Kindly Join | Kindly Support | GPay -- UPI Id : harishlakhera13@oksbi
Himalayilog| e- Book of Himalayan Civilization | हिमालयीलोग । By Journalist Dr.Harish Chandra Lakhera, New Delhi, India /
Email- drhclakhera@gmail.com
S TV (सत्यमेव जयते टीवी) : youtube.com/channel/UCAg7G9OK9JWZvQaLZitLRng
Dharm Book : youtube.com/channel/UCW2Yuo2ktnT8T68-dqz7Jlw
Himalayilog || हिमालयी संस्कृति, इतिहास, लोक, साहित्य और सरोकार आदि का चैनल || हिमालय को लेकर मेरा दृष्टिकोण अफगानिस्तान के हिंदुकुश से लेकर भारत, नेपाल, तिब्बत, भूटान और म्यांमार तक फैली हिमालय की ढलानों पर विकसित सभ्यता है। This YouTube channel is the voice of the Himalayan people | We want a stake in the history of India. Our history should be in the books of history of India.
kindly, subscribe this channel.
FaceBook-- www.facebook.com/profile.php?id=100063985485539
(Facebook Page -Himalayilog channel हिमालयीलोग चैनल )
X Twitter - twitter.com/HimalayilogC



Himalayilog

youtube.com/live/5K56nHqJ9Uc?si=tE5DcsS_LHlx5aAj
1947 का विभाजन न होता, तो आज कैसा दिखता अखंड भारत?
जनगणना के 100 साल: अगर बंटवारा न होता तो कितने होते मुसलमान?
---------------------------
1947 के विभाजन ने केवल भूगोल नहीं बदला, बल्कि दक्षिण एशिया का पूरा जनसांख्यिकीय (Demographics) ढांचा बदलकर रख दिया। अगर हम 100 साल के जनगणना आंकड़ों (1931-2011) और वर्तमान अनुमानों को देखें, तो एक बेहद चौंकाने वाली तस्वीर सामने आती है!

📉 1. 1931 की जनगणना (अविभाजित भारत)
विभाजन से पहले (भारत + पाकिस्तान + बांग्लादेश) का धार्मिक अनुपात कुछ ऐसा था:

🟧 हिंदू: 68.2%

🟩 मुस्लिम: 22.2%

🟦 ईसाई: 1.8%

🟨 सिख: 1.2%

🔄 2. 1951 की जनगणना (विभाजन के बाद)
1947 में दुनिया के सबसे बड़े बलपूर्वक विस्थापन (Forced Migration) के बाद भारत (वर्तमान सीमा) के आंकड़े बदलकर यह हो गए:

🟧 हिंदू: 84.1% (बढ़त)

🟩 मुस्लिम: 9.8% (घटकर)

🟦 ईसाई: 2.3%

🟨 सिख: 1.79%

📈 3. 2011 की जनगणना (आधुनिक भारत)
🟧 हिंदू: 79.8%

🟩 मुस्लिम: 14.2%

🟦 ईसाई: 2.3%

🟨 सिख: 1.7%

⚪ बौद्ध: 0.7% | जैन: 0.37%

🤯 4. यदि आज विभाजन न होता (अखंड भारत अनुमान)
अगर आज भारत (143 करोड़), पाकिस्तान (24 करोड़) और बांग्लादेश (17.3 करोड़) मिलाकर एक ही देश होते:

कुल आबादी: ~184.3 करोड़ (1.84 अरब)

🟧 हिंदू आबादी: घटकर लगभग 62.8% (~115 करोड़)

🟩 मुस्लिम आबादी: बढ़कर लगभग 32.7% (~60 करोड़)

💡 इतिहासकारों का मानना है कि:

ब्रिटिश हुकूमत की पृथक निर्वाचन नीति (1909) और धार्मिक जनगणना ने आंकड़ों को 'राजनीतिक शक्ति' में बदल दिया।

विभाजन के समय बड़े पैमाने पर हुए पलायन ने दोनों देशों के सामाजिक-आर्थिक ढांचे को हमेशा के लिए प्रभावित किया।

👇 आपकी क्या राय है?

क्या 1947 के विभाजन ने उपमहाद्वीप के भविष्य को पूरी तरह बदल दिया? कमेंट्स में अपनी राय जरूर शेयर करें!

