समस्या से समाधान की ओर
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Practical Life की हर समस्या का Spiritual Solution – चाहे वह Stress, Relationships, Time Management, Self-Confidence या Inner Peace हो।
बस 40 दिन सुनें और जीवन में सकारात्मक बदलाव महसूस करें।
यहाँ आपको मिलेंगे Gurudev Pandit Shriram Sharma Acharya और Mataji के अनमोल प्रवचन, प्रेरणादायी विचार, Gayatri Mantra से जुड़े हर प्रश्न का उत्तर, 80+ Meditations, Different Book Series, Life Management Tips, Motivation, Parenting Solutions, Spiritual Poetry, Radha Krishna Energy Talks, Guru Kripa Anubhav, और आत्मिक विकास के लिए Powerful Life Content।
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ShreePriya Counselling
परमपूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी द्वारा लिखित पुस्तक 'प्रेम ही परमेश्वर है' के कुछ अंश...
जहाँ प्रेम है, वहीं परमेश्वर है।
प्रेम ऊर्जा से ओत-प्रोत स्वाध्याय जल्द ही साझा करेंगे।
राधे राधे।
6 hours ago | [YT] | 10
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परमपूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी द्वारा लिखित पुस्तक 'प्रेम ही परमेश्वर है' के कुछ अंश...
जहाँ प्रेम है, वहीं परमेश्वर है।
प्रेम ऊर्जा से ओत-प्रोत स्वाध्याय जल्द ही साझा करेंगे।
राधे राधे।
1 day ago | [YT] | 13
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ShreePriya Counselling
🌸 करवा चौथ का असली रहस्य और शिव-शक्ति तत्व दर्शन! 🌸
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क्या व्रत केवल कर्मकांड या भूखे रहने का नाम है, या इसके पीछे छिपा है ऊर्जा और प्रकृति के संतुलन का गहरा विज्ञान? 🤔💭
इस विशेष सत्संग में जानिए:
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आइए, आडंबर से ऊपर उठकर इस पावन पर्व के वास्तविक आध्यात्मिक रहस्य को समझें! 🕊️❤️
#KarwaChauth #ShivShakti #TattvaDarshan #ShreePriya #SpiritualWisdom #RadheRadhe #Bhakti #SelfAwareness
2 days ago | [YT] | 6
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राधा अष्टमी भाव काव्य 19: आयाम 2
करवाचौथ ये किसी भी व्रत उपवास की गहराई है क्या?
इसी का विस्तार ये काव्य भावना ऐसा कहता है सखा
राधे राधे शारदे जगज्जननी जगदंबा 🙏
ये काव्य हर उस बहन, माँ, पत्नी और सखी को पढ़ना चाहिए जो करवा चौथ, राधा अष्टमी जैसे व्रत-पर्वों को केवल परम्परा नहीं, बल्कि प्रेम और आत्मिक उन्नति के भाव से जीना चाहती है। और हर उस भाई, सखा, पति को भी, जो नारी के प्रेम-भाव को शक्ति के रूप में समझना चाहता है।
───
भाव काव्य
हमारे शास्त्रों में नारी के भाव को बहुत महत्त्व दिया गया है, सदा।
नारी की प्रेम-भावनाएँ कवच हैं,
पुरुष के स्वाभिमान-सम्मान का, सदा।
इसका तत्त्व-दर्शन भी निश्चित है, यहाँ।
प्रेम प्रतीक है सद्भावना का।
नारी एक बहन है तो भाई को रक्षा-सूत्र बाँधती है,
उस रक्षा-सूत्र में अपने भाव, आशीर्वाद डालती है।
एक माँ है तो संतान के लिए अनेक जप, तप, व्रत, उपवास करती है,
और एक पत्नी है तो एक अलग, खास भावना रखती है।
नारी के पास सहज करुणा, संवेदना, भावनाओं की शक्ति है।
जागृत नारी नहीं करती कोई अंध-भक्ति है,
ना प्रथाओं को इसलिए follow करना कि वो हैं, यहाँ।
भावना बस विस्तार की है, सदा-सदा।
ऐसे में सोचने लगे, वो क्या भाव होगा,
क्यों ये पर्व आया यहाँ, कि करवा के व्रत से पति की उम्र का सम्बन्ध जोड़ दिया गया,
और फिर छलनी और दिए का अर्थ क्या?
