बिहार शिक्षक संघ

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300 उपार्जित अवकाश (EL) और लीव एनकैशमेंट के नियमों पर स्पष्टीकरण: 10 EL का उपयोग करने के बाद कैसे दोबारा पूरा होगा कोटा
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बिहार के नियोजित व विशिष्ट शिक्षकों के उपार्जित अवकाश (Earned Leave - EL) के संचयन (Accumulation) और उसके उपभोग को लेकर शिक्षकों के बीच बनी दुविधा पर शिक्षा विभाग एवं बिहार सेवा संहिता के प्रावधानों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की गई है। यदि कोई विशिष्ट शिक्षक अपने खाते में अधिकतम सीमा (300 EL) तक जमा अवकाश में से 10 दिनों का उपभोग कर लेते हैं, तो उनका कोटा किस प्रकार और कितने समय में पुन: 300 पूरा होगा, इसका पूरा गणितीय व कानूनी लेखा-जोखा सामने आया है।

​1. EL जोड़ने का नियम और वार्षिक दर
​वार्षिक क्रेडिट दर: बिहार सेवा संहिता एवं शिक्षा विभाग के नियमानुसार, शिक्षक द्वारा 1 वर्ष (12 महीने) की निर्बाध सेवा पूरी करने पर उनके खाते में कुल 11 दिनों का उपार्जित अवकाश (EL) जोड़ा जाता है।
​क्रेडिट का समय: यह अवकाश प्रतिवर्ष जनवरी माह में शिक्षक के लीव अकाउंट में जमा (Credit) किया जाता है।
​2. 10 EL की भरपाई में लगेगा लगभग 11 महीने का समय
​यदि किसी शिक्षक के खाते में 300 EL में से 10 दिनों की छुट्टी लेने पर शेष 290 EL बचते हैं, तो:
​गणना व समय अवधि: चुकी 12 महीने की सेवा पर 11 EL मिलते हैं, अत: 10 EL की क्षतिपूर्ति के लिए शिक्षक को लगातार लगभग 11 महीने की अनवरत (बिना किसी बिना-वेतन छुट्टी के) सेवा देनी होगी।
​अगले साइकिल में पुन: 300 EL: आगामी वर्ष के जनवरी क्रेडिट चक्र में 11 EL जुड़ते ही शिक्षक के खाते में अवकाश की संख्या पुन: अधिकतम सीमा 300 EL तक पहुंच जाएगी।
​3. शिक्षकों के लिए ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बिंदु
​300 दिनों की अधिकतम सीमा (Maximum Capping): नियमानुसार शिक्षकों के सेवा खाते में अधिकतम 300 EL ही संचित रह सकते हैं। यदि खाता पहले से 300 EL पर पूर्ण है और शिक्षक अवकाश का उपयोग नहीं करते हैं, तो उस वर्ष मिलने वाले 11 EL व्यपगत (Lapse) हो जाएंगे—वे 300 से अधिक नहीं जुड़ेंगे।
​रिटायरमेंट एनकैशमेंट पर प्रभाव नहीं: सेवा काल के दौरान यदि कोई शिक्षक आवश्यकता पड़ने पर 10 से 15 दिनों के EL का उपभोग कर भी लेते हैं, तो सेवानिवृत्ति (Retirement) से 1-2 वर्ष पूर्व तक यह कोटा पुनः आसानी से 300 दिन पूरा हो जाता है। इससे सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाले 300 दिनों के लीव एनकैशमेंट (Leave Encashment) की एकमुश्त राशि पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ता।
​निष्कर्ष: शिक्षकों को सलाह दी जाती है कि वे आवश्यकता पड़ने पर नियमानुसार उपार्जित अवकाश का निसंकोच उपयोग करें, क्योंकि सेवा अवधि शेष रहने पर आगामी वार्षिक क्रेडिट से इसकी भरपाई स्वतः हो जाती है।

