मां चली गईं... हेमंत सोरेन के घर फिर पसरा गहरा सन्नाटा
कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जिनके चले जाने के बाद घर वही रहता है... दीवारें वही रहती हैं... आंगन वही रहता है... लेकिन उस घर की रौनक कहीं खो जाती है।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के परिवार पर एक बार फिर ऐसा ही दुख टूट पड़ा है। उनकी मां और दिशोम गुरु शिबू सोरेन की जीवनसंगिनी रूपी सोरेन अब इस दुनिया में नहीं रहीं।
लंबे समय से बीमारी से जूझ रहीं रूपी सोरेन का रांची के बरियातू स्थित हिल व्यू अस्पताल में इलाज चल रहा था। जिंदगी बचाने की कोशिशें होती रहीं... उम्मीदें बनी रहीं... परिवार उनके साथ खड़ा रहा... लेकिन आखिरकार वह घड़ी आ गई, जब मां की ममता से भरा वह साया हमेशा के लिए उठ गया।
एक मां का जाना सिर्फ एक इंसान का जाना नहीं होता।
मां घर की वह आवाज होती है, जिसे सुनकर उम्र चाहे कितनी भी हो जाए... बेटा खुद को बच्चा ही महसूस करता है। मां की मौजूदगी में जिंदगी की कितनी ही मुश्किलें छोटी लगती हैं। और जब वही मां नहीं रहतीं, तो इंसान के पास यादों के अलावा कुछ नहीं बचता।
रूपी सोरेन ने सिर्फ एक राजनीतिक परिवार की जिम्मेदारियां नहीं संभालीं। उन्होंने उस परिवार को संभाला, जिसके जीवन का बड़ा हिस्सा संघर्ष, आंदोलन और राजनीति के बीच गुजरा। दिशोम गुरु शिबू सोरेन के लंबे राजनीतिक सफर के दौरान उन्होंने परिवार को संभाले रखा। बच्चों की परवरिश की... घर की जिम्मेदारियां निभाईं... और परिवार के लिए वह मजबूत आधार बनी रहीं।
दुमका से भी उनका एक भावनात्मक रिश्ता रहा। राजनीति के मैदान में भी उनका नाम दर्ज हुआ। 1999 में झामुमो ने उन्हें दुमका लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा था। लेकिन चुनाव और राजनीति से कहीं बड़ा उनका परिचय एक मां, पत्नी और परिवार की उस महिला के रूप में रहा, जिसने अपने हिस्से की जिम्मेदारियां चुपचाप निभाईं।
आज वही दुमका भी गम में है...वही झारखंड भी शोक में है...
और सोरेन परिवार के घर में एक ऐसी कमी पैदा हो गई है, जिसे शायद कभी पूरा नहीं किया जा सकेगा।
पिछले कुछ समय में इस परिवार ने एक के बाद एक अपनों को खोने का दर्द देखा है। कुछ जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि एक और अपूरणीय क्षति सामने आ गई। ऐसे में रूपी सोरेन का जाना इस परिवार के लिए सिर्फ एक और दुखद घटना नहीं, बल्कि भावनाओं को झकझोर देने वाला एक और बड़ा आघात है।
रूपी सोरेन का जीवन अब स्मृतियों में रहेगा।
उनकी बातें... उनका स्नेह... उनका संघर्ष... उनका परिवार के प्रति समर्पण... और उनके साथ बिताया हर एक पल अब उनके अपनों के लिए अनमोल याद बन चुका है।
दिशोम गुरु शिबू सोरेन के जीवन की साथी के रूप में... हेमंत सोरेन की मां के रूप में... और सोरेन परिवार की एक मजबूत स्तंभ के रूप में रूपी सोरेन को हमेशा याद किया जाएगा।
आज उन्हें सिर्फ श्रद्धांजलि देने का दिन नहीं है...