#100YearsOfCensus #UndividedIndia #AkhandBharat #IndianHistory #Demographics #Partition1947 #CensusData #HistoryBuffs

5 hours ago | [YT] | 2

Himalayilog

कहां अलग हैं हिंदू और सिख ?----- प्रो. डॉ. जगबीर सिंह,कुलपति,पंजाब सेंट्रल यूनिवर्सिटी ।
https://youtu.be/OKGzBVdQvVU?si=xiv3q...
विस्तार से बता रहे हैं Prof. Jagbir Singh on Hindu-Sikh Unity: "We Are One, Not Two" । प्रो. डॉ. जगबीर सिंह, पंजाब सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कुलपति, एक ऐसे विद्वान हैं जो हिंदू और सिख धर्मों के बीच गहरे एकीकरण को रेखांकित करते हैं। उनका दृढ़ मत है कि हिंदू और सिख वास्तव में एक ही हैं—सनातन धर्म की दो शाखाएँ, जिन्हें ब्रिटिश औपनिवेशिक नीतियों ने 'फूट डालो और राज करो' के सिद्धांत से अलग किया। सिंह जी के अनुसार, सिख गुरुओं की शिक्षाएँ—जैसे एकेश्वरवाद, कर्मकांडों का त्याग और सामाजिक समानता—हिंदू वेदांत और उपनिषदों की ही प्रतिध्वनि हैं। गुरु नानक देव जी स्वयं हिंदू सनातन परंपरा से प्रेरित थे, और गुरु ग्रंथ साहिब में हिंदू ग्रंथों के उद्धरण इसका प्रमाण हैं।
( सीनियर जर्नलिस्ट डा. हरीश चंद्र लखेड़ा से बातचीत । Dr. Harish Chandra Lakhera। E- mail- drhclakhera@gmail. Com )
आजकल कुछ तत्व, जिन्हें सिंह जी 'राष्ट्र-विरोधी' कहते हैं, इस एकता को तोड़ने का प्रयास करते हैं, लेकिन ऐतिहासिक साक्ष्य स्पष्ट हैं: सिख राजा रणजीत सिंह के दरबार में हिंदू-सिख एकजुटता का प्रतीक था। यह एकता भारत की सांस्कृतिक मजबूती है। डॉ. सिंह के अनुसार, हिंदू धर्म (सनातन परंपरा) और सिख धर्म का संबंध पंथ, मत या उपासना पद्धति के स्तर पर भिन्न हो सकता है, लेकिन उनकी जड़ें और मूल सामाजिक-सांस्कृतिक ताना-बाना एक ही है, जिसे तोड़ा नहीं जा सकता। वे स्पष्ट करते हैं कि गुरु नानक देव जी का आगमन भी एक हिंदू परिवार में हुआ था, और उनका दर्शन भारतीय ज्ञान परंपरा की निरंतरता में है, जो आध्यात्मिक सत्य और नैतिक व्यवस्था (मोरल ऑर्डर) पर केंद्रित है।
Prof. Dr. Jagbir Singh, Vice-Chancellor of Punjab Central University, asserts that Hindus and Sikhs are truly one—branches of the eternal Sanatan Dharma, divided by British 'Divide and Rule' policies. In this video, explore historical evidence from Guru Nanak Dev to Guru Granth Sahib. Witness the unity under Sikh King Ranjit Singh. Are anti-national elements today trying to break this heritage? Prof. Singh's call: Keep the Sanatan light unbroken.
If you want more on Hindu-Sikh unity, like, share, and subscribe! Comment your thoughts below! #HinduSikhUnity #SanatanDharma
Distinguished scholar Prof. (Dr.) Jagbir Singh shares his insightful perspective on the profound unity and shared cultural heritage between the Hindu and Sikh communities. He argues that the roots of both religions are deeply connected to the same Sanatan tradition, and attempts to create divisions are harmful to national unity. In this video, we explore Dr. Singh's view on why the teachings of Guru Nanak Dev Ji and Sikh philosophy are integral parts of the Indian knowledge system. Watch this powerful analysis completely to understand his assertion that the relationship between these two communities is like "nail and flesh."
#ProfJagbirSingh #हिंदूसिखएकता #प्रोजगबीरसिंह #सिखइतिहास #सनातनधर्म #गुरुनानकदेवजी #भारतएकता #JagbirSingh #भाईचारा
#HinduSikhUnity #ProfJagbirSingh #Sikhism #Hinduism #SanatanDharma #IndianUnity #GuruNanakDev #SikhHinduBhaiBhai
#धर्म #आध्यात्मिक #इतिहास #धर्मचर्चा #Culture #India #Spirituality