और जो उत्तर आया, वो हमें तो भा गया,
शायद आपको भी अच्छा लग जाए,
आपके लिए भी प्रकाश ले आए,
प्रेम का सही स्वरूप महसूस हो जाए।
नारी का स्नेह-प्रेम जब पूरी तरह दैविक होगा,
दैहिक की उसमें ज़रा भी मिलावट नहीं होगी, तो
वो प्रेम मूल में आदिशक्ति का ही होगा,
लेकिन ये प्रेम जब धरा पर धारा बनकर बहता है
तो इसके कई स्वरूप होते हैं।
जिसमें एक स्वरूप वो है पति-पत्नी का,
अर्थात शिव-शक्ति का,
जहाँ शक्ति अपने शिव को
अथाह, अनंत, अकारण चाहती है,
आत्मिक प्रेम-ज्योति की तरह,
और सिंदूर लगाती है बस शिव के नाम का,
लेकिन लंबी उम्र के लिए नहीं,
क्योंकि नारी जब शक्ति है
तो पति के शिवत्व का जागरण तय है, सदा।
इसलिए शिवत्व के विस्तार के लिए
शक्ति का हर व्रत, उपवास सारा है।
धरा पर हर नारी की हो अगर ये एक प्रार्थना कि
उनके साथी की आत्मा को ईश्वर, इष्ट, गुरु मिलें,
वो उन्हें महसूस कर सकें
और बस उनके गुरु, ईश्वर, इष्ट के लिए ही जीते चलें,
तो ये शायद सबसे सुन्दर स्वरूप त्योहार के भाव का होगा।
दैहिक प्रेम हो या दैविक,
प्रेम सदा प्रेम को सँवारता है, ऐसा कहता है मेरे कृष्णसखा।
प्रेम, प्रेम से प्रेम को सजाता है, यहाँ।
अब केशव महसूस होने लगा,
बोला, सोच, तेरी श्रीजी ये व्रत रखती अगर तो क्या होती भावना यहाँ...
हमने हँसकर कहा, मोहन, श्रीजी के भाव को तो महसूस करने की हैसियत कहाँ, यहाँ,
लेकिन श्रीजी की कृपा-छाँव में सोच लेते हैं
कि हमने अपने केशव के लिए ये व्रत करना तो क्या होगा दृष्टिकोण यहाँ।
कान्हा हँसकर बोला, चल, ये भी उचित है, कृष्ण-प्रिया,
और बस खो गए इस भाव में, यहाँ।
और लगा हम कह सकते हैं, Happy करवा तुम्हें, मोहन, यहाँ,
या आज के दिन तुम्हारे लिए उपवास, पूजा आदि-इत्यादि हुआ या किया, ऐसा भी कह सकते हैं, केशवा,
लेकिन ये नहीं कह पाएँगे।
श्रीजी जो महसूस करवा रही हैं, बस वही कर पाएँगे।
श्रीजी कहती हैं,
प्रेम के लिए कुछ किया तो जताना नहीं होता, कृष्ण-प्रिया,
इसलिए कहकर तुम्हें भारी अहसास नहीं करवाना चाहते,
किसी भी तरह,
और तुम्हारे प्रेम में हमारे लिए हर दिन ही शायद करवा है, यहाँ।
हमें देह का श्रृंगार समझ नहीं आता, लेकिन तुम्हारे प्रेम को श्रृंगार बना कर साँसों में धारण कर रखा है।
हमें लंबी उम्र की प्रार्थना करनी नहीं आती,
क्योंकि हमारा प्रेम शाश्वत है, सदा।
हालाँकि इस पल तो हम धरा के प्रेम का आयाम जी रहे हैं,
तो व्रत करेंगे तो भाव तुम्हारी आत्मिक, अनंत उन्नति और अनंत जन्मों के लिए प्रार्थना का होगा, सदा।
हमें शायद इस पल निर्जल रहना भी नहीं आता,
लेकिन तुम्हारे भीतर के जल-तत्त्व में गायत्री घुली रहे, सदा,
और तुम्हारे भोग-पानी का ध्यान रख सकते हैं हम, सदा।
हमें चंदा से गुहार करके,
छलनी और दिए की प्रथा भी समझ नहीं आती, यहाँ,
लेकिन गुरुदेव-माताजी रूपी चाँद के प्रकाश में
तुमसे ये कह सकते हैं
कि तुम हमें जैसे हो, पूर्ण स्वीकार हो, सदा।
मेरे कान्हा...
