NOTE - इस चैनल का उद्देश्य प्रभु यशु मसीह का सुसमाचार देना |
यूहन्ना 11:25 यीशु ने उस से कहा, पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूं, जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए, तौभी जीएगा।
परमेश्वर ने हम सबों की सृष्टि की किन्तु हम उन्हें नहीं जानते और अपनी पापी प्रवृति के कारण हम उनसे अलग हो गए। बिना परमेश्वर के न तो हमारी जिन्दगी का कोई उद्देश्य है और न ही कोई अर्थ। हमारे पापों का फल (कीमत) मृत्यु है, आध्यात्मिक और शारीरिक दोनों। आध्यात्मिक मृत्यु का अर्थ है परमेश्वर से अलग हो जाना। । यदि हम पापों से मरते हैं, तो हम आंतरिक रूप से परमेश्वर से अलग हो जाते हैं और हमारा अंत नरक होता है। हम अपने आपको पापों से कैसे बचा सकते हैं और कैसे परमेश्वर की शरण में जा सकते हैं? हम अपने आपको नहीं बचा सकते हैं क्योंकि एक पापी आदमी के लिए अपने आप को बचाना संभव नहीं है(ठीक वैसे ही जैसे की एक डूबता हुआ आदमी अपने आपको नहीं बचा सकता)। हमें कोई भी नहीं बचा सकता क्योंकि सबके सब पापी हैं(एक डूबता हुआ आदमी दूसरे डूबते हुए को नहीं बचा सकता, दोनों को मदद की आवश्यकता होती है)।
BY Gallan Yeshu Diya
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