प्रो. जगबीर सिंह, हिंदू सिख एकता, सिख हिंदू भाईचारा, गुरु नानक देव जी, सनातन धर्म, हिंदू धर्म और सिख धर्म, Jagbir Singh, अखंडता, नाखून और मांस, सिख गुरुProf Jagbir Singh, Hindu Sikh Unity, Sikh Hindu Brotherhood, Guru Nanak Dev, Sanatan Dharma, Hinduism and Sikhism, Jagbir Singh Speech, India Unity, Cultural Heritage, Sikh Philosophy

1 day ago | [YT] | 6

Himalayilog

1033 ईस्वी का वह खूनी युद्ध: जानिए कैसे वीर सुहेलदेव राजभर ने किया आक्रांता गाजी का अंत!-------
बहराइच का युद्ध केवल इतिहास का एक पन्ना नहीं, बल्कि भारतीय स्वाभिमान और वीरता की अमर गाथा है! जब आक्रांता गाजी सालार मसूद अपनी सेना के साथ धर्म और संस्कृति को रौंदने निकला, तब श्रावस्ती के प्रतापी सम्राट महाराजा सुहेलदेव राजभर काल बनकर खड़े हो गए। अपनी कूटनीति और चक्रव्यूह रणनीति से उन्होंने चित्तौरा झील के तट पर गाजी की पूरी सेना को मिट्टी में मिला दिया। राजभर समाज के इस महान इतिहास को जानने के लिए वीडियो को अंत तक देखें! लाइक, शेयर और सब्सक्राइब जरूर करें! #MaharajaSuheldev #RajbharHistory #BattleOfBahraich

2 days ago | [YT] | 11

Himalayilog

https://youtu.be/5kWXAXN9yOg?si=EX3v6...
गाजी को कब्र में सुलाने वाले महाराजा सुहेलदेव। राजभर समाज का इतिहास।Maharaja Suheldev।



पूर्वांचल का वह सम्राट जिसने हिला दी विदेशी सल्तनत: राजभर समाज और सुहेलदेव की शौर्यगाथा। Maharaja Suheldev: The King Who Defeated Ghazi Salar Masud। विस्तार से बता रहे हैं सीनियर जर्नलिस्ट प्रो. (डा). हरीश चंद्र लखेड़ा । Prof. (Dr.) Harish Chandra Lakhera। E- mail- drhclakhera@gmail. Com
गाजी को कब्र में सुलाने वाले महाराजा सुहेलदेव: राजभर समाज का इतिहास

11वीं शताब्दी में बहराइच की धरती पर लड़ा गया ऐतिहासिक युद्ध भारतीय इतिहास के सबसे गौरवशाली अध्यायों में से एक है। जब महमूद गजनवी का भांजा गाजी सालार मसूद एक विशाल आक्रांता सेना लेकर भारत के धर्म, संस्कृति और स्वाभिमान को मिटाने आगे बढ़ रहा था, तब श्रावस्ती के प्रतापी सम्राट महाराजा सुहेलदेव राजभर उसकी राह में अजेय ढाल बनकर खड़े हो गए।

महाराजा सुहेलदेव ने अद्भुत युद्ध कौशल और कूटनीति का परिचय देते हुए अवध और पूर्वांचल के 21 स्थानीय राजाओं को एकजुट कर एक अभेद्य सैन्य मोर्चा तैयार किया। जून 1033 ईस्वी में बहराइच की चित्तौरा झील के तट पर हुए भीषण संग्राम में सुहेलदेव की गोरिल्ला और चक्रव्यूह रणनीति के आगे गजनवी सेना पस्त हो गई। महाराजा सुहेलदेव के प्रहार से क्रूर आक्रांता सालार मसूद रणभूमि में ही मारा गया और उसकी संपूर्ण सेना का सफाया कर दिया गया। इस निर्णायक विजय का प्रभाव इतना व्यापक था कि अगले लगभग डेढ़ सौ वर्षों तक किसी भी विदेशी आक्रांता ने भारत पर बड़े आक्रमण का साहस नहीं किया।

