MD IZHAR ANSARI OFFICIAL 

सदा मुस्कुराना और सब को प्यार करना गुनी जनों का सम्मान पाना बच्चों के दिल में रहना सच्चे आलोचकों से स्वीकृति पाना झूठे दोस्तों की दगाबाजी को सहना खूबसूरती को सराहना दूसरों में खुशियां तलाशना ऐसी उम्मीद के बिना दूसरों के लिए खुद को अर्पित करना उत्साह के साथ हंसना और खेलना और मस्ती भरे तराने गाना इस बात का एहसास है कि आपकी जिंदगी मैं किसी एक व्यक्ति का जीवन आसान बनाया यही सच्ची सफलता है


MD IZHAR ANSARI OFFICIAL



अल्लाह से करे दूर तो ता'लीम भी फ़ित्ना
इम्लाक भी औलाद भी जागीर भी फ़ित्ना
नाहक़ के लिए उट्ठे तो शमशीर भी फ़ित्ना
शमशीर ही क्या नारा-ए-तकबीर भी फ़ित्ना

शेर का अर्थ और संदर्भ

रचयिता: यह प्रसिद्ध शेर शायर सरफ़राज़ बज़्मी (और कई जगह अल्लामा इक़बाल के हवाले से भी मशहूर) का एक क़िता है। [1, 2]

अर्थ:

जो भी शिक्षा (ता'लीम) या ज्ञान इंसान को ईश्वर/अल्लाह और सत्य के मार्ग से दूर कर दे, वह एक फितना (परीकक्षा, बुराई या मुसीबत) बन जाती है।

इसी तरह सांसारिक संपत्ति (इम्लाक), संताने (औलाद) और बड़ी जायदाद भी अगर इंसान को अहंकार और धर्म से भटका दें तो वे फितना हैं।

यदि तलवार (शमशीर) अन्याय या गलत मक़सद के लिए उठे, तो वह भी फितना है।

यहाँ तक कि पवित्र नारा-ए-तकबीर (अल्लाहु अकबर का नारा) भी यदि गलत या जुल्म के इरादे से लगाया जाए, तो उसकी पवित्रता खत्म होकर वह फितना बन जाता है।

21 hours ago | [YT] | 5

MD IZHAR ANSARI OFFICIAL

Jumma Mubarak aap sabhi ko

1 day ago | [YT] | 7

MD IZHAR ANSARI OFFICIAL

हर मूर्तदा तस्दीक करने पर बरेलवी ही क्यूँ निकलती हैं !!

एक साल के अंदर सिर्फ मुबारकपूर ज़िला आज़मगढ़ की 39 लड़कियां गैर मज़हब लड़कों से इश्क मे शादी करली हालांकि यहां बरेलवी मदरसा अशरफिया दायरे मे बहुत बड़ा है दूर दराज से इस मदरसे मे लोग हाफ़िज़ मौलवी बनने आते हैं
बनारस की आय दिन वीडियो वायरल होती है कानपुर बरेली शहर का हाल तो जानते ही हैं आप लोग

अल्लाह इस बात का गवाह है मैं भी सुन्नी हूं
लिखने का मतलब हसद नफरत या दुश्मनी नहीं है खुदा की कसम बड़ी तकलीफ के साथ लिखती हूँ ताकि हमारे सुन्नी भाई पढ़कर अपनी बहन बेटियों को सही दीन की तालिमात दें रखवाली भी करें
हो सकता है आप लोगों मे किसी को मेरी बात काँटों की तरह चुभे गालियां भी देने का मन कर सकता है जी भर गालियां दे देना लेकिन मेरे भाइयों अब से निगरानी करो अपने घरों मे क्यूंकि बहन बेटी आपकी हैं गलतियां वो करती हैं शर्मिंदा पूरे कौम को होना पड़ता है लाइक भी मत करना बस खुदा के वास्ते अमल कर लेना ।।

2 days ago | [YT] | 8

MD IZHAR ANSARI OFFICIAL

#सऊदी_अरब में #क़ानून सबके लिए बराबर है, चाहे #शहज़ादा हो या #आम_आदमी!

