गणपति बप्पा मौरिया मंगल मूर्ति मौरिया । यह चैनल एक धार्मिक चैनल है । इस चैनल पर# व्रत, # त्यौहार , # पंचाग , # शुभ मुर्हत आदि की जानकारी दी जाती है। इस चैनल पर #व्रत कथा# एकादशी व्रतकथा# प्रदोष व्रत कथा ,# पूर्णमासी व्रत कथा,# सोमवार व्रत कथा#, ब्रहस्पति देवव्रत कथा संतोषी माता व्रत कथा , लक्ष्मी मा व्रत कथा , दुर्गा अष्टमी व्रत कथा , नवरात्र व्रत कथा , गुप्त नवरात्रि कथा एवं इनका महत्व बताया व कथा सुनाई जाती है । इस चैनल पर विशेष तिथियों का महत्व व उनसे जुड़े देवता व व्रत त्यौहार के बारे में जानकारी दी जाती है । इस चैनल पर विभिन देवी देवताओं जैसे भगवान शिव, माता पार्वती, देवी दुर्गा , गणेश जी , हनुमान जी , भगवान कृष्ण, राधा रानी, भगवान राम, भगवान परशुराम, आदि शक्ति , आदि देवी देवताओं की पूजा विधि शास्त्र अनुसार बताई जाती है । आप इस चैनल से जुड़कर विभिन्न प्रकार की धार्मिक जानकारी ले सकते हैं। साथ ही विभिन्न प्रकार की समस्याओं का धार्मिक हल व उपाय जान सकते हैं । धन्यवाद


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ॐ गणपते नमः आज एक शिकायत आम सुनती हूं कि यदि किसी महिला से छेड़छाड़ हो तो कोई भी व्यक्ति सामने नहीं आता । मैं सिर्फ एक प्रश्न आपसे पूछना चाहती हूँ कि नारी जो स्वयं शक्ति का स्वरूप है क्या उसे किसी की मदद की आवश्यकता होती है । क्या मा दुर्गा ने महिषासुर मर्दन के लिए किसी देवता से मदद मांगी थी ? जबकि स्वयं देवताओं ने अपनी रक्षा के लिए मा दुर्गा से याचना की थी। हर छह महीने में हम नवरात्रे मनाते हैं और शक्ति स्वरूप मा दुर्गा को ही नहीं पहचान पाते ।

1 week ago | [YT] | 0

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ऊँ गणपते नमः दशहरा मैदान में मैंने एक स्लोगन देखा जिसमें लिखा था नशा छोड़ो नशा बुरी चीज़ है और लोग उसे बुराई से अच्छाई पर जीत बताकर जमकर शेयर कर रहे थे । मै उन पुरुषों से और इस पुरुष प्रधान समाज से सिर्फ एक प्रश्न पूछना चाहती हूँ कि दशहरा जिस बुराई के नाश के लिए मनाया जाता है उस बुराई को यह समाज स्वीकार क्यों नहीं करता ? क्या आज इस समाज में वह बुराई नहीं रही ? हर दिन एक नया बलात्कार का अध्याय समाज के माथे पर चिपक जाता है और समाज मूक बनकर काले अध्याय को आभूषण या मजबूरी समझ उसके साथ जी रहा है । मैं तो उसे मजबूरी नहीं बल्कि आभूषण ही कहूँगी । जिस तरह यह समाज इस कलंक को बुराई भी नहीं समझता उस बुराई के लिए आवाज उठाने की हिम्मत भी नहीं जुटा सकता तब इस नामर्द समाज के लिए क्या कहा जा सकता है । आज की समाज की स्थिति यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि क्या हम उन्हीं राम की धरती पर पैदा होने वाली संताने हैं जिन्हाने सिर्फ स्त्री के अपहरण मात्र के लिए पूरी लंका का सर्वनाश किया था । त्रिलोकपुरी रावण के सर्वनाश के लिए मानन तो क्या वानर भी साथ आये थे। क्या हम उन्ही आर्यवशियो की संतानें हैं जिन्होंने एक स्री के चीर हरण के लिए पूरी पृथ्वी के सर्वनाश स्वरूप महाभारत का युद्ध लड़ा था आज छोटी छोटी बच्चियों का बलात्कार हो रहा है और उससे भी दुखद यह है कि समाज इसका प्रतिशोध लेने की बजाय इस पर प्रश्न चिन्ह भी नहीं लगा रहा । इससे बुरा क्या होगा यह पुरुष प्रधान समाज ( नामर्द समाज ) को इस कलंक को धोना तो बहुत दूर इसे स्वीकार करने की भी हिम्मत नहीं है। लंका का सर्वनाश स्त्रियो ने नहीं किया था हमारे धर्नुधारी वीरो ने किया था । नारी तो दुर्गा स्वरूप लेकर ही संहार कर सकती है वो भी तब जब पुरुष घुटने टेक दें । आज की स्थिति भी ऐसी ही बनी हुई है । धन्यवाद जय श्री राम ।