4 days ago | [YT] | 4

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शिक्षकों से रिश्वत मांगना और वेतन रोकना पड़ा महंगा: मुजफ्फरपुर DPO स्थापना कार्यालय के लिपिकों पर होगी कड़ी कार्रवाई
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बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में शिक्षा विभाग के कर्मियों की मनमानी और भ्रष्टाचार पर अब विजिलेंस (निगरानी विभाग) का शिकंजा कस गया है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना), मुजफ्फरपुर कार्यालय के लिपिक (क्लर्क) श्री अजय कुमार एवं अन्य कर्मियों के खिलाफ शिक्षकों से वेतन भुगतान के एवज में अवैध रिश्वत मांगने, लंबित विपत्रों (बिलों) का जान-बूझकर भुगतान रोकने तथा शिक्षकों की प्रोन्नति (Promotion) में गंभीर अनियमितता बरतने का आरोप लगा है।

​इस पूरे मामले को लेकर विजिलेंस विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। बिहार सरकार के निगरानी विभाग (सूचना भवन, पटना) की विशेष कार्य पदाधिकारी डेज़ी ईरानी ने शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र (ज्ञापांक 791, दिनांक 05/10/2026) जारी कर नियमानुसार तुरंत सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

​ई-मेल के जरिए खुली भ्रष्टाचार की पोल
मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित शिक्षकों द्वारा ई-मेल (singhkanhaiyalal70@gmail.com और rukminiraj25101992@gmail.com) के माध्यम से निगरानी विभाग को लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत पत्र (परिवाद पत्र) में स्पष्ट आरोप लगाया गया था कि स्थापना शाखा के लिपिक वेतन जारी करने और प्रोन्नति देने के नाम पर अवैध वसूली कर रहे हैं तथा मना करने पर बिलों को अटका कर रखा जा रहा है।

​निगरानी विभाग ने भेजी शिकायत की छायाप्रति
निगरानी विभाग ने प्राप्त शिकायत पत्र की छायाप्रति को संलग्न करते हुए शिक्षा विभाग, बिहार को भेज दिया है और नियमानुसार आगे की विधि-सम्मत कार्रवाई करने को कहा है। इस कार्रवाई के बाद से मुजफ्फरपुर शिक्षा विभाग और स्थापना शाखा में हड़कंप मच गया है।

4 days ago | [YT] | 5

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बिहार शिक्षक ट्रांसफर : मधेपुरा में शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर DEO का अंतिम आदेश जारी, ई-शिक्षाकोष पोर्टल से जनरेट हुआ ट्रांसफर लेटर

​मधेपुरा: बिहार राज्य शिक्षक स्थानान्तरण नियमावली 2026 के तहत मधेपुरा जिले में अंतर-जिला प्रथम चरण के स्थानांतरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। कार्यालय जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO), मधेपुरा द्वारा इस संबंध में विस्तृत कार्यालय-आदेश जारी किया गया है।
​जिलाधिकारी मधेपुरा की अध्यक्षता में गठित जिला स्थापना समिति की बैठक (दिनांक 25.09.2026) में प्राप्त आपत्तियों के निष्पादन के बाद शिक्षकों को अंतिम रूप से विद्यालय आवंटित कर दिए गए हैं। अधिशेष (Surplus) के रूप में चिन्हित जिन शिक्षकों का स्थानांतरण पत्र ई-शिक्षाकोष (e-Shikshakosh) पोर्टल के माध्यम से जनरेट हो चुका है, उनके लिए मुख्य दिशानिर्देश जारी किए गए हैं:
​स्वीकृत अवकाश पर चल रहे शिक्षकों के लिए: ऐसे शिक्षक जो वर्तमान में स्वीकृत अवकाश पर हैं, वे अपने स्थानांतरित विद्यालय में योगदान प्रारूप पर हस्ताक्षर करने के बाद निर्धारित तिथि तक किसी भी माध्यम से संबंधित विद्यालय को इसे उपलब्ध कराएंगे। एचएम (HM) प्रति-हस्ताक्षर कर योगदान स्वीकृत करेंगे और उसकी प्रति ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर अपलोड कराएंगे।
​निलंबित शिक्षकों के लिए स्पष्ट निर्देश: जो शिक्षक वर्तमान में निलंबित हैं, स्थानांतरण होने के बावजूद वे अपने पूर्व निर्धारित मुख्यालय में ही बने रहेंगे। उन्हें फिलहाल नए स्थानांतरित विद्यालय में योगदान करने की अनुमति नहीं होगी।
​अक्टूबर महीने के वेतन भुगतान की शर्त: स्थानांतरित शिक्षकों को माह-अक्टूबर 2026 के वेतन आदि का भुगतान नए पदस्थापित विद्यालय से निर्गत अनुपस्थिति विवरणी (Absentee Statement) के आधार पर ही किया जाएगा।
​जिला शिक्षा पदाधिकारी मधेपुरा द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र (ज्ञापांक 2116, दिनांक 07/10/2026) की प्रतिलिपि सभी संबंधित शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों और क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक, कोशी प्रमंडल (सहरसा) को आवश्यक कार्रवाई हेतु भेज दी गई है।