#पहला_वाक़िआ — 1977
19 साल की शहज़ादी मिशाल बिन्त फ़हद को तालीम के लिए बेरूत (लेबनान) भेजा गया। वहाँ सऊदी सफ़ीर के भतीजे ख़ालिद अश्शाएर से उसका ताल्लुक़ क़ायम हो गया। वापस आने के बाद भी वे छिप-छिपकर मिलते रहे। जब शाही ख़ानदान को ख़बर हुई, तो दोनों जेद्दा एयरपोर्ट से भागने की कोशिश में पकड़े गए। शहज़ादी मर्दाना लिबास में थी। अदालत में दोनों ने अपने जुर्म का ख़ुद एतिराफ़ किया। 15 जुलाई 1977 को दोनों को जेद्दा में सरेआम सज़ा-ए-मौत दे दी गई।

#दूसरा_वाक़िआ — 2016
दिसंबर 2012 में रियाद के क़रीब अल-समामा के रेगिस्तानी कैंप में झगड़ा हुआ। शहज़ादा तुर्की बिन सऊद ने ग़ुस्से में अपने ही दोस्त आदिल अल-मुहैमिद को गोली मारकर क़त्ल कर दिया। आदिल एक आम और ग़रीब ख़ानदान से था। शाही ख़ानदान ने ख़ून-बहा की भारी रक़म पेश की, ख़ुद बादशाह की तरफ़ से भी माफ़ी माँगी गई, मगर आदिल के घरवाले इंसाफ़ पर डटे रहे। आख़िरकार 18 अक्टूबर 2016 को शहज़ादा तुर्की को भी सरेआम सज़ा-ए-मौत दे दी गई।

सोचिए!
जो मुल्क अपने शहज़ादे और शहज़ादी को भी माफ़ न करे, वह मक्का और मस्जिद-ए-नबवी की हुरमत पामाल करने वालों को कैसे माफ़ करेगा? वहाँ सख़्त क़ानून है, मुक़दमा अदालत में चलता है और फिर फ़ैसला होता है।

2 days ago | [YT] | 8

MD IZHAR ANSARI OFFICIAL

अमेरिका संस्था DAF ने @RSSorg के संगठनों को अरबों रुपये की फंडिंग की है। यह खुलासा @bellingcat की रिपोर्ट से हुआ है। सवाल यह है कि इतनी बड़ी रकम को कहाँ खपाया गया? क्या सरकारी एजेंसियां इसका पता लगाएंगी? सरकार जिस तरह ‘दूसरे’ NGO पर कड़ी नज़र रखती है, क्या RSS के संगठनों के लिए भी रवैया अख्तियार किया जाता है?

2 days ago | [YT] | 5

MD IZHAR ANSARI OFFICIAL

फ़िलिस्तीन की कराटे खिलाड़ी मरियम बशारत ने पोलैंड में आयोजित प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर अपने देश का नाम रोशन किया। उनकी इस उपलब्धि से फ़िलिस्तीन को अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर बड़ी पहचान मिली है।

मरियम की इस जीत को फ़िलिस्तीनी खेल जगत के लिए गर्व की उपलब्धि माना जा रहा है। उन्होंने अपने प्रदर्शन से साबित किया कि मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है।

4 days ago | [YT] | 15

MD IZHAR ANSARI OFFICIAL

असम में भारतीय जनता पार्टी सरकार के एक बड़े बेदखली अभियान के तहत पिछले दो दिनों में 1,100 से ज़्यादा मुस्लिम परिवारों को उनके घरों से उजाड़ दिया गया है.

प्रभावित होने वाले लोगों में ज्यादातर बंगाली भाषी मुस्लिम समुदाय के लोग हैं.
यह कार्रवाई राज्य के तीन जिलों, नगांव, गोलाघाट और होजाई, में की गई है.

अधिकारियों के मुताबिक, यह पूरा अभियान सरकारी और आरक्षित वन भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए चलाया गया है.

