एक गाँव में दो पड़ोसी रहते थे। एक का नाम था मेहनतलाल और दूसरे का नाम था नकलचंद।
मेहनतलाल जो भी नया काम करता, नकलचंद अगले दिन वही काम शुरू कर देता।
मेहनतलाल ने घर के बाहर फूल लगाए, तो नकलचंद ने भी फूल लगा दिए। मेहनतलाल ने नई दुकान खोली, तो नकलचंद ने भी वैसी ही दुकान खोल ली। यहाँ तक कि मेहनतलाल ने अपनी दुकान का नाम रखा "अपनी पहचान", तो नकलचंद ने अपनी दुकान का नाम रख दिया "हमारी भी अपनी पहचान"।
गाँव वाले नकलचंद की हरकतों पर खूब हँसते, लेकिन नकलचंद को लगता था कि वह बहुत होशियार है।
एक दिन मेहनतलाल ने सोचा कि क्यों न नकलचंद को उसकी असली प्रतिभा से परिचित करवाया जाए!
अगली सुबह मेहनतलाल ने अपने घर के बाहर एक बड़ा-सा बोर्ड लगाया, जिस पर लिखा था—
"यहाँ अक्ल किराए पर मिलती है।"
अगले ही दिन नकलचंद ने भी अपने घर के बाहर एक बोर्ड लगा दिया—
"यहाँ अक्ल आधे दाम पर मिलती है।"
यह देखकर एक बुजुर्ग नकलचंद के पास पहुँचे और बोले, "बेटा, थोड़ी अक्ल मिलेगी?"
नकलचंद बोला, "कितनी चाहिए?"
बुजुर्ग मुस्कुराए और बोले, "बस इतनी कि तुम अपनी पहचान खुद बना सको।"
नकलचंद चुप हो गया।
तभी पास खड़े मेहनतलाल ने मुस्कुराकर कहा—
"भाई, मेरी हर चीज की नकल कर ली, लेकिन एक चीज की नकल करना भूल गए।"
नकलचंद ने पूछा, "वह क्या?"
मेहनतलाल बोला—
"मेरी मेहनत की!"
पूरा गाँव ठहाकों से गूँज उठा।
कहानी का सार "दूसरों की नकल करने वालों की सबसे बड़ी गलतफहमी यही होती है कि उन्हे लगता है कि वे चेहरा चुराकर किरदार भी चुरा सकते हैं।"
और हाँ, नकल करने वालों से नाराज़ नहीं होना चाहिए क्योंकि कुछ लोगों की अपनी कोई पहचान नहीं होती, इसलिए वे दूसरों की पहचान उधार लेकर जीते हैं।
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मूली के पत्तों को फेंके नहीं उससे बनाए ये टेस्टी चटपटी सी चटनी https://youtu.be/EAmQ3zHrtOQ
2 days ago | [YT] | 7
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शुभ दशहरा 🙏
5 days ago | [YT] | 7
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Happy Navratri 🙏🥰
6 days ago | [YT] | 14
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🥳
1 week ago | [YT] | 10
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Shubh Navratri 🙏
1 week ago | [YT] | 10
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एक गाँव में दो पड़ोसी रहते थे। एक का नाम था मेहनतलाल और दूसरे का नाम था नकलचंद।
मेहनतलाल जो भी नया काम करता, नकलचंद अगले दिन वही काम शुरू कर देता।
मेहनतलाल ने घर के बाहर फूल लगाए, तो नकलचंद ने भी फूल लगा दिए। मेहनतलाल ने नई दुकान खोली, तो नकलचंद ने भी वैसी ही दुकान खोल ली। यहाँ तक कि मेहनतलाल ने अपनी दुकान का नाम रखा "अपनी पहचान", तो नकलचंद ने अपनी दुकान का नाम रख दिया "हमारी भी अपनी पहचान"।
गाँव वाले नकलचंद की हरकतों पर खूब हँसते, लेकिन नकलचंद को लगता था कि वह बहुत होशियार है।
एक दिन मेहनतलाल ने सोचा कि क्यों न नकलचंद को उसकी असली प्रतिभा से परिचित करवाया जाए!
अगली सुबह मेहनतलाल ने अपने घर के बाहर एक बड़ा-सा बोर्ड लगाया, जिस पर लिखा था—
"यहाँ अक्ल किराए पर मिलती है।"
अगले ही दिन नकलचंद ने भी अपने घर के बाहर एक बोर्ड लगा दिया—
"यहाँ अक्ल आधे दाम पर मिलती है।"
यह देखकर एक बुजुर्ग नकलचंद के पास पहुँचे और बोले, "बेटा, थोड़ी अक्ल मिलेगी?"
नकलचंद बोला, "कितनी चाहिए?"
बुजुर्ग मुस्कुराए और बोले, "बस इतनी कि तुम अपनी पहचान खुद बना सको।"
नकलचंद चुप हो गया।
तभी पास खड़े मेहनतलाल ने मुस्कुराकर कहा—
"भाई, मेरी हर चीज की नकल कर ली, लेकिन एक चीज की नकल करना भूल गए।"
नकलचंद ने पूछा, "वह क्या?"
मेहनतलाल बोला—
"मेरी मेहनत की!"
पूरा गाँव ठहाकों से गूँज उठा।
कहानी का सार
"दूसरों की नकल करने वालों की सबसे बड़ी गलतफहमी यही होती है कि उन्हे लगता है कि वे चेहरा चुराकर किरदार भी चुरा सकते हैं।"
और हाँ, नकल करने वालों से नाराज़ नहीं होना चाहिए क्योंकि कुछ लोगों की अपनी कोई पहचान नहीं होती, इसलिए वे दूसरों की पहचान उधार लेकर जीते हैं।
1 week ago | [YT] | 9
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Vrat Ke Liye Special Smoothie
https://youtu.be/3AZKR-52QfU
1 week ago | [YT] | 7
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Sometimes it's just a little thing that makes you happy 😊🥰
2 weeks ago | [YT] | 9
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High Protein Mung Daal Nashta
https://youtu.be/s5Xntq71Og4
2 weeks ago | [YT] | 8
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Leftover Roti Tasty Breakfast Recipe
https://youtu.be/E-mmihVQNt0
2 weeks ago | [YT] | 10
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