सदियों से रहस्यवादियों, सन्तों, ऋषियों और योगीजनों ने हमें एक ही उत्तर दिया है~ ईश्वर के साथ व्यक्तिगत सम्बंध विकसित करना वह जो हमारे रोजमर्रा जीवन को ब्रह्म के साथ जोड़ता है। आध्यात्मिक जीवन उस सम्बंध को विकसित करने का व्यवहारिक तरीका है।
(ॐ ही ब्रह्म का मुख्य नाम है )

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11 months ago | [YT] | 6

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1 year ago | [YT] | 5

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जल्द ही videos आएगा।.....

1 year ago | [YT] | 5

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2 years ago | [YT] | 47

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योग का मूल तत्व की जानकारी ॐ - tomorrow morning = 7:0 AM

2 years ago | [YT] | 46

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2 years ago | [YT] | 39

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तस्य वाचकः प्रणवः ।।२७।।

उस ईश्वर का वाचक नाम प्रणव, ओंकार ॐ है।

गीता, सत्रहवें अध्याय के तेईसवें श्लोक में है- 'ॐ, तत् और सत्- यह तीनों उस परब्रह्म परमात्मा का निर्देश करते हैं, स्मृति दिलाते हैं। इसी ओम् के द्वारा यज्ञ, वेद और ब्राह्मण रचे गये हैं।' 'ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म' - 'ओम्' इतना ही अक्षय ब्रह्म का परिचायक है। उस ईश्वर का नाम प्रणव है; क्योंकि प्राणों द्वारा ही उसका संचार है। प्रणव और ओम् पर्यायवाची शब्द हैं।

तज्जपस्तदर्थभावनम् ।। २८ ।।

उस ओम् का जप और उसके अर्थस्वरूप ईश्वर का ध्यान, ईश्वर- प्रणिधान है।

2 years ago | [YT] | 43

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आपका अस्तित्व माता और पिता से है... अतः सदैव उनका सेवा मैं तत्पर रहें। ॐ शान्ति विश्वम् 🙏

2 years ago | [YT] | 44

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2 years ago | [YT] | 54