इस सिलसिले में रविवार को अभियान के दूसरे दिन नगांव जिले के 'लुतुमारी लोंगजाप रिजर्व फॉरेस्ट' में 600 से अधिक परिवारों के घरों को बुलडोजर से ढहा दिया गया.

प्रशासन का तर्क है कि ये लोग वन क्षेत्र पर अवैध कब्जा करके रह रहे थे.

इससे एक दिन पहले, शनिवार को भी भारी सुरक्षा बलों की तैनाती के बीच तीनों जिलों में कुल 547 परिवारों को बेदखल किया गया था.

इनमें नगांव से 336, होजाई से 152 और गोलाघाट से 59 परिवार शामिल हैं.

इस दो दिवसीय तोड़फोड़ कार्रवाई के दौरान इलाके की करीब 10 मस्जिदों को भी ध्वस्त किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है.

4 days ago | [YT] | 7

MD IZHAR ANSARI OFFICIAL

दस साल पहले जेएनयू से लापता हुए छात्र नजीब अहमद के मामले में न्याय की मांग एक बार फिर तेज हो गई है. इस बीच, विभिन्न छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन, जांच एजेंसियों और तत्कालीन छात्र संघ नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए हैं.

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में नजीब अहमद के लापता होने के दस साल पूरे होने पर 'जस्टिस फॉर नजीब' मार्च निकाला गया.

BAPSA, फ्रेटर्निटी मूवमेंट और MSF द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि एक दशक बीत जाने के बावजूद नजीब का कोई सुराग नहीं मिल पाया है और इस मामले में न्याय नहीं मिला है.

छात्र संगठनों ने आरोप लगाया है कि नजीब को इंसाफ दिलाने के बजाय, उस समय के वामपंथी जेएनयूएसयू (JNUSU) नेतृत्व, प्रशासन और जांच एजेंसियों ने इस मामले को दबाने और नजीब को ही कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की थी.

संगठनों ने सवाल उठाया है कि आखिर दस साल बाद भी यह साफ क्यों नहीं हो सका कि "नजीब कहां है" और इस मामले के लिए असल में कौन जिम्मेदार है?

1 week ago | [YT] | 31

MD IZHAR ANSARI OFFICIAL

सच कहूँ तो ख़्वाबों के शहर में देखा गया एक ख़ूबसूरत ख़्वाब!
बिफ़ज़्लिही तआला, एक और ख़्वाब, जिसे जामिया अशरफ़िया की चारदीवारी में देखा था, अब शर्मिंदा-ए-ताबीर होने जा रहा है।
कोडरमा और उसके आस-पास की बच्चियों की तालीम व तरबियत के लिए स्थापित होने वाला एक नौख़ेज़ इदारा अपनी व्यापक शैक्षिक एवं तरबियती योजना और मिशन के साथ उद्घाटन की दहलीज़ पर खड़ा है।
अतः आसपास के तमाम अभिभावकों, भाइयों और बुज़ुर्गों से पुरख़ुलूस गुज़ारिश है कि अपनी बेटियों, बच्चियों और बहनों को दीनी तालीम तथा अच्छे अख़लाक़ व बेहतर तरबियत से हमआहंग करने के लिए इस इदारे का रुख़ ज़रूर करें।
हमारा मक़सद सिर्फ़ तालीम देना नहीं, बल्कि बच्चियों के अंदर दीनी शऊर, अच्छे अख़लाक़, इल्मी सलाहियत और एक बेहतर मुस्तक़बिल की बुनियाद रखना है।
बारगाह-ए-इलाही में दुआ है:
मौला-ए-करीम! मेरे तमाम जायज़ मंसूबों को कामयाबी अता फ़रमा। हसद करने वालों के हसद, ज़ुल्म करने वालों के ज़ुल्म और दीनी, मिल्ली व समाजी ख़िदमात की राह में पेश आने वाली तमाम रुकावटों से निजात अता फ़रमा।
इस नेक मिशन को कामयाबी, मक़बूलियत और ख़ैर व बरकत का ज़रिया बना दे।आमीन!
✍️ मज़हर ज़िया मिस्बाही कोडरमा

1 week ago | [YT] | 11