4 days ago | [YT] | 12

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बिहार में आचार संहिता के चलते अटका शिक्षकों का ट्रांसफर, अब छठ पूजा के बाद होगी प्रक्रिया शुरू

​बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत करीब 3.30 लाख शिक्षकों के ऐच्छिक तबादले का इंतजार एक बार फिर लंबा हो गया है। शिक्षा विभाग द्वारा ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर 4 अक्टूबर से शुरू होने वाली ऐच्छिक ट्रांसफर-पोस्टिंग की प्रक्रिया को विधान परिषद उप-चुनाव की आचार संहिता लागू होने के कारण रोक दिया गया है।
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​तबादला रोकने का कारण: विधान परिषद के शिक्षक व स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में सीधे तौर पर शिक्षक ही मतदाता होते हैं। चुनाव की घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर तबादलों से मतदाताओं के प्रभावित होने की आशंका के कारण 4 अक्टूबर से प्रस्तावित सामान्य व ऐच्छिक ट्रांसफर की प्रक्रिया रोक दी गई।
​कब से शुरू होगी प्रक्रिया: राज्य में विधान परिषद चुनाव प्रक्रिया 31 अक्टूबर तक चलेगी। इसके बाद दीपावली, गोवर्धन पूजा, भैया दूज और छठ महापर्व के कारण विद्यालय और कार्यालय बंद रहेंगे। इसलिए छठ पर्व के समापन के बाद ही संशोधित समय-सारणी जारी की जाएगी और ई-शिक्षाकोष पोर्टल को खोला जाएगा।

​प्रभावित शिक्षक: इस पूरी प्रक्रिया के तहत राज्य के करीब 3.30 लाख शिक्षक ऐच्छिक तबादले के दायरे में आएंगे।

5 days ago | [YT] | 4

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बिहार शिक्षक स्थानांतरण नीति: नए स्कूल में जॉइनिंग की बाध्यता खत्म, पुराने विद्यालय में रहने का मिलेगा विकल्प

​बिहार में शिक्षकों की स्थानांतरण नीति में बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित नए नियमों के तहत स्वैच्छिक तबादला (Voluntary Transfer) लेने वाले शिक्षकों को नए विद्यालय में जॉइनिंग की अनिवार्यता से राहत दी जाएगी। यदि किसी शिक्षक को नई जगह पर कोई परेशानी होती है, तो उन्हें अपने पुराने विद्यालय में ही बने रहने का विकल्प मिलेगा।
​शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने शिक्षक प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत के दौरान यह आश्वासन दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वैच्छिक तबादले के मामले में नए स्कूल में योगदान करने की बाध्यता नहीं होगी। इसके अतिरिक्त, शिक्षक, प्रधान शिक्षक (HT) और प्रधानाध्यापक (HM) एक साथ स्थानांतरण के लिए आवेदन कर सकेंगे।
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​पुराने स्कूल में रहने का विकल्प: तबादला होने के बाद भी यदि शिक्षक नए स्कूल में नहीं जाना चाहते या परेशानी होती है, तो वे पुराने स्कूल में ही कार्यरत रह सकेंगे।

​सरप्लस शिक्षकों को फिर मिलेगा मौका: सरप्लस (अधिशेष) घोषित किए गए शिक्षकों को स्थानांतरण के लिए एक बार फिर से अपनी पसंद का विद्यालय चुनने का अवसर दिया जाएगा।

​सरप्लस नियमों में संशोधन: 5 वर्ष से अधिक सेवा वाले वरीय शिक्षकों को सरप्लस चिह्नित करने वाले प्रावधान को हटाने की बात चल रही है। अब मुख्य रूप से कनिष्ठ शिक्षकों को सरप्लस के रूप में चिह्नित किया जा सकता है।