आज उस मां को याद करने का दिन है, जिसने अपने परिवार के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया।
स्व० रूपी सोरेन को भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दें और शोकाकुल सोरेन परिवार को इस अपार दुख को सहने की शक्ति दें। मां चली गईं...लेकिन मां की दुआएं और उनकी यादें कभी नहीं जातीं।
*पद्म भूषण सम्मान से अलंकृत राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री स्मृति शेष स्व० शिबू सोरेन जी की प्रथम पुण्यतिथि पर रामगढ़ जिला के नेमरा स्थित लुकैयाटांड में उनकी आदमकद प्रतिमा का अनावरण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन।*
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन की गरिमामयी उपस्थिति में झारखंड मंत्रालय स्थित सभागार में आयोजित झारखण्ड फ़िल्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड और सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट, कोलकाता के बीच MoU हस्ताक्षर समारोह हुआ संपन्न।
दिवंगत जे० एन० सिंह जी के संस्कार भोज में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन एवं विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन आज दिवंगत जे. एन. सिंह जी (राज्य सरकार के अवकाश प्राप्त अधिकारी ) के निधन पर आयोजित संस्कार भोज में सम्मिलित होने उनके पिस्का मोड़ (शारदा बैट्री गली), रांची स्थित आवास पहुंचे। यहां उन्होंने स्मृति शेष जेएन सिंह जी की तस्वीर पर माल्यार्पण कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने दिवंगत जेएन सिंह जी के पुत्र श्री विनोद कुमार सिंह एवं अन्य शोकाकुल परिजनों से मिलकर उन्हें ढाढ़स बंधाया और दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोक संतप्त परिजनों को दु:ख सहन करने की शक्ति देने की कामना ईश्वर से की।
झारखंड की मिट्टी में रचे-बसे नायक की याद: हेमंत सोरेन ने पिता शिबू सोरेन को दी भावभीनी श्रद्धांजलि
रांची, 11 जनवरी 2026: झारखंड की आत्मा में बसने वाले आदिवासी योद्धा, झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और दिशोम गुरु शिबू सोरेन की 82वीं जयंती आज एक भावुक स्मृति सभा में बदल गई। मोरहाबादी स्थित उनके पूर्व आवास पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने परिवार और साथियों के साथ मिलकर गुरुजी की तस्वीर पर फूल चढ़ाए, और उनके संघर्ष भरे जीवन को सलाम किया। यह पल न सिर्फ एक जयंती था, बल्कि झारखंड के सपनों को फिर से जीवंत करने का संकल्प था।
सुबह की ठंडी हवा में, जब सूरज की पहली किरणें रांची की पहाड़ियों पर पड़ रही थीं, तब हेमंत सोरेन अपनी मां रूपी सोरेन, पत्नी कल्पना सोरेन और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ वहां पहुंचे। उन्होंने गुरुजी की तस्वीर को निहारते हुए पुष्प अर्पित किए, मानो उनके विचारों को फिर से आवाज दे रहे हों। इस मौके पर मंत्री हफीजुल हसन, सुदिव्य कुमार, राज्यसभा सांसद जोबा मांझी, और जेएमएम के दिग्गज नेता विनोद पांडे, सुप्रियो भट्टाचार्य समेत दर्जनों जनप्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता जुटे। सभी ने एक स्वर में शिबू सोरेन के योगदान को याद किया – वह आदिवासी अस्मिता की लड़ाई, अलग राज्य का सपना, और कमजोर वर्गों के लिए उनका अटूट समर्पण।
