श्रीकृष्ण की रासलीला वृंदावन की गलियों में आज भी कहानी किस्सों की तरह सुनाई जाती है। स्थानीय लोग बताते हैं कि कान्हा राधा जी के साथ शाम होने पर वन में रास रचाते थे। उनका साथ देने के लिए वन के पेड़ पौधे गोपियां बन जाया करती थीं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वृंदावन का निधिवन रासलीला का गवाह है। आज भी शाम की आरती के बाद निधिवन को बंद कर दिया जाता है। लोगों का मानना है कि भगवान रासलीला करने के लिए हर शाम यहां आते हैं। पेड़ गोपियां बन जाते हैं और कान्हा और राधा का मिलन होता है।

इस रासलीला को मनुष्य तो क्या पशु पक्षियां भी नहीं देखते। सभी निधिवन से दूर हो जाते हैं। मान्यता ये भी है कि जिस भी मनुष्य ने कन्हैया की रासलीला देखने की कोशिश की वह इसे बताने योग्य न रहा। या तो वह अपने होश खो बैठा या उसकी किसी कारण मौत हो गई। निधिवन में लगे तुलसी के पौधे जोड़ों में हैं। जो कृष्ण और राधा की रास लीला में शामिल होने के लिए गोपियों का रूप धारण कर लेती हैं।