​रैंडम ट्रांसफर का प्रावधान: यदि विकल्प देने के बाद भी किसी शिक्षक का समायोजन नहीं हो पाता है, तो उन्हें राज्य के किसी भी विद्यालय में रैंडम (Random) तरीके से स्थानांतरित किया जा सकता है।

​म्यूचुअल ट्रांसफर: शिक्षकों को आपस में पारस्परिक स्थानांतरण (Mutual Transfer) का भी पुनः मौका दिया जाएगा।

5 days ago | [YT] | 4

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बिहार शिक्षक ट्रांसफर : शिक्षक स्थानांतरण: पूर्णिया DEO का आदेश, 5 अक्टूबर तक नए स्कूल में योगदान देना अनिवार्य

​ बिहार राज्य शिक्षक स्थानांतरण नियमावली 2026 के तहत प्रथम चरण में स्थानांतरित शिक्षकों के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO), पूर्णिया ने अंतिम आदेश जारी कर दिया है। स्थानांतरण पत्र ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है।
​मुख्य बिंदु:
​योगदान की अंतिम तिथि: स्थानांतरित शिक्षकों को 05 अक्टूबर 2026 की अपराह्न तक नए विद्यालय में योगदान देना अनिवार्य है।
​छुट्टी पर मौजूद शिक्षक: स्वीकृत अवकाश पर चल रहे शिक्षक अपना हस्ताक्षरित योगदान प्रारूप विद्यालय को भेजेंगे, जिसे प्रधानाध्यापक पोर्टल पर अपलोड करेंगे।
​निलंबित शिक्षक: निलंबित शिक्षक अपने पूर्व निर्धारित मुख्यालय में ही बने रहेंगे, वे नए स्कूल में योगदान नहीं देंगे।
​अक्टूबर का वेतन: अक्टूबर 2026 का वेतन नए विद्यालय से मिलने वाली अनुपस्थिति विवरणी (Absentee Report) के आधार पर ही जारी होगा।

1 week ago | [YT] | 9

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सातवें वेतनमान पर शिक्षा मंत्री का बड़ा बयान: आंकलन जारी, जल्द मिलेगा परिणाम; शिक्षक संघों ने 2 अक्टूबर के अनशन को सफल बनाने की अपील की

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​बिहार के शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही सातवें वेतनमान की मांग पर माननीय शिक्षा मंत्री का एक बेहद महत्वपूर्ण और सकारात्मक बयान आया है। शिक्षा मंत्री ने कहा है कि सरकार ने सातवें वेतनमान का आंकलन शुरू कर दिया है और आने वाले दिनों में इसका परिणाम सब के सामने होगा।

​शिक्षा मंत्री के इस रुख से राज्यभर के लाखों शिक्षकों में एक नई उम्मीद जगी है। इसे शिक्षकों की एकजुटता और लगातार जारी संघर्ष की पहली बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।

​"सफलता करीब है, थोड़ा और जोर लगाइए"

​शिक्षा मंत्री के इस बयान के बाद शिक्षक प्रतिनिधियों ने सभी शिक्षक साथियों से अपील की है कि वे इस सकारात्मक माहौल में अपना मनोबल और बढ़ाएं। संघ के नेताओं का कहना है कि मंजिल अब दूर नहीं है, बस इस आंदोलन को अंतिम रूप देने की जरूरत है।

​02 अक्टूबर से शुरू हो रहे अनशन को बनाएं ऐतिहासिक

​शिक्षक संघों ने राज्य के कोने-कोने से शिक्षक साथियों का आह्वान किया है कि 02 अक्टूबर से शुरू हो रहे अनशन कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।

​एकजुटता से ही मिलेगी पूर्ण सफलता: मंत्री जी का बयान उत्साहजनक है, लेकिन सरकार से अपना अधिकार पूरी तरह हासिल करने के लिए अनशन को अभूतपूर्व मजबूती देना अनिवार्य है।

​सत्याग्रह की राह पर शिक्षक: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर शुरू हो रहे इस अनशन को सफल बनाकर सरकार तक अपनी मजबूत आवाज पहुँचाने का संकल्प लिया गया है।

​शिक्षक प्रतिनिधियों का स्पष्ट कहना है—"थोड़ा जोर और लगाइए शिक्षक साथियों, सफलता जरूर मिलेगी। 2 अक्टूबर के अनशन को ऐतिहासिक बनाइए!"

