्हहत्या करता है वह महापापी है!! महिला के उक्त विचार सुनकर श्री हरि सभी देवताओ के साथ वापस देवलोक पहुंच गए, देवताओ के जिज्ञासा को शांत करने के लिए श्री हरि विष्णु जी बोले इस ब्राम्हण की सामूहिक मृत्यु कांड मे राजा रसोईया मंत्री सेनापति कोई जानबूझकर बिष नहीं परोसा वह तो महज एक दुर्घटना थी लेकिन असली दोषी तो वह महिला थी थी की जानते हुए भी जानबूझकर समाज मे राजा के प्रति द्वेष फैलाने समाज मे जातिवाद, उच्च नीच की भावना भड़काकर सामाजिक सौहार्द बिगड़ने का काम कर रही है, असल मे मृत्युदण्ड के लिए तो उसे दंडित किया जाना चाहिए!!
आज के माहौल मे घटना जैसी भी हो लूच्चे, लफंगे विकृत मानसिकता वाले समाजद्रोही, यूट्यूबर, तथाकथित अनपढ़ गंवार पत्रकार, छूटभइये नेता, जनप्रतिनिधि, लोग अपने स्वार्थ खातिर वोट खातिर टी आर पी के लिए जातिवाद वर्गवाद आरक्षण आधारित विडिओ बनाकर वायरल कर समाज को खंडित करने का कुत्सित प्रयास कर रहे है! श्री हरि विष्णु जी के उपरोक्त प्रसंग के निर्णयनुसार आज के घटना दुर्घटना के वास्तविक जिम्मेवार के साथ ही तथाकथित समाज सेवी विकृत मानसिकतावाले जनप्रतिनिधि यूट्यूबर, घटिया सोंचवाले पत्रकार छूटभइये नेता जनप्रतिनिधि तथा समाज को तोड़ने के विकृत सोचवाले को भी समान सजा मिलना एकदम जरूरी हो गया है क्यूंकि यही लोग अपराधी का पोषण, करते है संरक्षण देते है समाज मे विद्वेष फैलाते है, ये सभी बराबर रूप से सजा के हकदार है! अंततः 🙏 निवेदन 🙏 विचार को सकारात्मक रखिये, समाज मे द्वेष नहीं फैलाये, मन को पवित्र रखिये, अपराध को प्रोत्साहित नहीं कीजिये! श्री हरि बिष्णु सभी का कल्याण करे, समाज मे सौहार्द भर दे, प्राणियों मे सदभावना भर दे, नेताओं के विचार का शुद्धिकरण कर दे!जय श्री हरि 🙏
@PK7000
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