1 week ago | [YT] | 0

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ॐ गणपते नमः कई बार हम बहुत क्रोध बेचैनी या झुझलाहट महसूस करते हैं उस समय हमें यह महसूस होता है कि यदि हम अकेले में समय व्यतीत करें तो हम शांत महसूस करेंगे और यह होता भी है । हमारी आंतरिक शक्ति बाहर की नकारात्मक ऊर्जा को हरा देती है । जब हम बाहर के शोर और दूसरे व्यक्तियों की नकारात्मक ऊर्जा उनका गुस्सा उनकी उलझने खुद पर हावी होने देते हैं तो हम अशांत हो उठते हैं जिसे हमारी खुद की ऊर्जा बहुत जल्द और प्रभावी ढंग से शांत करती है। बहुत बड़े स्तर पर यदि खुद की ऊर्जा का अनुभव करना है तो जब आपके जीवन में बहुत उलझन कष्ट आ गये हो। चारों तरफ से विपदा ने खेर लिया हो और उस विपदा की खड़ी में कोई भी आपके साथ न खड़ा हो तब आप बहुत अकेला महसूस करते हैं लेकिन हिम्मत करके जब उस विपदा से निकलते हैं तब वह अकेलापन और वो मुश्किल की खड़ी आपको आपकी आंतरिक शक्ति का एहसास कराती है और उस कठिन समय से निकलने का जब आत्म विश्वास पैदा करती है उसके बाद आप खुद को बहुत शक्तिशाली महसूस करते हैं और उसके बाद कोई भी बड़ी से बड़ी मुश्किल आप को तोड नही सकती । यह है अकेले पन की शक्ति जितना ज्यादा समय आप खुद के साथ व्यतीत करते हैं उतने ही अधिक आप शक्तिशाली और खुश महसूस करते हैं । क्यो कि आप की खुशी आपसे बेहतर कोई नहीं जानता । धन्यावाद जय श्री राम ।

3 weeks ago | [YT] | 0

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ॐ गणपते नमः । कल मैंने हनुमान अंश मूवी देखी । इसका एक अंश जो मुझे बहुत अच्छा , भावुक और संवेदनशील लगा उसका जिक्र करती हूँ । वह पल है जब नीम करोली बाबा की पत्नी उनका क्रोधित होते हुए प्रश्न करती है कि आपको इस ध्यान तप से क्या मिलता है तब नीम करोली बाबा उन्हें सरसों के दाने मुख में रख कर इस बात का जवाब देते हैं तब उनकी पत्नी उनकी शरणागत हो जाती है और कहती है कि मुझसे भूल हो गई मैं भी आपसे अनाप शनाप प्रश्न करने लगी तब बाबा उनसे कहते हैं कि तुम मेरी अर्धांगिनी हो तुम्हें पूरा हक है मुझसे प्रश्न करने का और मेरा फर्ज है तुम्हारी हर शंका दूर करने का । यह बात एक वैरागी बाबा कहते हैं जिन्होने गृहस्थ जीवन का सुख भी नहीं भोगा वे भी अपनी पत्नी को यह अधिकार देते हैं तो यह बात उन पतियों को भी समझनी चाहिए जो जरा जरा सी बात पर अपनी पत्नी को यह कह देते हैं कि तुम कौन हो पूछने वाली । अब हर काम का तुमसे पूछकर किया जाएगा। बाबा जिन्होने अपनी पत्नी से ना ही स्त्री सुख की लालसा थी ना ही अपना वंश बढ़ाने की । लेकिन एक वैरागी होते हुए भी वो एक स्त्री अपनी पत्नी का इतना सम्मान करते हैं और एक तरफ आज कल के युवा जो बात बात पर अपनी अंधागिनी का अपमान करने में अपनी शान समझते हैं । उन्हे नीचा और दबाकर रखना चाहते हैं । यही आज के बिगड़ते रिश्तों का मुख्य कारण है । धन्यवाद । जय श्री राम