छलनी से फ़िल्टर करके नहीं तुम्हें देख रहे हम, यहाँ।
छलनी पर दीपक रख कर,
चाँद के बाद देखने का अर्थ ही ये होता है
कि जिस श्रद्धा से आत्म-ज्योति के प्रकाश में,
बादलों भरी रात में चाँद को देखा,
और चाँद का अमृत ग्रहण किया,
और चाँद के दाग और अँधेरी रात को अनदेखा किया,
उसी श्रद्धा से हृदय के प्रेम-प्रकाश में अपने साथी को देखो,
उसके भीतर के अमृत समान गुणों को देखो।
प्रेम जब अपने प्रेम के गुणों को यूँ देखेगा,
तो उसके गुण अनंत गुना विस्तार स्वयं लेंगे, सदा,
और गुणों का विस्तार होगा
तो आत्मिक उम्र स्वयं लंबी हो जाएगी, सखा,
क्योंकि उन गुणों के विस्तार से जो कार्य होगा,
वो समाज का, देश का, राष्ट्र का नाम रोशन करेगा,
गुरु के हृदय को आनंद से भर देगा,
और गुरु-माँ की आँखों को अपनी संतान के लिए गर्व से भरेगा, सदा।
इसलिए तुमसे प्रेम का इज़हार करने में कोई दिक्कत नहीं, यहाँ,
और प्रेम की इस गहराई को जीने के लिए आज के दिन को प्रेम के हर रंग से अभिव्यक्त करना भी हुआ, तो सहज होगा,
लेकिन ये तुम्हारी सम्मति से ही होगा, मेरे कान्हा,
मेरा कान्हा जो चाहे, वो हो जाए, सदा।
जब वो पल होगा कि यहाँ के उपवास की ऊर्जा तुम्हारे लिए आनंद और प्रसन्नता का कारण बने, तब होगा,
तुम्हारे भीतर गुरु, ईश्वर, इष्ट को गहरा करे, तब होगा,
और उस दिन हम किसी तिथि का इंतज़ार नहीं करेंगे,
प्रेम से प्रेम के लिए स्वयं उठकर सोलह श्रृंगार करेंगे,
जप, व्रत, तप सब करेंगे
और सारा दिन तुम्हारे चिंतन में बिता देंगे,
यूँ तो सारा जीवन ही तुम्हारे चिंतन के आधार पर है, यहाँ।
कृष्ण-कृष्ण करते जीवन बीत रहा सारा, सदा।
Happy करवा, मेरे प्यारे साथी, बंधु, सखा,
ये ज्ञान नहीं, प्रेम के आधार पर मना रहे हैं हम, यहाँ।
हर दैहिक औपचारिकता से मुक्त होकर प्रेम बह रहा है,
तुम्हारे लिए, सदा,
क्योंकि मेरा प्रेम भी तो देहातीत है, यहाँ।
और ये भाव नहीं, एक-तरफ़ा नहीं,
जो-जो यहाँ हमने तुमसे कहा,
वही-वही सब तुम जी रहे हो, जीते हो, सदा,
वही-वही सब तुम हमसे कह रहे हो, सखा,
हमने बस मान लिया।
यही तो तुमने सब गोपियों के लिए जिया, सखा।
24 गायत्री मंत्र ब्रह्मांड से भेज देना कान्हा,
यही बस आज का उपहार होगा।
उपहार तो देखो, लेंगे हम तुमसे,
ऐसे कैसे उपहार बिना छोड़ देंगे तुम्हें,
इतना भी ऊपर नहीं उठे।
और ब्रह्मांड में तो गायत्री गतिशील ही है, सदा,
इसलिए ये उपहार तो सहज मिल ही गया।
और एकदम लगा ध्यान से बाहर आए,
अंतरात्मा में मानो प्रेम का अनंत प्रकाश स्थान ले गया,
कितने दिव्य ये भाव कान्हा ने दिया,
श्रीजी की अहेतुकी कृपा है।
अगर हर नारी अपने इष्ट, ईश्वर, गुरु की शरण में
इस भाव से करवा करे, यहाँ,
तो समाज का कितना उत्थान होगा,
ये सोच भी नहीं सकते हम सब मिलकर, यहाँ,
हमारी कल्पना से परे होगा ये contribution, सदा।
हर बहन के भाव को नमन, प्रणाम,
जो सारा दिन निर्जल रहती है
और करती है अनंत प्रार्थनाएँ, सदा।
आपकी प्रार्थनाओं को सदा संबल मिले गुरु का,
यही एक भावना इस पल, यहाँ।
Date Time stamp
10:26 AM, 29 Oct 2026
काव्य भावनात्मक काव्य की गहराई से सकारात्मक चिंतन बिंदु
1. प्रेम का विस्तार: प्रेम देह से शुरू होकर दैविक तक जाता है, जब हम साथी में गुण देखते हैं तो गुण अनंत गुना बढ़ते हैं।
2. व्रत का नया अर्थ: करवा का व्रत उम्र बढ़ाने की प्रथा नहीं, शिवत्व जागरण और आत्मिक उन्नति की प्रार्थना है।