ऐतिहासिक रूप से राजभर (भर) समाज भारशिव नागवंश और शैव परंपरा से जुड़ा एक योद्धा समुदाय रहा है, जिसने पूर्वांचल के दर्जनों किलों पर राज किया। महाराजा सुहेलदेव की यह शौर्यगाथा आज भी राजभर समाज और संपूर्ण भारत के स्वाभिमान का प्रतीक है।

Maharaja Suheldev, Ghazi Salar Masud, Battle of Bahraich 1033, Rajbhar Community History, Bhar Dynasty, King Suheldev Rajbhar, History of Awadh. Maharaja Suheldev Rajbhar, Battle of Bahraich 1033 AD, History of Rajbhar Community, Ghazi Salar Masud defeat, Bhar Dynasty Uttar Pradesh, Ancient Indian Warriors.
#MaharajaSuheldev #RajbharHistory #BattleOfBahraich #SuheldevRajbhar #HistoryOfIndia #Suhaldev #महाराजा_सुहेलदेव #राजभर_इतिहास #भर_राजवंश
Maharaja Suheldev: The King Who Defeated Ghazi Salar Masud

Battle of Bahraich 1033: The Forgotten History of Rajbhar Dynasty

Emperor Suheldev & The Untold Saga of Rajbhar Community

2 days ago | [YT] | 8

Himalayilog

https://youtu.be/5kWXAXN9yOg?si=EX3v6...
गाजी को कब्र में सुलाने वाले महाराजा सुहेलदेव। राजभर समाज का इतिहास।Maharaja Suheldev।

पूर्वांचल का वह सम्राट जिसने हिला दी विदेशी सल्तनत: राजभर समाज और सुहेलदेव की शौर्यगाथा। Maharaja Suheldev: The King Who Defeated Ghazi Salar Masud। विस्तार से बता रहे हैं सीनियर जर्नलिस्ट प्रो. (डा). हरीश चंद्र लखेड़ा । Prof. (Dr.) Harish Chandra Lakhera। E- mail- drhclakhera@gmail. Com
गाजी को कब्र में सुलाने वाले महाराजा सुहेलदेव: राजभर समाज का इतिहास

11वीं शताब्दी में बहराइच की धरती पर लड़ा गया ऐतिहासिक युद्ध भारतीय इतिहास के सबसे गौरवशाली अध्यायों में से एक है। जब महमूद गजनवी का भांजा गाजी सालार मसूद एक विशाल आक्रांता सेना लेकर भारत के धर्म, संस्कृति और स्वाभिमान को मिटाने आगे बढ़ रहा था, तब श्रावस्ती के प्रतापी सम्राट महाराजा सुहेलदेव राजभर उसकी राह में अजेय ढाल बनकर खड़े हो गए।

महाराजा सुहेलदेव ने अद्भुत युद्ध कौशल और कूटनीति का परिचय देते हुए अवध और पूर्वांचल के 21 स्थानीय राजाओं को एकजुट कर एक अभेद्य सैन्य मोर्चा तैयार किया। जून 1033 ईस्वी में बहराइच की चित्तौरा झील के तट पर हुए भीषण संग्राम में सुहेलदेव की गोरिल्ला और चक्रव्यूह रणनीति के आगे गजनवी सेना पस्त हो गई। महाराजा सुहेलदेव के प्रहार से क्रूर आक्रांता सालार मसूद रणभूमि में ही मारा गया और उसकी संपूर्ण सेना का सफाया कर दिया गया। इस निर्णायक विजय का प्रभाव इतना व्यापक था कि अगले लगभग डेढ़ सौ वर्षों तक किसी भी विदेशी आक्रांता ने भारत पर बड़े आक्रमण का साहस नहीं किया।