1 week ago | [YT] | 0

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शिक्षकों के ट्रांसफर-पोस्टिंग पर सस्पेंस: विधान परिषद चुनाव के कारण शिक्षा विभाग ने राज्य निर्वाचन आयोग से मांगा मार्गदर्शन
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राज्य में शिक्षकों के स्थानांतरण और पदस्थापना (ट्रांसफर-पोस्टिंग) की प्रक्रिया को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। आगामी विधान परिषद (MLC) चुनाव को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग ने राज्य निर्वाचन आयोग से औपचारिक मार्गदर्शन मांगा है। निर्वाचन आयोग से सहमति मिलने के बाद ही स्थानांतरण की अंतिम सूची जारी की जाएगी।
​कई जिलों में अटकी ट्रांसफर लिस्ट
वर्तमान में कई ऐसे जिले हैं जहां अब तक स्थानांतरण सूची जारी नहीं हो सकी है और शिक्षकों को पदस्थापना पत्र नहीं मिल पाया है। इसमें सरप्लस, म्यूचुअल (पारस्परिक) और अंतर-जिला (इंटर-डिस्ट्रिक्ट) स्थानांतरण की सूचियां शामिल हैं।
​विभाग का रुख: स्टे से इनकार, अनुमति की उम्मीद
सूत्रों/न्यूज़ 18 के अनुसार, फिलहाल शिक्षा विभाग ने ट्रांसफर ऑर्डर पर रोक (स्टे) लगाने से साफ इनकार कर दिया है। विभाग का मानना है कि निर्वाचन आयोग से जल्द ही प्रक्रिया पूरी करने की सहमति मिल जाएगी। उम्मीद जताई जा रही है कि एक से दो दिनों में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
​4 अक्टूबर से खुलना है ई-शिक्षाकोष पोर्टल
सामान्य स्थानांतरण के लिए शिक्षकों को 4 अक्टूबर से 'ई-शिक्षाकोष' (e-Shikshakosh) पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना है। हालांकि, पोर्टल का खुलना भी निर्वाचन आयोग की हरी झंडी पर निर्भर करेगा।
​चुनाव आयोग से अनुमति क्यों जरूरी?
चूंकि शिक्षक विधान परिषद चुनाव में मतदाता (वोटर) की भूमिका में होते हैं, इसलिए आचार संहिता और चुनावी प्रक्रियाओं के प्रभाव से बचने के लिए विभाग ने चुनाव आयोग से अनुमति मांगना उचित समझा है।

1 week ago | [YT] | 0

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बिहार के नियोजित शिक्षकों के लिए बड़ी खबर: अब SNA SPARSH पोर्टल से होगा वेतन भुगतान, सभी की बनेगी Unique Pay ID

​पटना: बिहार के शिक्षा विभाग और समग्र शिक्षा अभियान (SSA) के अंतर्गत कार्यरत नियोजित शिक्षकों के वेतन भुगतान व्यवस्था को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण आदेश सामने आया है। राज्य में अब नियोजित शिक्षकों के वेतन का भुगतान SNA SPARSH पोर्टल (Single Nodal Agency) के माध्यम से डिजिटल रूप से किया जाएगा।

​इस नई व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए बिहार के सभी जिलों के शिक्षा पदाधिकारियों (DEO/DPO) को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने जिले में कार्यरत सभी नियोजित शिक्षकों की Unique Pay ID जल्द से जल्द जनरेट करवाएं।

​क्या है नई व्यवस्था और क्यों लिया गया यह निर्णय?