3. छलनी का तत्त्व: जैसे चाँद के दाग को अनदेखा कर अमृत देखते हैं, वैसे ही साथी के दोष नहीं, अमृत-समान गुण देखने की साधना है।
4. स्वीकार भाव: सच्चा श्रृंगार देह का नहीं, साथी को जैसे है वैसे पूर्ण स्वीकार करने का है।
5. समष्टि कल्याण: जब एक नारी इष्ट-गुरु भाव से प्रार्थना करती है, तो उसका फल पूरे समाज, देश और राष्ट्र तक जाता है।
संक्षिप्त शास्त्र पुराण
शास्त्रों में नारी को 'शक्ति' कहा गया है - 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:'। स्कंद पुराण और व्रत-कथाओं में करवा चौथ को पति-पत्नी के आत्मिक बंधन का प्रतीक बताया गया है। मूल में ये व्रत शिव-पार्वती संवाद से जुड़ा है, जहाँ पार्वती ने शिवत्व की रक्षा के लिए संकल्प लिया था। छलनी में दीपक रखकर देखना - यह प्रतीक है कि श्रद्धा की ज्योति से देखने पर अंधकार में भी प्रकाश दिखता है।
राधे-राधे, शारदे, जगज्जननी, जगदंबा।
धन्यवाद 🙏
2 days ago | [YT] | 14
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ShreePriya Counselling
परमपूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी द्वारा लिखित पुस्तक 'प्रेम ही परमेश्वर है' के कुछ अंश...
जहाँ प्रेम है, वहीं परमेश्वर है।
प्रेम ऊर्जा से ओत-प्रोत स्वाध्याय जल्द ही साझा करेंगे।
राधे राधे।
2 days ago | [YT] | 14
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ShreePriya Counselling
🌙 करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं 🌙
यह पावन पर्व प्रेम, विश्वास, समर्पण और दांपत्य संबंधों की मधुरता का प्रतीक है।
ईश्वर से प्रार्थना है कि सभी दंपतियों के जीवन में प्रेम, सम्मान, विश्वास और सुख सदैव बना रहे।
❤️ रिश्तों को समय दें, समझें और प्रेम से जोड़कर रखें।
Shreepriya
❤️ Spread Love • Connect Lives ❤️
2 days ago | [YT] | 8
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ShreePriya Counselling
परमपूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी द्वारा लिखित पुस्तक 'प्रेम ही परमेश्वर है' के कुछ अंश...
जहाँ प्रेम है, वहीं परमेश्वर है।
प्रेम ऊर्जा से ओत-प्रोत स्वाध्याय जल्द ही साझा करेंगे।
राधे राधे।
3 days ago | [YT] | 18
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परमपूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी द्वारा लिखित पुस्तक 'प्रेम ही परमेश्वर है' के कुछ अंश...
जहाँ प्रेम है, वहीं परमेश्वर है।
प्रेम ऊर्जा से ओत-प्रोत स्वाध्याय जल्द ही साझा करेंगे।
राधे राधे।
4 days ago | [YT] | 27
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ShreePriya Counselling
youtube.com/live/nrEuNOa8QG8
> जप । ध्यान । धारणा । गुरुकृपा राधा राधा राधा राधा और बस राधा
> समष्टि मन को आभार सदा सदा
Live संकल्प Day 5
Shreepriya मंत्र Energy Subscribe Now
youtube.com/@ShreepriyaMantraEnergy
4 days ago | [YT] | 10
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ShreePriya Counselling
राधा अष्टमी भाव काव्य 18 : आयाम 2
ये काव्य किसे पढ़ना चाहिए ?
1. जिसका मन किसी काम में नहीं लग रहा हो, यहाँ तक कि स्क्रॉलिंग में भी नहीं
2. जो मन को Creatively Busy करके स्वयं से जोड़ना चाहता हो
3. जो करने-न-करने से निकलकर होने के भाव को समझना चाहता हो
4. जो धारणा-मुक्त होकर ईश्वर को धारण करना चाहता हो
5. जो हर Guilt से मुक्त होकर कर्म करना सीखना चाहता हो
6.