"शिबू सोरेन सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि झारखंड की धड़कन थे," एक कार्यकर्ता ने कहा, जबकि सभा में मौजूद लोग उनके कृतित्व पर चर्चा करते हुए भावुक हो उठे। हेमंत सोरेन ने इस अवसर पर जोर देकर कहा कि गुरुजी का सपना – एक समृद्ध, न्यायपूर्ण झारखंड – अब उनकी सरकार की प्राथमिकता है। सभी ने संकल्प लिया कि उनके आदर्शों को जीवंत रखते हुए राज्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।
यह जयंती न केवल स्मृति का उत्सव थी, बल्कि एक प्रेरणा का स्रोत भी, जो बताती है कि सच्चे नेता कभी नहीं जाते – वे विचारों में अमर रहते हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा की यह सभा राज्य की राजनीति में एकजुटता का संदेश देती है, जहां अतीत की जड़ें भविष्य की नींव बन रही हैं।
दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी की 82 वीं जयंती के अवसर पर टाना भगत इनडोर स्टेडियम, खेलगांव, रांची में गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के सफल क्रियान्वयन को लेकर आयोजित संवाद कार्यक्रम में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन।
झारखंड में भावुक पल: हेमंत सोरेन ने पिता की जयंती पर दिव्यांग बच्चों के साथ मनाई खुशियां
रांची, 11 जनवरी 2026: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने आज एक खास मौके पर रांची के चेशायर होम का दौरा किया। यह मौका था उनके पिता और झारखंड आंदोलन के नायक शिबू सोरेन की 82वीं जन्मतिथि का। लेकिन इस बार जश्न का रंग थोड़ा अलग था – क्योंकि शिबू सोरेन अब इस दुनिया में नहीं हैं। फिर भी, परिवार ने उनके विचारों को जीवंत रखते हुए दिव्यांग बच्चों के बीच समय गुजारा, जो सभी के लिए प्रेरणादायक रहा।
चेशायर होम, जो दिव्यांग बच्चों के लिए एक सुरक्षित आश्रय है, आज खुशियों से गूंज उठा। मुख्यमंत्री ने बच्चों से बातचीत की, उनके सपनों को सुना और उन्हें कंबल व अन्य जरूरी चीजें बांटीं। कल्पना सोरेन ने भी बच्चों का हौसला बढ़ाया, उनकी कहानियां सुनीं और संस्था के काम की तारीफ की। यह जगह हेमंत सोरेन के लिए सिर्फ एक संस्था नहीं, बल्कि एक भावनात्मक बंधन है। वे अक्सर यहां आते हैं और बच्चों की ऊर्जा से खुद को चार्ज करते हैं।
हेमंत सोरेन ने कहा, "यह पहली बार है जब हम बाबा की जयंती उनके बिना मना रहे हैं। उनके संघर्ष ने हमें अलग राज्य का सपना दिया और कमजोर वर्गों के लिए लड़ना सिखाया।" उन्होंने बच्चों की ताकत की सराहना करते हुए जोड़ा, "ये बच्चे किसी से कम नहीं। उनका आत्मविश्वास देखकर लगता है कि वे दुनिया जीत सकते हैं।" मुख्यमंत्री ने वादा किया कि राज्य सरकार चेशायर होम को हर तरह की मदद देगी और दिव्यांगों के कल्याण के लिए और ज्यादा काम करेगी।
इस कार्यक्रम ने न केवल शिबू सोरेन की यादों को ताजा किया, बल्कि समाज के कमजोर तबके की तरफ ध्यान खींचा। नया साल शुरू होने के साथ ही, सोरेन दंपत्ति ने सभी को शुभकामनाएं दीं और बच्चों के बेहतर कल की उम्मीद जताई। यह घटना बताती है कि नेतृत्व सिर्फ सत्ता नहीं, बल्कि संवेदना और सेवा का नाम है।
झारखण्ड के तीन दिवसीय दौरे पर माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का आज रांची आगमन हुआ। इस अवसर पर बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर माननीय राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार एवं माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने माननीय राष्ट्रपति का अभिवादन और स्वागत किया। माननीय मुख्यमंत्री ने इस खास मौके पर माननीय राष्ट्रपति को प्रतीक चिन्ह (मोमेंटो) सप्रेम भेंट किया।
कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय परिसर में आज देश के विभिन्न राज्यों से आए "आदिवासी प्रतिनिधियों" का स्वागत एवं संबोधन करते हुए मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन।
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मां चली गईं... हेमंत सोरेन के घर फिर पसरा गहरा सन्नाटा
कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जिनके चले जाने के बाद घर वही रहता है... दीवारें वही रहती हैं... आंगन वही रहता है... लेकिन उस घर की रौनक कहीं खो जाती है।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के परिवार पर एक बार फिर ऐसा ही दुख टूट पड़ा है। उनकी मां और दिशोम गुरु शिबू सोरेन की जीवनसंगिनी रूपी सोरेन अब इस दुनिया में नहीं रहीं।
लंबे समय से बीमारी से जूझ रहीं रूपी सोरेन का रांची के बरियातू स्थित हिल व्यू अस्पताल में इलाज चल रहा था। जिंदगी बचाने की कोशिशें होती रहीं... उम्मीदें बनी रहीं... परिवार उनके साथ खड़ा रहा... लेकिन आखिरकार वह घड़ी आ गई, जब मां की ममता से भरा वह साया हमेशा के लिए उठ गया।
एक मां का जाना सिर्फ एक इंसान का जाना नहीं होता।
मां घर की वह आवाज होती है, जिसे सुनकर उम्र चाहे कितनी भी हो जाए... बेटा खुद को बच्चा ही महसूस करता है। मां की मौजूदगी में जिंदगी की कितनी ही मुश्किलें छोटी लगती हैं। और जब वही मां नहीं रहतीं, तो इंसान के पास यादों के अलावा कुछ नहीं बचता।
रूपी सोरेन ने सिर्फ एक राजनीतिक परिवार की जिम्मेदारियां नहीं संभालीं। उन्होंने उस परिवार को संभाला, जिसके जीवन का बड़ा हिस्सा संघर्ष, आंदोलन और राजनीति के बीच गुजरा। दिशोम गुरु शिबू सोरेन के लंबे राजनीतिक सफर के दौरान उन्होंने परिवार को संभाले रखा। बच्चों की परवरिश की... घर की जिम्मेदारियां निभाईं... और परिवार के लिए वह मजबूत आधार बनी रहीं।
दुमका से भी उनका एक भावनात्मक रिश्ता रहा। राजनीति के मैदान में भी उनका नाम दर्ज हुआ। 1999 में झामुमो ने उन्हें दुमका लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा था। लेकिन चुनाव और राजनीति से कहीं बड़ा उनका परिचय एक मां, पत्नी और परिवार की उस महिला के रूप में रहा, जिसने अपने हिस्से की जिम्मेदारियां चुपचाप निभाईं।
आज वही दुमका भी गम में है...वही झारखंड भी शोक में है...
और सोरेन परिवार के घर में एक ऐसी कमी पैदा हो गई है, जिसे शायद कभी पूरा नहीं किया जा सकेगा।
पिछले कुछ समय में इस परिवार ने एक के बाद एक अपनों को खोने का दर्द देखा है। कुछ जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि एक और अपूरणीय क्षति सामने आ गई। ऐसे में रूपी सोरेन का जाना इस परिवार के लिए सिर्फ एक और दुखद घटना नहीं, बल्कि भावनाओं को झकझोर देने वाला एक और बड़ा आघात है।
रूपी सोरेन का जीवन अब स्मृतियों में रहेगा।
उनकी बातें... उनका स्नेह... उनका संघर्ष... उनका परिवार के प्रति समर्पण... और उनके साथ बिताया हर एक पल अब उनके अपनों के लिए अनमोल याद बन चुका है।
दिशोम गुरु शिबू सोरेन के जीवन की साथी के रूप में... हेमंत सोरेन की मां के रूप में... और सोरेन परिवार की एक मजबूत स्तंभ के रूप में रूपी सोरेन को हमेशा याद किया जाएगा।
आज उन्हें सिर्फ श्रद्धांजलि देने का दिन नहीं है...