​अब तक समग्र शिक्षा अभियान (SSA) और अन्य मदों के तहत शिक्षकों के वेतन भुगतान में वित्तीय अनियमितता, बजट लेट-लतीफी और तकनीकी कागजी प्रक्रियाओं के कारण महीनों की देरी देखने को मिलती थी। केंद्र सरकार की वित्तीय प्रबंधन नीति के तहत 'SNA SPARSH 2.0' पोर्टल को लागू किया जा रहा है:

​पारदर्शिता और त्वरित भुगतान: इस पोर्टल के जरिए केंद्र और राज्य सरकार से जारी होने वाले फंड की ऑनलाइन ट्रैकिंग होगी, जिससे शिक्षकों के बैंक खाते में सीधा और पारदर्शी भुगतान संभव हो सकेगा।

​Unique Pay ID की अनिवार्यता: प्रत्येक शिक्षक का एक विशेष डिजिटल प्रोफाइल और Pay ID तैयार किया जा रहा है, जिससे हर शिक्षक का ऑनबोर्डिंग और डेटा वेरिफिकेशन पूरा होगा।

​लेट-लतीफी से मिलेगी राहत: बिल पास होने और फंड ट्रांसफर की लंबी विभागीय प्रक्रिया खत्म होगी, जिससे समय पर हर माह वेतन मिलना सुनिश्चित होगा।

​शिक्षकों को क्या करना होगा?

​डॉक्यूमेंट्स का भौतिक व डिजिटल सत्यापन: शिक्षकों को अपने सेवा पुस्तिका विवरण, बैंक पासबुक, आधार कार्ड और पैन कार्ड की जानकारी संबंधित BRC/डीपीओ स्थापना कार्यालय में अपडेट करानी होगी।

​बैंक खाता वेरिफिकेशन: वेतन भुगतान सीधे PFMS/SNA पोर्टल से जोड़ा जा रहा है, इसलिए बैंक खाते में नाम, आधार लिंक और IFSC कोड का सही होना आवश्यक है।

​शिक्षा विभाग के इस कदम से राज्य के लाखों नियोजित शिक्षकों को समय पर वेतन मिलने की आस जगी है और विभागीय कार्यों में पारदर्शिता आने की उम्मीद जताई जा रही है। 

1 week ago | [YT] | 0

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शिक्षकों को नहीं मिलेगा 7वें वेतन आयोग का पूर्ण लाभ, बिहार सरकार का स्पष्ट इनकार
​पटना: बिहार के प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों, विशिष्ट शिक्षकों, पुस्तकालयाध्यक्षों, प्रधान शिक्षकों एवं प्रधानाध्यापकों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इन शिक्षकों को 7वें वेतन आयोग की अनुशंसाओं के अनुसार पूर्ण वित्तीय लाभ देने का कोई भी प्रस्ताव फिलहाल सरकार के समक्ष विचाराधीन नहीं है।
​यह जानकारी बिहार विधान परिषद में गया शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से माननीय सदस्य श्री जीवन कुमार द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्न के उत्तर में शिक्षा विभाग, बिहार सरकार के मंत्री श्री मिथिलेश तिवारी की ओर से लिखित रूप में दी गई है।
​'समान काम के बदले समान वेतन' पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
​विधान परिषद में पूछे गए प्रश्न के जवाब में सरकार की ओर से बताया गया कि:
​पंचायती राज संस्थाओं एवं नगर निकाय संस्थाओं द्वारा नियुक्त शिक्षकों को समान कार्य के बदले समान वेतन देने से संबंधित सुप्रीम कोर्ट (SLP C No. 20/2018) ने 10 मई 2019 को पारित अपने आदेश में पटना हाईकोर्ट के फैसले को निरस्त कर दिया था।
​राज्य सरकार ने समय-समय पर शिक्षकों के वेतन और सेवा शर्तों में सुधार किया है। 1 सितम्बर 2020 से 15% वेतन वृद्धि की गई थी।
7वें वेतन आयोग के लाभ पर सरकार का रुख
​दस्तावेज़ में यह साफ तौर पर उल्लिखित है कि राज्यकर्मियों के सामान्य फिटमेंट मैट्रिक्स (लेवल-01 से लेवल-14) से अलग इन पदों के लिए एक पृथक पे-मैट्रिक्स का निर्धारण किया गया है।
​शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों को 7वें वेतन आयोग की अनुशंसा के परिप्रेक्ष्य में पूर्ण वित्तीय लाभ देने से संबंधित कोई भी प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं है, जिससे 7वें वेतन आयोग के पूर्ण लाभ की आस लगाए शिक्षकों को बड़ा झटका लगा है।

2 months ago | [YT] | 9