1 month ago | [YT] | 0

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बारिश के आते ही प्रकृति में अलग तरह का आनंद छा जाता है । पशु पक्षी पेड़-पौधों के रंग रूप ही बारिश के आते ही मिखर जाता है । मौसम की पहली बारिश में मिट्टी की सुगंध ही बता देती है कि प्रकृति को बारिश कितनी पसंद है बारिश प्रकृति में पुर्निनमाण और पुर्नजीवन का कार्य करती है । ठीक वैसे ही जैसे मानव जीवन में अध्यात्म कार्य करता है । ध्यान अध्यात्म हमारी आत्मा हमारी सांसों को पुनर्जीवित करता है । दिन भर की भागदौड़ में जब हम सूखे पेड़ो की तह बेजान होना शुरू कर देते हैं तो कुछ पल का अध्यात्म ही हमारी जडों को सींच कर हम में फिर से प्राण भर देता है । इसलिए अध्यात्म को जीवन का अभिन्न अंग बनाए धन्यवाद । जय श्री राम ।

3 months ago | [YT] | 3

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आज मातृ दिवस पर मदर डे स्पेशल कार्ड और तस्वीरें फेसबुक और व्हाट्स ऐप पर खूब शेयर की जा रही हैं । अपनी अपनी मा के साथ फोटो खींच कर खूब प्यार दर्शाया जा रहा है । पर ये समझ नहीं आता अगर मा के लिए वास्तव में इतना प्यार है तो फिर विधवा आश्रम और वृद्ध आश्रम में किसकी मा रहती है और क्यों रहती है । और मा के प्रति वास्तव में इतना प्यार और इज्जत है तो फिर ये माताएं अपने परिवार के साथ क्यों नहीं रहती। क्या ये माताएं अपनी दुख की कहानियां झूठी सुनाती हैं या मदर डे पर दिखाया जाने वाला प्यार झूठा है । इन आश्रमों में रहने वाली माताओं को तो उनके परिवार वाले मदर डे पर याद नहीं करते। जो मा अपने कोख में हमें 9 महीने सहेज कर रख सकती है उसी मा के हमारे घर में एक कोना भी नहीं है । सोचने वाली बात है । अपनी मा को कष्ट पहुंचा कर कोई कितना भी पूजा पाठ या दान पुण्य कर ले सब व्यर्थ है । इन व्हाट्सएप और फेसबुक स्टेटस को देखकर तो बस ऐसा लगता है जैसे घूमने वाली तस्वीरें लोग दूसरों को दिखाने के लिए लगाते हैं उसी तरह मा के लिए प्यार भी बस एक दिखावा रह गया है । धन्यवाद जय श्री राम ।