आज उस मां को याद करने का दिन है, जिसने अपने परिवार के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया।
स्व० रूपी सोरेन को भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दें और शोकाकुल सोरेन परिवार को इस अपार दुख को सहने की शक्ति दें। मां चली गईं...लेकिन मां की दुआएं और उनकी यादें कभी नहीं जातीं।
2 weeks ago | [YT] | 4
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*पद्म भूषण सम्मान से अलंकृत राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री स्मृति शेष स्व० शिबू सोरेन जी की प्रथम पुण्यतिथि पर रामगढ़ जिला के नेमरा स्थित लुकैयाटांड में उनकी आदमकद प्रतिमा का अनावरण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन।*
2 months ago | [YT] | 319
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मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन की गरिमामयी उपस्थिति में झारखंड मंत्रालय स्थित सभागार में आयोजित झारखण्ड फ़िल्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड और सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट, कोलकाता के बीच MoU हस्ताक्षर समारोह हुआ संपन्न।
3 months ago | [YT] | 2
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दिवंगत जे० एन० सिंह जी के संस्कार भोज में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन एवं विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन आज दिवंगत जे. एन. सिंह जी (राज्य सरकार के अवकाश प्राप्त अधिकारी ) के निधन पर आयोजित संस्कार भोज में सम्मिलित होने उनके पिस्का मोड़ (शारदा बैट्री गली), रांची स्थित आवास पहुंचे। यहां उन्होंने स्मृति शेष जेएन सिंह जी की तस्वीर पर माल्यार्पण कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने दिवंगत जेएन सिंह जी के पुत्र श्री विनोद कुमार सिंह एवं अन्य शोकाकुल परिजनों से मिलकर उन्हें ढाढ़स बंधाया और दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोक संतप्त परिजनों को दु:ख सहन करने की शक्ति देने की कामना ईश्वर से की।
6 months ago | [YT] | 2
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झारखंड की मिट्टी में रचे-बसे नायक की याद: हेमंत सोरेन ने पिता शिबू सोरेन को दी भावभीनी श्रद्धांजलि
रांची, 11 जनवरी 2026: झारखंड की आत्मा में बसने वाले आदिवासी योद्धा, झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और दिशोम गुरु शिबू सोरेन की 82वीं जयंती आज एक भावुक स्मृति सभा में बदल गई। मोरहाबादी स्थित उनके पूर्व आवास पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने परिवार और साथियों के साथ मिलकर गुरुजी की तस्वीर पर फूल चढ़ाए, और उनके संघर्ष भरे जीवन को सलाम किया। यह पल न सिर्फ एक जयंती था, बल्कि झारखंड के सपनों को फिर से जीवंत करने का संकल्प था।
सुबह की ठंडी हवा में, जब सूरज की पहली किरणें रांची की पहाड़ियों पर पड़ रही थीं, तब हेमंत सोरेन अपनी मां रूपी सोरेन, पत्नी कल्पना सोरेन और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ वहां पहुंचे। उन्होंने गुरुजी की तस्वीर को निहारते हुए पुष्प अर्पित किए, मानो उनके विचारों को फिर से आवाज दे रहे हों। इस मौके पर मंत्री हफीजुल हसन, सुदिव्य कुमार, राज्यसभा सांसद जोबा मांझी, और जेएमएम के दिग्गज नेता विनोद पांडे, सुप्रियो भट्टाचार्य समेत दर्जनों जनप्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता जुटे। सभी ने एक स्वर में शिबू सोरेन के योगदान को याद किया – वह आदिवासी अस्मिता की लड़ाई, अलग राज्य का सपना, और कमजोर वर्गों के लिए उनका अटूट समर्पण।
"शिबू सोरेन सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि झारखंड की धड़कन थे," एक कार्यकर्ता ने कहा, जबकि सभा में मौजूद लोग उनके कृतित्व पर चर्चा करते हुए भावुक हो उठे। हेमंत सोरेन ने इस अवसर पर जोर देकर कहा कि गुरुजी का सपना – एक समृद्ध, न्यायपूर्ण झारखंड – अब उनकी सरकार की प्राथमिकता है। सभी ने संकल्प लिया कि उनके आदर्शों को जीवंत रखते हुए राज्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।