--- भाव काव्य ---
किसी काम को करने में मन नहीं लग रहा,
मतलब फालतू काम भी मन नहीं करने दे रहा।
जैसे स्क्रॉलिंग से भी दूर भाग रहा,
यूँ तो ये अच्छी ही बात है यहाँ।
लेकिन मन को सदा कुछ करने के लिए चाहिए,
मन का Creatively Busy होना आवश्यक है बड़ा,
ताकि मन का मन से Connection हो जाए,
और फिर स्वयं के उत्थान में मन का contribution स्वयं होगा।
इस पल जब मन देवता ने स्क्रॉलिंग पर रोक लगा दी,
Effortlessly,
लेकिन कुछ तो करेगा...
सोचा content बदलते हैं,
कुछ ऐसा सुनते हैं जो contribute करेगा।
लेकिन नहीं, आज तो मन देवता का mood कुछ और है,
तो चलो ढीला छोड़ देते हैं।
करने और न करने से बाहर चलते हैं,
होने पर फोकस करते हैं।
गुरु के होते वैसे भी सब स्वयं होता है,
कुछ पल तो शून्य में बीत गए।
मतलब मन स्थिर हो गया,
न कोई भाव, न विचार, न सोच, न कोई तरंग और हलचल।
और फिर अचानक से यूँ हाथ चलने लगा,
और जैसे ही काव्य बहा,
समझा कृष्ण को शरणागत मन तो कृष्ण ही हुआ,
और कृष्ण को चाहेगा मन बस वही करेगा सदा।
और कृष्ण तो सदा हमारा मंगल चाहता और हमें चाहता है यहाँ,
और ये होगा कब,
जब हम सही-गलत, उचित-अनुचित से बाहर आएंगे,
क्या होना चाहिए, क्या नहीं होना चाहिए की दीवार के पार जाएंगे,
और क्या करना चाहिए पर ध्यान लगाएंगे,
हर बाहर की धारणा से मुक्त होंगे,
न स्वयं को न किसी और को judge करेंगे,
हर Guilt से मुक्त रहकर कर्म करेंगे,
तो हम ईश्वर को स्वयं धारण करने लगेंगे,
धारणा मुक्त मन ही ईश्वर को धारण कर सकता है यहाँ।
और धारणा करनी है तो ईश्वर और उनके स्वरूप की धारणा करो जरा,
क्योंकि जैसा सोचेंगे वैसा बन जाएंगे,
यही तो गीता में सदा कृष्ण ने कहा।
सोचना है तो ये सोचें - क्या सोचने योग्य सोच रहे हैं क्या,
या फिर जो सोच रहे हैं,
वो क्यों सोच रहे हैं इस पर विचार करें जरा,
या फिर सोच को judge न करें, जो है सो है,
दृष्टा भाव से सोच को बहने दें।
सब वही है,
जो जैसा है सही है।
बस मुझे ये समझना कि मैंने क्या महसूस किया,
और उससे बेहतर दैवीय अनुभव की ओर पल-पल पग रखना सदा,
यही शायद मानव जीवन का सबसे सुंदर दिव्य उपयोग है यहाँ,
मानव जीवन का सबसे सुंदर सदुपयोग है यहाँ।
हर पल का चिंतन ही मुझे इस पल वो बना रहा है जो मैं हूँ यहाँ।
राधे राधे शारदे जगज्जननी जगदंबा 🙏
26 Oct 2026 | 1:47 AM (भाव पल)
--- काव्य की गहराई से सकारात्मक चिंतन बिंदु ---
1. स्क्रॉलिंग का रुकना बोरियत नहीं, मन की शुद्धि है - जब मन फालतू को मना करे, समझो देवता जागा है।
2. मन को खाली मत छोड़ो, Creatively Busy करो - खाली मन भटकेगा, रचनात्मक मन जुड़ेगा।
3. करने से होना बड़ा है - ढीला छोड़ना आलस नहीं, शरणागति है, गुरु के होते सब स्वयं होता है।
4. शून्य ही सृजन का द्वार है - कुछ पल का स्थिर, भाव-विचार-हीन शून्य ही काव्य बनकर बहता है।
5. धारणा-मुक्त मन ही ईश्वर-पात्र है - जब सही-गलत की दीवार गिरी, Guilt गया, तब मन कृष्ण को धारण करता है।
6. दृष्टा बनो, जज नहीं - सोच को जज मत करो, देखो। जो है सो है, फिर बेहतर की ओर पग रखो।
--- संक्षिप्त शास्त्र पुराण संदर्भ ---
गीता अध्याय 6, श्लोक 6 - "मन ही बंधन है, मन ही मोक्ष है।"
कृष्ण कहते हैं - यद् यद् भावयति, तद् त
राधे राधे शारदे जगज्जननी जगदंबा 🙏
5 days ago | [YT] | 5
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