5 months ago | [YT] | 0

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तस्वीर में दिखाई दे रहे ये बादल प्रकृति का अद्भूत नजारा है । मेरा यह तस्वीर आपके साथ साझा करने का कारण है कि ये बादल अपनी स्थिति को बहुत जल्दी बदल रहे थे। यह सब देख कर मैं हैरान रह गई। मानो ये बादल कह रहे हो प्रकृति परिवर्तन शील है और हमें इसे स्वीकार करना होगा । ये बादल अपनी खूबसूरती तो बिखेर ही रहे थे साथ ही हमें प्रकृति का नियम भी समझा रहे थे । इन नजारो को देखने के लिए हमें अलग से कोई छुट्टियों का कार्यक्रम नही बनाना पड़ता बस जिंदगी के कुछ क्षण निकालने होते हैं और उन क्षणों में ठहर कर प्रकृति के साथ जीना होता है । जब हम इन क्षणों को जीना शुरु कर देते हैं जिंदगी अद्भुत बनने लगती है । जी कर देखिये एक बार। धन्यवाद । जय श्री राम ।

5 months ago (edited) | [YT] | 0

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फोटो में दिखाई देता यह दृश्य गोधूली बेला का है यानि जब दिन और रात मिलते हैं । यही समय हमारे शास्त्रों में पूजा अर्चना या संध्या समय का बताया गया है यानि आप इस समय अपने आराध्य को याद करें आत्मसात करें। लेकिन इसी समय यदि आप यह पल प्रकृति के साथ बितायें तो यही पल अनमोल बन जाएगा । करना बस आपको यह है कि इस पल को आप आसमान की तरफ देखते हुए प्रकृति को जीते हुए इस अनमोल पल को आत्मसात करें। खुद को अपने ही अंदर ढूंढने की कोशिश करे। खुले आसमान में शांत बैठकर खुद के अंदर उठ कर शोर को सुनकर उसे शांत करें और खुद को पाऐ । खुद को पाना ही सच्चा अध्यात्म है । धन्यवाद । जय श्री राम ।

6 months ago | [YT] | 1

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तस्वीर में नजर आ रहे ये गगनचुंबी वृक्ष हमें खुद के बौना होने का अहसास करा रहे हैं । प्रकृति अद्भूत है। ये वृक्षों की ऊँचाई हमें हमारे अंदर पनप रहे बड़े होने के अंहकार को एक क्षण में क्षण भंगुर करती है । बादलों को छूते प्रतीत होते इस वृक्ष के पत्ते हमें आभास कराते हैं कि प्रकृति प्रकृति से कितने प्रेम से बंधी हुई है लेकिन हम प्रकृति को खुद से अलग कर रहे हैं । प्रकृति वाकई बहुत खूबसूरत , चंचल , और ममतामई है। प्रकृति से जुड़कर हम खुद को पाते हैं और खुद को पा लेना ही सच्चा अध्यात्म है। धन्यवाद । जय श्री राम ।

6 months ago | [YT] | 0

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तस्वीर में दिखाई दे रहा यह सूखा पेड़ अपनी गगनचुंबी टहनियों के साथ आज भी अपनी सुंदरता बिखेर रहा है । साथ ही यौवन अवस्था में कितना विशाल और हरा भरा होगा यह गवाही भी उसका सूखा तना और शाखाएं दे रही हैं । इस पेड़ के साथ ही कुछ हरे भरे वृक्ष भी हमें दिखाई दे रहे हैं । जो इस सूखे वृक्ष की छत्र छाया में और भी हरे भरे प्रतीत हो रहे हैं । ऐसा ही जैसे हम नौजवान लोग बुर्जुगों की शरण में और भी युवा लगते हैं । अगर हमारे सिर पर बुजुर्गों का साया ना हो तो हम जिम्मेदारियों के बोझ तले कम उम्र में ही अधेड़ उम्र के प्रतीत होने लगते हैं । इसलिए अपने बुजुर्गों का हमेशा सत्कार करो । अपने माता पिता , बड़े भाई बहन , दादा दादी , ताऊ चाचा बड़े बूढ़ों का हमेशा आदर करो । उनकी कमी उन्हे पता होती है जिन सिर पर उनका साया नहीं रहता ।धन्यवाद जय श्री राम ।

6 months ago | [YT] | 0