यह जयंती न केवल स्मृति का उत्सव थी, बल्कि एक प्रेरणा का स्रोत भी, जो बताती है कि सच्चे नेता कभी नहीं जाते – वे विचारों में अमर रहते हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा की यह सभा राज्य की राजनीति में एकजुटता का संदेश देती है, जहां अतीत की जड़ें भविष्य की नींव बन रही हैं।
9 months ago | [YT] | 11
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दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी की 82 वीं जयंती के अवसर पर टाना भगत इनडोर स्टेडियम, खेलगांव, रांची में गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के सफल क्रियान्वयन को लेकर आयोजित संवाद कार्यक्रम में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन।
9 months ago | [YT] | 10
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झारखंड में भावुक पल: हेमंत सोरेन ने पिता की जयंती पर दिव्यांग बच्चों के साथ मनाई खुशियां
रांची, 11 जनवरी 2026: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने आज एक खास मौके पर रांची के चेशायर होम का दौरा किया। यह मौका था उनके पिता और झारखंड आंदोलन के नायक शिबू सोरेन की 82वीं जन्मतिथि का। लेकिन इस बार जश्न का रंग थोड़ा अलग था – क्योंकि शिबू सोरेन अब इस दुनिया में नहीं हैं। फिर भी, परिवार ने उनके विचारों को जीवंत रखते हुए दिव्यांग बच्चों के बीच समय गुजारा, जो सभी के लिए प्रेरणादायक रहा।
चेशायर होम, जो दिव्यांग बच्चों के लिए एक सुरक्षित आश्रय है, आज खुशियों से गूंज उठा। मुख्यमंत्री ने बच्चों से बातचीत की, उनके सपनों को सुना और उन्हें कंबल व अन्य जरूरी चीजें बांटीं। कल्पना सोरेन ने भी बच्चों का हौसला बढ़ाया, उनकी कहानियां सुनीं और संस्था के काम की तारीफ की। यह जगह हेमंत सोरेन के लिए सिर्फ एक संस्था नहीं, बल्कि एक भावनात्मक बंधन है। वे अक्सर यहां आते हैं और बच्चों की ऊर्जा से खुद को चार्ज करते हैं।
हेमंत सोरेन ने कहा, "यह पहली बार है जब हम बाबा की जयंती उनके बिना मना रहे हैं। उनके संघर्ष ने हमें अलग राज्य का सपना दिया और कमजोर वर्गों के लिए लड़ना सिखाया।" उन्होंने बच्चों की ताकत की सराहना करते हुए जोड़ा, "ये बच्चे किसी से कम नहीं। उनका आत्मविश्वास देखकर लगता है कि वे दुनिया जीत सकते हैं।" मुख्यमंत्री ने वादा किया कि राज्य सरकार चेशायर होम को हर तरह की मदद देगी और दिव्यांगों के कल्याण के लिए और ज्यादा काम करेगी।
इस कार्यक्रम ने न केवल शिबू सोरेन की यादों को ताजा किया, बल्कि समाज के कमजोर तबके की तरफ ध्यान खींचा। नया साल शुरू होने के साथ ही, सोरेन दंपत्ति ने सभी को शुभकामनाएं दीं और बच्चों के बेहतर कल की उम्मीद जताई। यह घटना बताती है कि नेतृत्व सिर्फ सत्ता नहीं, बल्कि संवेदना और सेवा का नाम है।
9 months ago | [YT] | 11
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सोनारी एयरपोर्ट जमशेदपुर परिसर में माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का अभिनंदन करते हुए माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन
9 months ago | [YT] | 23
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झारखण्ड के तीन दिवसीय दौरे पर माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का आज रांची आगमन हुआ। इस अवसर पर बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर माननीय राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार एवं माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने माननीय राष्ट्रपति का अभिवादन और स्वागत किया। माननीय मुख्यमंत्री ने इस खास मौके पर माननीय राष्ट्रपति को प्रतीक चिन्ह (मोमेंटो) सप्रेम भेंट किया।
9 months ago | [YT] | 23
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कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय परिसर में आज देश के विभिन्न राज्यों से आए "आदिवासी प्रतिनिधियों" का स्वागत एवं संबोधन करते हुए मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन।
10 months ago | [YT] | 24
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