ऐतिहासिक रूप से राजभर (भर) समाज भारशिव नागवंश और शैव परंपरा से जुड़ा एक योद्धा समुदाय रहा है, जिसने पूर्वांचल के दर्जनों किलों पर राज किया। महाराजा सुहेलदेव की यह शौर्यगाथा आज भी राजभर समाज और संपूर्ण भारत के स्वाभिमान का प्रतीक है।

Maharaja Suheldev, Ghazi Salar Masud, Battle of Bahraich 1033, Rajbhar Community History, Bhar Dynasty, King Suheldev Rajbhar, History of Awadh. Maharaja Suheldev Rajbhar, Battle of Bahraich 1033 AD, History of Rajbhar Community, Ghazi Salar Masud defeat, Bhar Dynasty Uttar Pradesh, Ancient Indian Warriors.
#MaharajaSuheldev #RajbharHistory #BattleOfBahraich #SuheldevRajbhar #HistoryOfIndia #Suhaldev #महाराजा_सुहेलदेव #राजभर_इतिहास #भर_राजवंश
Maharaja Suheldev: The King Who Defeated Ghazi Salar Masud

Battle of Bahraich 1033: The Forgotten History of Rajbhar Dynasty

Emperor Suheldev & The Untold Saga of Rajbhar Community

2 days ago | [YT] | 2

Himalayilog

youtube.com/live/bs37mYONHTA?si=9o0dCI3m4qoLcKXn

पाकिस्तान में किस नाम से पुकारे जाते हैं दलित-आदिवासी? सरहद पार का अनसुना सच! No Dalit, No ST in Pak

3 days ago (edited) | [YT] | 2

Himalayilog

youtube.com/live/bs37mYONHTA?si=5cV0WEYYF7n3Aa7q
No 'Dalit', No 'ST': What Pakistan Calls Its Marginalized Millions

दक्षिण एशिया में सामाजिक न्याय और अधिकारों की चर्चा में 'दलित' और 'आदिवासी' शब्द केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सरहद पार पाकिस्तान की संवैधानिक और कानूनी व्यवस्था में यह शब्दावली पूरी तरह अनुपस्थित है?

मुख्य तथ्य और वैचारिक संकट:--

कानूनी स्थिति: पाकिस्तान के 1957 के अनुसूचित जाति घोषणा अध्यादेश के तहत दलित जातियों (जैसे मेघवार, बाल्मीकि, चमार) और थार मरुस्थल की जनजातियों (भील और कोल्ही) को एक ही श्रेणी 'अनुसूचित जाति' (Scheduled Castes) में मिला दिया गया है। यहाँ आदिवासियों के लिए अलग से 'ST' श्रेणी नहीं है।

सामाजिक पहचान: आधिकारिक फाइलों में इन्हें केवल 'अल्पसंख्यक' कहा जाता है, जिससे इनका विशिष्ट जातिगत और सामाजिक उत्पीड़न छिप जाता है। वहीं, स्थानीय स्तर पर इन्हें अक्सर 'हरिजन' या 'सफाई कर्मचारी' जैसे रूढ़िवादिता से भरे शब्दों से पुकारा जाता है।
यह स्थिति दर्शाती है कि कैसे प्रशासनिक नीतियां किसी समुदाय की विशिष्ट पहचान और उनके विकास के अवसरों को प्रभावित कर सकती हैं।

आप इस विषय पर क्या विचार रखते हैं? क्या प्रशासनिक खाँचों में पहचान का विलय सामाजिक न्याय में बाधक बनता है? टिप्पणी में अपनी राय साझा करें।

#PakistaniDalits #ScheduledCastes #MinorityRights #HumanRights #SouthAsia #SocialJustice #Sindh #DalitRights #PublicPolicy

3 days ago | [YT] | 3

Himalayilog

https://youtu.be/HB3O5tJXQYg?si=X3ige...

सनातन धर्म: एक ही धर्म ग्रंथ क्यों नहीं? Sanatan Dharma: Why Not Just One Holy Book?

3 days ago | [YT] | 3

Himalayilog

https://youtu.be/HB3O5tJXQYg?si=X3ige...

सनातन धर्म: एक ही धर्म ग्रंथ क्यों नहीं? Sanatan Dharma: Why Not Just One Holy Book?

3 days ago | [YT] | 2